आईआईटी बॉम्बे में जिंदा कारतूस के मामले में दूसरे संदिग्ध की गिरफ्तारी, कई राज हुए उजागर

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आईआईटी बॉम्बे में जिंदा कारतूस के मामले में दूसरे संदिग्ध की गिरफ्तारी, कई राज हुए उजागर

सारांश

आईआईटी बॉम्बे में जिंदा कारतूस मिलने के मामले में पुलिस ने दूसरे आरोपी को गिरफ्तार किया है। जानें क्या है इस मामले की पूरी कहानी और कौन हैं मुख्य आरोपी।

Key Takeaways

  • आईआईटी बॉम्बे में जिंदा कारतूस मिलने की घटना की जाँच चल रही है।
  • प्रशांत राज यादव को गिरफ्तार किया गया है।
  • पुलिस की जांच में कई राज सामने आए हैं।
  • अपूर्व मिश्रा ने कारतूस केवल दिखावे के लिए रखे थे।
  • सर्वोत्तम चौधरी और प्रशांत यादव के बीच हथियार खरीदने की बातचीत हुई थी।

मुंबई, 7 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। आईआईटी बॉम्बे के हॉस्टल के एक कमरे में जिंदा कारतूस मिलने की जांच में पुलिस ने दूसरे संदिग्ध को गिरफ्तार किया है। 24 वर्षीय प्रशांत राज यादव को उज्जैन में धार्मिक यात्रा के बाद लौटते समय पकड़ा गया। मुंबई पुलिस ने इस मामले की जानकारी दी।

पुलिस के अनुसार, आरोपी बिहार का निवासी है और एक रियल एस्टेट एजेंट के रूप में कार्यरत है। उस पर आरोप है कि उसने पहले गिरफ्तार आरोपी के साथ हथियारों की तस्वीरें साझा की थीं।

19 फरवरी को, आईआईटी बॉम्बे के हॉस्टल में फर्स्ट ईयर के बीटेक छात्र अपूर्व मिश्रा के कमरे से 7.65 मिमी के पांच जिंदा कारतूस बरामद किए गए थे। मिश्रा की दोस्ती पहले पकड़े गए आरोपी सर्वोत्तम चौधरी से थी। मिश्रा ने यह बताया था कि कारतूस चौधरी ही लेकर आया था।

पुलिस के अनुसार, पूछताछ में यह सामने आया कि अपूर्व मिश्रा ने कारतूस केवल अन्य छात्रों को प्रभावित करने के उद्देश्य से रखे थे, और उसका किसी को नुकसान पहुँचाने का कोई इरादा नहीं था।

जांच में यह भी पाया गया कि सर्वोत्तम चौधरी और प्रशांत यादव के बीच हथियार खरीदने की बातचीत हुई थी, लेकिन यह सौदा पूरा नहीं हुआ।

इस मामले का खुलासा तब हुआ जब आईआईटी के हॉस्टल परिसर में अपूर्व मिश्रा के पास कारतूस होने की सूचना पुलिस को मिली। जब पुलिस ने जांच की, तो अपूर्व मिश्रा के बैग से पांच जिंदा 7.65 मिमी के कारतूस बरामद हुए।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि हॉस्टल नंबर-1 के ग्राउंड फ्लोर पर दो छात्रों के बीच पैसे के लेन-देन को लेकर झगड़ा हुआ था। सुरक्षा टीम ने मौके पर पहुंचकर रूम नंबर 93 में रहने वाले सूरज दुबे और रूम नंबर 89 में रहने वाले अमन को शांत कराया। बातचीत के दौरान, दुबे और उसके दोस्तों को अपूर्व मिश्रा के पास से शराब की गंध आई, जिसके बाद नियमों के तहत कमरों की तलाशी ली गई।

तलाशी के दौरान, सूरज दुबे के कमरे में रखे काले बैग से 'केएफ 7.65' मार्क वाले पांच जिंदा कारतूस बरामद हुए, जिनकी कीमत लगभग 3,500 रुपए आंकी गई है। पूछताछ में दुबे ने बैग को अपूर्व मिश्रा का बताया। आगे की जांच में अपूर्व ने दावा किया कि कारतूस उसके दोस्त सर्वोत्तम चौधरी के हैं, जो बिहार के समस्तीपुर का निवासी है।

पुलिस के अनुसार, पूछताछ में सर्वोत्तम ने कथित तौर पर बिहार के मुंगेर से कारतूस खरीदने की बात स्वीकार की। इसके बाद पुलिस ने गैर-कानूनी तरीके से गोला-बारूद रखने और परिवहन के आरोप में सर्वोत्तम को गिरफ्तार कर लिया।

Point of View

बल्कि यह एक गंभीर अपराध की ओर भी इशारा करती है। छात्रों के बीच आपसी बातचीत और हथियारों की तस्वीरों का आदान-प्रदान बेहद चिंताजनक है। यह घटना शिक्षा संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाती है।
NationPress
07/03/2026

Frequently Asked Questions

आईआईटी बॉम्बे में जिंदा कारतूस कैसे मिले?
जिंदा कारतूस की बरामदगी उस समय हुई जब छात्रों के बीच झगड़ा हुआ और पुलिस को सूचना मिली।
प्रशांत राज यादव कौन है?
प्रशांत राज यादव 24 वर्षीय आरोपी है, जिसे उज्जैन से गिरफ्तार किया गया है।
क्या अपूर्व मिश्रा ने जानबूझकर कारतूस रखे थे?
पुलिस के अनुसार अपूर्व ने कारतूस केवल अन्य छात्रों को प्रभावित करने के लिए रखे थे।
इस मामले में आगे क्या कार्रवाई की जाएगी?
पुलिस मामले की जांच जारी रखेगी और अन्य आरोपियों को भी पकड़ा जा सकता है।
क्या यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है?
यह घटना सुरक्षा चिंताओं को जन्म देती है, लेकिन अभी तक कोई बड़ा खतरा नहीं पाया गया है।
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