14 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

रानी मुखर्जी को ला ट्रोब यूनिवर्सिटी का मानद डॉक्टरेट, शाहरुख खान के बाद दूसरी भारतीय फिल्मी हस्ती

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
रानी मुखर्जी को ला ट्रोब यूनिवर्सिटी का मानद डॉक्टरेट, शाहरुख खान के बाद दूसरी भारतीय फिल्मी हस्ती

सारांश

रानी मुखर्जी को ऑस्ट्रेलिया की ला ट्रोब यूनिवर्सिटी ने IFFM 2026 में ऑनरेरी डॉक्टर ऑफ लेटर्स से नवाज़ा — तीन दशकों के सिनेमाई सफर की वैश्विक स्वीकृति, और शाहरुख खान के बाद यह गौरव पाने वाली दूसरी भारतीय फिल्मी हस्ती।

मुख्य बातें

रानी मुखर्जी को ला ट्रोब यूनिवर्सिटी, ऑस्ट्रेलिया ने ऑनरेरी डॉक्टर ऑफ लेटर्स की मानद उपाधि से सम्मानित किया।
यह सम्मान IFFM 2026 के तहत मेलबर्न के फेडरेशन स्क्वायर में आयोजित समारोह में दिया गया।
शाहरुख खान ( 2019 ) के बाद रानी यह उपाधि पाने वाली दूसरी भारतीय फिल्मी हस्ती हैं।
यूनिवर्सिटी ने भारतीय सिनेमा में रानी के करीब तीन दशकों के योगदान को इस सम्मान का आधार बताया।
रानी ने उपाधि को भारत और दुनियाभर के दर्शकों को समर्पित किया।

अभिनेत्री रानी मुखर्जी को ऑस्ट्रेलिया की प्रतिष्ठित ला ट्रोब यूनिवर्सिटी ने ऑनरेरी डॉक्टर ऑफ लेटर्स की मानद उपाधि से सम्मानित किया है। यह सम्मान उन्हें इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न (IFFM) 2026 के अंतर्गत मेलबर्न के फेडरेशन स्क्वायर में आयोजित एक विशेष समारोह में प्रदान किया गया। भारतीय सिनेमा में करीब तीन दशकों के उल्लेखनीय योगदान के लिए यह उपाधि देते हुए यूनिवर्सिटी ने उन्हें शाहरुख खान के बाद यह सम्मान पाने वाली दूसरी भारतीय फिल्मी हस्ती के रूप में मान्यता दी।

सम्मान की पृष्ठभूमि

ला ट्रोब यूनिवर्सिटी इससे पहले 2019 में शाहरुख खान को भारतीय सिनेमा में उनके योगदान के लिए यही सम्मान दे चुकी है। उस अवसर पर यूनिवर्सिटी ने उनके नाम पर एक पीएचडी स्कॉलरशिप की घोषणा भी की थी। रानी को दिया गया यह सम्मान उसी परंपरा की अगली कड़ी है, जो भारतीय सांस्कृतिक प्रतिनिधित्व को वैश्विक शैक्षणिक मंच पर स्वीकृति देती है।

गौरतलब है कि रानी मुखर्जी ने 'कुछ कुछ होता है', 'ब्लैक', 'मर्दानी' और 'हिचकी' जैसी फिल्मों से न केवल व्यावसायिक सफलता अर्जित की, बल्कि सामाजिक विमर्श को भी प्रभावित किया। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय सिनेमा वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान मज़बूत कर रहा है।

रानी मुखर्जी की प्रतिक्रिया

सम्मान स्वीकार करते हुए रानी ने इसे अपनी जिंदगी के सबसे खास पलों में से एक बताया। उन्होंने कहा, 'जब मैं छोटी थी, तब बाकी बच्चों की तरह मेरा भी सपना था कि मैं अपने परिवार और अपने देश को गर्व महसूस करा सकूं। आखिरकार सिनेमा मेरे लिए वह माध्यम बना, जिसके जरिए मैं इस सपने को पूरा कर सकी।'

अपने करियर के फैसलों पर बोलते हुए उन्होंने कहा, 'मैं शुरुआत से ही जोखिम उठाने के लिए हमेशा तैयार रही। मैंने कभी आसान या सुरक्षित रास्ता नहीं चुना। मैं ऐसी फिल्मों को चुनती थी, जिनकी कहानी सबसे पहले मेरे दिल को छूती हो — जो लोगों को प्रेरित करे और उन्हें सशक्त बनाए।'

