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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जबलपुर में कहा: शिक्षा ही विकास का सबसे सशक्त माध्यम, जनजातीय युवाओं को मिले समान अवसर

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जबलपुर में कहा: शिक्षा ही विकास का सबसे सशक्त माध्यम, जनजातीय युवाओं को मिले समान अवसर

सारांश

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जबलपुर के दीक्षांत मंच से सिर्फ बधाई नहीं दी — उन्होंने एक स्पष्ट एजेंडा रखा: जनजातीय युवाओं को विकास की मुख्यधारा में लाओ, लेकिन उनकी अस्मिता की कीमत पर नहीं। आधुनिकता और परंपरा का यह संतुलन ही उनके संदेश की आत्मा थी।

मुख्य बातें

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 21 जून को जबलपुर में रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के 36वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया।
उन्होंने कहा कि शिक्षा किसी भी व्यक्ति या समुदाय के विकास का सबसे प्रभावी माध्यम है।
जनजातीय युवाओं को आधुनिक विकास में भागीदारी के साथ-साथ उनकी जनजातीय पहचान और अस्मिता बनाए रखने पर बल दिया।
पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तीकरण और वंचित वर्गों के विकास को अनुसंधान के केंद्र में रखने की अपील की।
सत्य, अहिंसा, करुणा, सेवा और ईमानदारी को शाश्वत मूल्य बताते हुए युवाओं से इन्हें जीवन का आधार बनाने का आग्रह किया।
जल, जंगल और जमीन के संरक्षण तथा सतत विकास को जीवन-यात्रा का अनिवार्य हिस्सा बताया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने रविवार, 21 जून को मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के 36वें दीक्षांत समारोह में शिरकत करते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि शिक्षा किसी भी व्यक्ति या समुदाय के विकास का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने विशेष रूप से जनजातीय समुदाय के शैक्षिक उत्थान को राष्ट्रीय प्राथमिकता बताते हुए विश्वविद्यालयों से इस दिशा में ठोस प्रयास करने का आह्वान किया।

जनजातीय युवाओं की पहचान और विकास — दोनों ज़रूरी

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि जनजातीय युवाओं को आधुनिक विकास में भागीदारी का अवसर मिलना चाहिए, लेकिन इसके साथ-साथ उनकी जनजातीय पहचान और अस्मिता भी अपने सहज रूप में बनी रहनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जनजातीय समुदाय के पारंपरिक कौशल और ज्ञान को विभिन्न माध्यमों से व्यापक रूप से प्रसारित किया जाना चाहिए।

रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जैसे शिक्षण संस्थानों को इस संबंध में विशेष भूमिका निभाने की अपेक्षा उन्होंने जताई। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब देश में आदिवासी शिक्षा की पहुँच और गुणवत्ता दोनों पर नीतिगत बहस जारी है।

उच्च शिक्षा संस्थानों की भूमिका और जिम्मेदारी

राष्ट्रपति ने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थान केवल डिग्री देने के केंद्र नहीं हैं — वे नवाचार और अनुसंधान के भी प्रमुख स्तंभ हैं। विद्यार्थियों में रचनात्मक सोच, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और उद्यमिता का विकास करना इन संस्थानों की अनिवार्य जिम्मेदारी है।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि संस्थानों से यह अपेक्षा है कि वे विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति, परंपराओं और भाषाओं के प्रति गर्व की भावना जागृत करें। उनके अनुसार, आधुनिकता और परंपरा के समन्वय से ही देश का संतुलित और समावेशी विकास संभव होगा।

समाजोपयोगी अनुसंधान पर बल

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तीकरण, वंचित वर्गों का विकास, स्वच्छता और सामाजिक समरसता जैसे विषयों को अध्ययन एवं अनुसंधान में केंद्रीय स्थान मिलना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि ऐसे शोध से न केवल समाज को प्रत्यक्ष लाभ होता है, बल्कि देश की विकास योजनाओं को भी वैज्ञानिक आधार मिलता है।

गौरतलब है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भी अनुसंधान को व्यावहारिक सामाजिक समस्याओं से जोड़ने पर जोर देती है — राष्ट्रपति का यह आह्वान उसी दिशा में एक सशक्त संदेश है।

