यूके ने लॉन्च किया 'नंबर III स्पेस इफेक्ट्स स्क्वाड्रन', सैटेलाइट सुरक्षा के लिए पहली सक्रिय अंतरिक्ष यूनिट
सारांश
मुख्य बातें
एयर चीफ मार्शल हार्व स्मिथ ने 23 सितंबर 2026 को लंदन में आयोजित यूके स्पेस पावर कॉन्फ्रेंस में ब्रिटेन के पहले सक्रिय मिलिट्री स्पेस स्क्वाड्रन का औपचारिक ऐलान किया, जो देश के संचार और मिसाइल चेतावनी सैटेलाइट्स की रक्षा करेगा। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब अंतरिक्ष में हथियारों की दौड़ को लेकर वैश्विक तनाव तेज़ी से बढ़ रहा है।
नई यूनिट की पहचान और भूमिका
नई यूनिट को आधिकारिक तौर पर 'नंबर III स्पेस इफेक्ट्स स्क्वाड्रन' नाम दिया गया है। रक्षा मंत्रालय (MoD) के अनुसार, यह यूनिट रॉयल एयर फोर्स (RAF) के अंतर्गत काम करेगी और ब्रिटेन की पहली ऐसी सैन्य इकाई होगी जो 'अंतरिक्ष में ब्रिटिश हितों को निशाना बनाने वाली दुश्मन की गतिविधियों को बाधित करने, कमज़ोर करने और रोकने' का सक्रिय काम करेगी।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह स्क्वाड्रन इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सहित उन्नत तकनीकों का इस्तेमाल करके अंतरिक्ष खतरों के विरुद्ध कार्रवाई करेगा — जो पहले की निगरानी-केंद्रित यूनिटों से एक बड़ा कदम है।
पहले से मौजूद स्क्वाड्रनों से क्या अलग है
गौरतलब है कि यूके ने 2023 में दो स्पेस स्क्वाड्रन लॉन्च किए थे, जिनका काम अंतरिक्ष खतरों पर 'नज़र रखना और चेतावनी देना' था। नई यूनिट उन्हीं खतरों के खिलाफ सीधी प्रतिक्रिया देने में सक्षम होगी। यह संक्रमण — निगरानी से सक्रिय प्रतिरोध की ओर — ब्रिटेन की स्पेस डिफेंस नीति में एक गुणात्मक बदलाव का संकेत है।
रक्षा मंत्री की चेतावनी और वैश्विक संदर्भ
यूके स्पेस पावर कॉन्फ्रेंस में उपस्थित रक्षा मंत्री वेस स्ट्रीटिंग ने संकेत दिया कि ब्रिटेन संभावित अंतरिक्ष हथियारों की दौड़ में शामिल होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यह घोषणा अमेरिका द्वारा पहली बार यह सार्वजनिक रूप से पुष्टि करने के एक सप्ताह से कुछ अधिक समय बाद आई है कि उसने पृथ्वी की कक्षा में हथियार तैनात किए हैं।
इस पुष्टि के बाद चीन ने बाहरी अंतरिक्ष को 'युद्ध का मैदान' बनाने के विरुद्ध चेतावनी दी, जबकि रूस ने माँग की कि अंतरिक्ष को 'किसी भी हथियार से मुक्त' रखा जाए। विशेषज्ञों के अनुसार यह बयानबाज़ी इस बात का प्रमाण है कि अंतरिक्ष अब कूटनीतिक तनाव का अगला मोर्चा बन चुका है।
रूस से ख़तरे की पृष्ठभूमि
पिछले वर्ष यूके स्पेस कमांड के प्रमुख मेजर जनरल पॉल टेडमैन ने कहा था कि वे रूस द्वारा नियमित रूप से ब्रिटिश मिलिट्री सैटेलाइट्स को जाम करने की कोशिशों को लेकर 'बहुत चिंतित' हैं। यह नई यूनिट उसी चिंता की सीधी प्रतिक्रिया मानी जा रही है।
यह ऐसे समय में आया है जब भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता ज़मीन और समुद्र के साथ-साथ अंतरिक्ष में भी विस्तार ले रही है, और सैटेलाइट नेटवर्क आधुनिक सैन्य अभियानों की रीढ़ बन चुके हैं।
आगे क्या होगा
नई यूनिट के परिचालन विवरण और बजट आवंटन की जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम NATO के अंतरिक्ष रक्षा ढाँचे को मज़बूत करेगा और अन्य सहयोगी देशों पर भी अपनी स्पेस डिफेंस क्षमताएँ विकसित करने का दबाव बनाएगा।