रंग पंचमी 8 मार्च: अभिजित और विजय मुहूर्त का महत्व जानें
सारांश
Key Takeaways
- 8 मार्च को रंग पंचमी मनाई जाएगी।
- इस दिन अभिजित और विजय मुहूर्त का महत्व है।
- रंग पंचमी पर विशेष आयोजन होते हैं।
- भगवान कृष्ण और राधा रानी की पूजा की जाती है।
- अशुभ समय का ध्यान रखना आवश्यक है।
नई दिल्ली, 7 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। सनातन धर्म में पंचांग के माध्यम से दिन का आरंभ करना अनिवार्य माना जाता है। इसी के माध्यम से शुभ और अशुभ समय का ज्ञान प्राप्त होता है। दृक पंचांग के अनुसार, 8 मार्च को चैत्र मास, कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि है, जिसे रंग पंचमी के रूप में मनाया जाता है।
यह त्योहार भगवान कृष्ण और राधा रानी के रंग-गुलाल खेलने के लिए समर्पित है। मथुरा, वृंदावन और देश के विभिन्न मंदिरों में इस दिन विशेष रंगोत्सव, झांकियां और होलिका उत्सव का आयोजन किया जाता है। रंग पंचमी को कृष्ण पंचमी या देव पंचमी भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन श्रीकृष्ण और राधा रानी होली खेलते हैं।
8 मार्च को रविवार है। इस दिन कई शुभ मुहूर्त हैं, विशेषकर अभिजित मुहूर्त और विजय मुहूर्त में नए कार्य, पूजा-पाठ या महत्वपूर्ण निर्णय लेना अत्यंत शुभ माना जाता है। सूर्योदय 6:39 बजे और सूर्यास्त शाम 6:25 बजे होगा। कृष्ण पक्ष की पंचमी शाम 9:10 बजे तक रहेगी, उसके बाद षष्ठी शुरू होगी। उदयातिथि के अनुसार पूरे दिन पंचमी तिथि का मान रहेगा। स्वाति नक्षत्र दोपहर 1:31 बजे तक और फिर विशाखा रहेगा। योग ध्रुव सुबह 7:04 बजे तक, उसके बाद व्याघात योग लागू होगा। करण कौलव सुबह 8:10 बजे तक और तैतिल शाम 9:10 बजे तक रहेगा।
रंग पंचमी पर शुभ मुहूर्त की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:01 बजे से 5:50 बजे तक है। अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:09 बजे से 12:56 बजे तक है। विजय मुहूर्त दोपहर 2:30 बजे से 3:17 बजे तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 6:23 बजे से 6:47 बजे तक रहेगा।
अशुभ समय का विचार भी महत्वपूर्ण है। रविवार को राहुकाल शाम 4:57 बजे से 6:25 बजे तक रहेगा। यमगण्ड दोपहर 12:32 बजे से 2:00 बजे तक, गुलिक काल दोपहर 3:29 बजे से 4:57 बजे तक और दुर्मुहूर्त शाम 4:51 बजे से 5:38 बजे तक रहेगा। वर्ज्य शाम 7:45 बजे से 9:31 बजे तक रहेगा।