राष्ट्रपति मुर्मु को बुखारेस्ट में मानद डॉक्टरेट, बोलीं — शिक्षा जन्म नहीं, हौसला देखती है
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को 24 जुलाई 2026 को रोमानिया की राजधानी बुखारेस्ट स्थित बुखारेस्ट यूनिवर्सिटी ऑफ इकोनॉमिक स्टडीज ने मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया। शिक्षा, जनसेवा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग में उनके योगदान को देखते हुए दिया गया यह विश्वविद्यालय का सर्वोच्च शैक्षणिक सम्मान है।
मुर्मु का संबोधन: एक गाँव की बेटी से राष्ट्रपति तक का सफर
उपाधि ग्रहण करने के बाद अपने संबोधन में राष्ट्रपति मुर्मु ने अपनी जड़ों को याद किया। उन्होंने कहा, "मेरा जन्म एक छोटे से गाँव में एक ऐसे परिवार में हुआ था, जहाँ साधन बहुत सीमित थे। मैं अपने गाँव से कॉलेज जाने वाली पहली लड़की थी।" उन्होंने आगे कहा कि इस अनुभव ने उन्हें किसी भी पुस्तक से अधिक यह सिखाया कि शिक्षा ही सबसे बड़ा बराबरी का माध्यम है — "यह नहीं पूछती कि आपका जन्म कहाँ हुआ है, बल्कि यह देखती है कि आप कितनी दूर तक जाने की कोशिश करते हैं।"
मुर्मु ने अपने शिक्षक जीवन के दिनों को भी स्मरण किया और कहा कि साधारण-सी दिखने वाली कक्षाएँ भी परिवारों और समुदायों की दिशा बदलने की शक्ति रखती हैं।
भारत-रोमानिया मित्रता का प्रतीक
राष्ट्रपति ने विश्वविद्यालय के रेक्टर, सीनेट और समस्त विश्वविद्यालय परिवार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वे यह सम्मान "1.4 अरब भारतीयों की ओर से पूरी विनम्रता के साथ स्वीकार कर रही हैं" और यह पुरस्कार भारत व रोमानिया के लोगों के बीच दीर्घकालिक मित्रता का प्रतीक है।
AI युग में विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी
मुर्मु ने आज के तकनीकी परिवेश पर भी विचार रखे। उन्होंने कहा कि जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और विज्ञान तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं, तब विश्वविद्यालयों की ज़िम्मेदारी है कि ज्ञान के साथ-साथ समझदारी, नैतिकता और इंसानियत भी बनी रहे। यह संदेश उन्होंने ऐसे समय में दिया जब वैश्विक स्तर पर उच्च शिक्षा संस्थान AI के नैतिक उपयोग को लेकर नीतियाँ बना रहे हैं।
देश में शिक्षा की निष्पक्षता पर बड़ा सवाल
राष्ट्रपति के ये विचार ऐसे समय में आए हैं जब भारत में कई छात्र परीक्षा-संबंधी अनियमितताओं — जिनमें कथित तौर पर नीट पेपर लीक भी शामिल है — के विरुद्ध प्रदर्शन कर रहे हैं। इस पृष्ठभूमि में मुर्मु का यह कथन कि शिक्षा निष्पक्ष और सबके लिए सुलभ होनी चाहिए, एक व्यापक सामाजिक संदर्भ ग्रहण करता है।
आगे की राह
राष्ट्रपति मुर्मु की यह यूरोप यात्रा भारत-रोमानिया द्विपक्षीय संबंधों को नई गति देने के उद्देश्य से की जा रही है। शैक्षणिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग के नए अवसर खुलने की उम्मीद है।