महिला प्रतिनिधित्व पर रानी का नज़रिया

रानी ने स्पष्ट किया कि उनकी फिल्म चुनने की कसौटी हमेशा महिला-केंद्रित कहानियाँ रही हैं। उन्होंने कहा, 'मैं ऐसी कहानियों का हिस्सा बनना चाहती थी, जिनमें महिलाओं को सिर्फ सहायक किरदार के रूप में नहीं, बल्कि अपनी सोच और फैसले रखने वाली मजबूत शख्सियत के तौर पर दिखाया जाए।'

उन्होंने यह भी कहा, 'फिल्में लोगों की सोच बदलने से पहले उनके दिल को बदल सकती हैं। कलाकार धीरे-धीरे अपनी संस्कृति के प्रतिनिधि भी बन जाते हैं।' रानी ने इस उपाधि को भारत और दुनियाभर के दर्शकों को समर्पित किया।

भारत-ऑस्ट्रेलिया सांस्कृतिक संबंध

रानी ने कहा, 'मैं इसे सिर्फ रानी मुखर्जी के तौर पर नहीं, बल्कि एक भारतीय के रूप में गर्व से स्वीकार कर रही हूं। ऑस्ट्रेलिया में भारतीय संस्कृति और भारतीय सिनेमा को सम्मान मिलते देखना मेरे लिए बेहद गर्व की बात है।' IFFM 2026 के मंच पर मिला यह सम्मान भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच सांस्कृतिक कूटनीति की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

आने वाले समय में रानी मुखर्जी की फिल्मों और सार्वजनिक भूमिका पर इस वैश्विक मान्यता का क्या असर पड़ता है, यह देखना दिलचस्प होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या ऐसे सम्मान केवल बड़े नामों तक सीमित रहते हैं, जबकि समानांतर सिनेमा और क्षेत्रीय भाषाओं की अभिनेत्रियाँ भी सामाजिक बदलाव में उतनी ही भूमिका निभाती हैं। रानी का 'ब्लैक' से 'मर्दानी' तक का सफर निस्संदेह साहसिक रहा है, लेकिन इस सम्मान की असली कसौटी यह होगी कि यह भारत-ऑस्ट्रेलिया सांस्कृतिक संवाद को ज़मीनी स्तर पर कितना आगे ले जाता है।
RashtraPress
14 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रानी मुखर्जी को ला ट्रोब यूनिवर्सिटी ने कौन-सा सम्मान दिया है?
ला ट्रोब यूनिवर्सिटी, ऑस्ट्रेलिया ने रानी मुखर्जी को ऑनरेरी डॉक्टर ऑफ लेटर्स की मानद उपाधि से सम्मानित किया है। यह सम्मान IFFM 2026 के तहत मेलबर्न के फेडरेशन स्क्वायर में आयोजित समारोह में दिया गया।
शाहरुख खान को ला ट्रोब यूनिवर्सिटी ने कब सम्मानित किया था?
ला ट्रोब यूनिवर्सिटी ने शाहरुख खान को 2019 में भारतीय सिनेमा में उनके योगदान के लिए मानद डॉक्टरेट से सम्मानित किया था। उस अवसर पर यूनिवर्सिटी ने उनके नाम पर एक पीएचडी स्कॉलरशिप की घोषणा भी की थी।
रानी मुखर्जी को यह सम्मान किस आधार पर मिला?
यूनिवर्सिटी ने यह सम्मान भारतीय सिनेमा में रानी मुखर्जी के करीब तीन दशकों के उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए दिया। 'ब्लैक', 'मर्दानी', 'हिचकी' जैसी सामाजिक संदेश देने वाली फिल्मों में उनकी भूमिकाएँ विशेष रूप से उल्लेखनीय रहीं।
IFFM 2026 क्या है और यह कहाँ आयोजित हुआ?
IFFM यानी इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न ऑस्ट्रेलिया में आयोजित होने वाला प्रमुख भारतीय सिनेमा उत्सव है। 2026 का यह आयोजन मेलबर्न के फेडरेशन स्क्वायर में हुआ, जहाँ रानी मुखर्जी को मानद उपाधि प्रदान की गई।
रानी मुखर्जी ने इस सम्मान को किसे समर्पित किया?
रानी मुखर्जी ने इस मानद उपाधि को भारत और दुनियाभर के दर्शकों को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि वे इसे एक भारतीय के रूप में गर्व से स्वीकार कर रही हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 घंटे पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 2 सप्ताह पहले
  4. 2 सप्ताह पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 1 साल पहले