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क्या सुकांत मजूमदार और निसिथ प्रमाणिक ने टीएमसी पर एसआईआर में रुकावट लगाने का आरोप लगाया?

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क्या सुकांत मजूमदार और निसिथ प्रमाणिक ने टीएमसी पर एसआईआर में रुकावट लगाने का आरोप लगाया?

सारांश

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एसआईआर प्रक्रिया को रोकने के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखा है। निसिथ प्रमाणिक और सुकांत मजूमदार ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। क्या इस विवाद का राजनीतिक असर होगा?

मुख्य बातें

ममता बनर्जी ने एसआईआर प्रक्रिया को रोकने के लिए पत्र लिखा है।
सुकांत मजूमदार और निसिथ प्रमाणिक ने इस पर प्रतिक्रिया दी है।
बांग्लादेशी घुसपैठियों का मुद्दा फिर से उठ रहा है।

कोलकाता, 20 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में चल रहे एसआईआर की प्रक्रिया को रोकने के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखा है। इस पत्र में ममता बनर्जी ने कहा है कि जिस प्रकार से यह प्रक्रिया चुनाव अधिकारियों और नागरिकों पर थोपे जा रही है, वह अनियोजित और खतरनाक है। ममता बनर्जी के पत्र के संदर्भ में पूर्व राज्य मंत्री निसिथ प्रमाणिक और केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।

केंद्रीय राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में पश्चिम बंगाल के अधिकारियों का चेहरा उजागर हुआ है। 300 से अधिक लोग दावा कर रहे हैं कि वे बांग्लादेशी हैं और यह बता रहे हैं कि वे सीमा पार करके आए हैं। उनका कहना है कि टीएमसी के लोग आधार कार्ड समेत कई फर्जी कागजात बनाने में मदद कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल उन्हें सहायता दे रहा है, जो न तो राज्य के हैं और न ही देश के। ममता बनर्जी एसआईआर को रोकना चाहती हैं। उनका कहना है कि इसे आगे बढ़ाना चाहती हैं, तो राष्ट्रपति शासन के बाद यह प्रक्रिया हो। ममता बनर्जी को यह पता चल गया है कि वे इसे रोक नहीं सकतीं, इसे केवल आगे बढ़ा सकती हैं।

वहीं निसिथ प्रमाणिक ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत करते हुए कहा कि यह न तो भारत सरकार का कार्यक्रम है और न ही भाजपा या टीएमसी का कोई कार्यक्रम है। यह चुनाव आयोग का नियमित कार्यक्रम है। इसे प्रभावित करना या इसका विरोध करना गलत है। बिहार में भी लोगों ने विरोध किया था, लेकिन यह प्रक्रिया अच्छे तरीके से पूरी हुई। पश्चिम बंगाल में भी विरोध हो रहा है, लेकिन यह प्रक्रिया पूरी होगी। उन्होंने कहा कि जिस तरीके से टीएमसी और ममता बनर्जी इसका विरोध कर रहे हैं, वह उचित नहीं है।

निसिथ प्रमाणिक ने कहा कि बीएलओ पर नाम जोड़ने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। इसके चलते बीएलओ दूसरा रास्ता चुन रहे हैं। इसके लिए टीएमसी और ममता बनर्जी जिम्मेदार हैं। अगर घोस्ट वोटर नहीं रहेंगे तो टीएमसी भी नहीं रहेगी।

उन्होंने कहा कि बांग्लादेश से आने वाले लोगों की टीएमसी के लोग ही मदद करते हैं, फर्जी कागजात बनवाते हैं। अभी से ही सीमा पर बहुत से रोहिंग्या वापस जाने के लिए खड़े हैं। यह अभी ट्रेलर है, लेकिन जब उन्हें हिरासत में लिए जाने की प्रक्रिया शुरू होगी तो हजारों नहीं, बल्कि लाखों घुसपैठिए सीमा पार करने के लिए गिड़गिड़ाएंगे।

भारत सरकार ने ममता दीदी से सीमा पर तार लगाने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए कहा, लेकिन वे ऐसा नहीं कर रही हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश का 450 किमी लंबा सीमा क्षेत्र केवल इस राज्य के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए खतरनाक है। ममता बनर्जी घुसपैठियों के लिए बीएसएफ को जिम्मेदार ठहराती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह महत्वपूर्ण है कि हम राजनीतिक विवादों के बीच तटस्थ होकर स्थिति का आकलन करें। ममता बनर्जी और टीएमसी का एसआईआर प्रक्रिया के खिलाफ खड़ा होना एक नीति के तहत हो रहा है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया को चुनौती दे सकता है। हमें इसे ध्यान से देखना होगा।
RashtraPress
30 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसआईआर प्रक्रिया क्या है?
एसआईआर प्रक्रिया का संबंध नागरिकों के अधिकारों और पहचान से है, जिसका उद्देश्य अवैध घुसपैठियों की पहचान करना है।
टीएमसी का इस प्रक्रिया पर क्या कहना है?
टीएमसी का कहना है कि यह प्रक्रिया अनियोजित और खतरनाक है और इसे चुनाव अधिकारियों पर थोपने की कोशिश की जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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