भारतीय मूल्यों को जीवन का आधार बनाएं — युवाओं से आग्रह

राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज का विश्व तेज़ी से बदल रहा है — भाषा, रहन-सहन और जीवनशैली सभी में परिवर्तन आ रहा है। लेकिन उन्होंने यह भी याद दिलाया कि सत्य, अहिंसा, करुणा, सेवा और ईमानदारी जैसे मूल्य शाश्वत हैं और हर युग में मानवीय चेतना के केंद्र में रहे हैं।

उन्होंने स्नातकों से कहा कि वे केवल अपने परिवार या विश्वविद्यालय के प्रतिनिधि नहीं हैं, बल्कि राष्ट्र की आकांक्षाओं के निर्माता हैं। उनसे आग्रह किया गया कि वे अपनी शिक्षा और प्रतिभा का उपयोग व्यक्तिगत सफलता के साथ-साथ समाज के व्यापक कल्याण के लिए भी करें।

डिजिटल युग में पर्यावरण की जिम्मेदारी

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि भारत आज डिजिटल प्रौद्योगिकी, स्टार्टअप्स, हरित ऊर्जा, अंतरिक्ष अनुसंधान और आधुनिक अवसंरचना के क्षेत्रों में नई ऊंचाइयाँ छू रहा है। युवाओं को इन अवसरों का लाभ उठाकर वैश्विक पहचान बनाने के लिए प्रेरित करते हुए उन्होंने पर्यावरण के प्रति दायित्व की भी याद दिलाई।

उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन का संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग, जैव-विविधता की रक्षा और सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता प्रत्येक युवा की जीवन-यात्रा का अभिन्न हिस्सा होनी चाहिए। यह संदेश उन्होंने ऐसे समय पर दिया जब 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस भी मनाया जा रहा था — जो प्रकृति और मनुष्य के संतुलन का प्रतीक है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे व्यवहार में उतारने के लिए विश्वविद्यालयों को सिर्फ प्रेरणा नहीं, संसाधन और जवाबदेही भी चाहिए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के पाँच साल बाद भी उच्च शिक्षा में आदिवासी प्रतिनिधित्व और अनुसंधान की दिशा में ठोस प्रगति के आँकड़े सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं — यही वह रिक्तता है जिसे भरना होगा।
RashtraPress
23 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जबलपुर दीक्षांत समारोह में क्या कहा?
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि शिक्षा किसी भी व्यक्ति या समुदाय के विकास का सबसे प्रभावी माध्यम है और जनजातीय युवाओं को आधुनिक विकास में भागीदारी का अवसर मिलना चाहिए। साथ ही उन्होंने जनजातीय पहचान और पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित रखने पर भी बल दिया।
रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय का 36वाँ दीक्षांत समारोह कब और कहाँ हुआ?
यह समारोह 21 जून को मध्य प्रदेश के जबलपुर में आयोजित किया गया, जिसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं।
राष्ट्रपति मुर्मु ने जनजातीय शिक्षा पर क्या संदेश दिया?
उन्होंने कहा कि जनजातीय युवाओं को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जाए, लेकिन उनकी सांस्कृतिक अस्मिता और पारंपरिक कौशल की रक्षा भी उतनी ही ज़रूरी है। विश्वविद्यालयों से इस दिशा में विशेष प्रयास करने की अपेक्षा जताई गई।
राष्ट्रपति ने युवाओं को पर्यावरण के बारे में क्या सलाह दी?
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि जल, जंगल और जमीन का संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग और जैव-विविधता की रक्षा युवाओं की जीवन-यात्रा का अनिवार्य हिस्सा होनी चाहिए। उन्होंने डिजिटल और तकनीकी प्रगति के साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारी को संतुलित रखने पर जोर दिया।
उच्च शिक्षण संस्थानों से राष्ट्रपति की क्या अपेक्षाएँ हैं?
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थान नवाचार और अनुसंधान के केंद्र होने चाहिए और विद्यार्थियों में रचनात्मक सोच, वैज्ञानिक दृष्टिकोण तथा उद्यमिता विकसित करना उनकी प्रमुख जिम्मेदारी है। साथ ही संस्थानों को भारतीय संस्कृति और परंपराओं के प्रति गर्व की भावना भी जागृत करनी चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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