अनिद्रा से छुटकारा पाने के लिए 7 प्रभावी योगासन
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 7 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। अनिद्रा (नींद न आने) की समस्या से जूझ रहे लोगों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। जब आप रात को बिस्तर पर जाते हैं, लेकिन नींद नहीं आती, बार-बार करवट बदलनी पड़ती है या थोड़ी देर सोने के बाद अचानक नींद खुल जाती है, तो यह स्थिति बेहद परेशान करती है। इसका प्रभाव दिनभर आपके शरीर और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। थकान महसूस होती है, सिर भारी रहता है और काम में मन नहीं लगता।
अनिद्रा के विभिन्न कारणों में तनाव, गलत खान-पान, अत्यधिक चाय-कॉफी का सेवन और शारीरिक गतिविधियों की कमी शामिल हैं। ऐसे में योग एक सरल और प्राकृतिक उपाय है, जो मानसिक शांति प्रदान करता है और शरीर को आराम देकर बेहतर नींद लाने में मदद करता है।
आप सबसे पहले हस्त उत्तानासन का अभ्यास कर सकते हैं। इसके लिए सीधे खड़े होकर पैरों के बीच थोड़ा सा अंतराल रखें। अब गहरी सांस लेते हुए अपने हाथों को ऊपर उठाएं और शरीर को हल्का सा पीछे की ओर झुकाएं। कुछ सेकंड इस स्थिति में रुकें और सामान्य सांस लेते रहें। फिर धीरे-धीरे वापस सामान्य स्थिति में आ जाएं।
दूसरा आसन है पादहस्तासन। सीधे खड़े होकर सांस भरें और हाथों को ऊपर उठाएं। फिर सांस छोड़ते हुए कमर से झुकते हुए आगे की ओर झुकें और हाथों से जमीन को छूने की कोशिश करें। इस स्थिति में कुछ समय रुकें और सामान्य सांस लेते रहें।
तीसरा आसन भद्रासन है। इसके लिए जमीन पर बैठकर दोनों पैरों के तलवों को आपस में मिलाएं। हाथों से पैर की उंगलियों को पकड़ें और कमर को सीधा रखें। इस स्थिति में आराम से बैठें और धीरे-धीरे सांस लेते-छोड़ते रहें।
इसके बाद आप योग मुद्रासन का अभ्यास कर सकते हैं। पद्मासन या अर्ध पद्मासन में बैठें। कमर सीधी रखें और हाथों को पीछे ले जाकर एक हाथ से दूसरे हाथ की कलाई पकड़ें। अब धीरे-धीरे आगे की ओर झुकें। कुछ समय इसी स्थिति में रहें।
पांचवां आसन भुजंगासन है। पेट के बल लेटकर हथेलियों को छाती के पास रखें और सांस लेते हुए गर्दन और छाती को ऊपर उठाएं। कुछ सेकंड रुकें और फिर धीरे-धीरे वापस सामान्य स्थिति में आ जाएं। इससे रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है और तनाव कम होता है।
इसके बाद नाड़ी शोधन प्राणायाम करना न भूलें। आराम से बैठ जाएं, कमर सीधी रखें। दाएं हाथ के अंगूठे से दाईं नासिका बंद करें और बाईं नासिका से धीरे-धीरे सांस लें। फिर बाईं नासिका बंद करके दाईं से सांस छोड़ें। इसी तरह कुछ मिनट तक करते रहें।
अंत में ध्यान का अभ्यास करें। सबसे पहले ध्यान मुद्रा में बैठ जाएं, फिर अपनी एक हथेली को दूसरी हथेली पर रखें। इस दौरान अपनी गर्दन और कंधों को सीधा रखें। अपने श्वास पर ध्यान केंद्रित करते हुए लंबी और गहरी सांस लें और फिर धीरे से छोड़ें।