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एस-400 की डिलीवरी: 2023 में शेष दो स्क्वाड्रन मिलने की उम्मीद

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एस-400 की डिलीवरी: 2023 में शेष दो स्क्वाड्रन मिलने की उम्मीद

सारांश

भारतीय वायुसेना के लिए एक महत्वपूर्ण अपडेट! एस-400 की शेष दो स्क्वाड्रन की डिलीवरी इस वर्ष होने की संभावना है। ऑपरेशन सिंदूर में इस प्रणाली ने शानदार प्रदर्शन किया है। जानिए इसके बारे में अधिक जानकारी।

मुख्य बातें

एस-400 प्रणाली का पाकिस्तान के खिलाफ कॉम्बैट डेब्यू हुआ।
इस वर्ष शेष दो स्क्वाड्रन मिलने की संभावना।
डिफेंस प्रोक्योरमेंट बोर्ड ने 5 अतिरिक्त यूनिट्स की खरीद को मंजूरी दी।
रक्षा मंत्री की रूस यात्रा के दौरान डिलीवरी पर चर्चा हुई।
एस-400 की रडार क्षमता 600 किलोमीटर है।

नई दिल्ली, 6 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान के खिलाफ एस-400 का युद्धक प्रदर्शन हुआ। इस ऑपरेशन में, एस-400 ने 300 किलोमीटर दूर एक पाकिस्तानी विमान को निशाना बनाकर अब तक का सबसे लंबा किल रिकॉर्ड स्थापित किया। हालांकि, भारतीय वायुसेना को अनुबंध के अनुसार मिलने वाले 5 स्क्वाड्रन की पूरी डिलीवरी अभी तक नहीं हुई है।

वर्तमान में, भारतीय वायुसेना के पास केवल 3 स्क्वाड्रन हैं, लेकिन शेष दो स्क्वाड्रन का इंतजार इस वर्ष समाप्त होने की संभावना है। रक्षा अधिकारियों के अनुसार, अगले 2 से 3 महीनों में चौथी यूनिट प्राप्त हो सकती है और डील की अंतिम, यानी पांचवीं यूनिट, इस वर्ष के अंत तक मिलने की संभावना है।

भारतीय वायुसेना की मजबूती को बढ़ाने के उद्देश्य से अतिरिक्त एस-400 यूनिट्स की खरीद पर भी चर्चा चल रही है, और इस दिशा में निर्णय लेने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। हाल ही में, डिफेंस प्रोक्योरमेंट बोर्ड ने 5 अतिरिक्त एस-400 यूनिट्स की खरीद को मंजूरी दे दी है। इसके बाद यह प्रस्ताव डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (डीएसी) के पास अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा। वहां से एओएन (आवश्यकता की स्वीकृति) मंजूर होने के बाद खरीद प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर शुरू होगी। अंतिम मंजूरी प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) की बैठक में दी जाएगी।

इसके पूर्व, ऑपरेशन सिंदूर के तुरंत बाद, डीएसी ने एस-400 बैटरियों के लिए वार्षिक रखरखाव अनुबंध को भी स्वीकृति दी थी। सामान्यतः किसी भी सैन्य उपकरण की खरीद में रखरखाव शामिल होता है, लेकिन उस अनुबंध को समय-समय पर नवीनीकरण भी किया जाता है।

भारत ने 2018 में रूस से लॉन्ग रेंज एयर डिफेंस सिस्टम एस-400 खरीदने का निर्णय लिया था। रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण इसकी डिलीवरी में कुछ देरी हुई। 2024 में रक्षा मंत्री की रूस यात्रा के दौरान भी शेष दो स्क्वाड्रन की डिलीवरी पर चर्चा हुई थी।

एस-400 की क्षमताओं की बात करें तो भारतीय वायुसेना के एस-400 का कॉम्बैट डेब्यू पाकिस्तान के खिलाफ ही हुआ। इसका लॉन्ग रेंज रडार 600 किलोमीटर दूर से दुश्मन के हवाई खतरों का पता लगा सकता है। यह एक साथ 100 से अधिक उड़ने वाले वस्तुओं का ट्रैक करने की क्षमता रखता है।

यह स्ट्रैटेजिक बमवर्षक, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध विमान, टोही विमान, प्रारंभिक चेतावनी विमान, फाइटर जेट, सशस्त्र ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल जैसे खतरों को 400 किलोमीटर की दूरी से इंटरसेप्ट कर सकता है। एस-400 से 400, 250, 120 और 40 किलोमीटर रेंज की चार अलग-अलग मिसाइलें दागी जा सकती हैं।

भारत ने रूस के साथ 2018 में लगभग 39,000 करोड़ रुपए में पांच एस-400 सिस्टम खरीदने का अनुबंध किया था। पहली स्क्वाड्रन भारत को दिसंबर 2021 में प्राप्त हुई, दूसरी अप्रैल 2022 में और तीसरी फरवरी 2023 में वितरित की गई। शेष दो स्क्वाड्रन 2024 में मिलने की उम्मीद थी, लेकिन वह समय सीमा पूरी नहीं हो सकी। अब नई समय सीमा के अनुसार, इस वर्ष दोनों यूनिट्स मिलने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह क्षेत्र में भारत की वायु शक्ति को भी मजबूत करती है।
RashtraPress
9 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एस-400 सिस्टम क्या है?
एस-400 एक लॉन्ग रेंज एयर डिफेंस सिस्टम है, जिसका उपयोग दुश्मन के हवाई खतरों को पहचानने और नष्ट करने के लिए किया जाता है।
भारत ने एस-400 की डिलीवरी कब शुरू की?
भारत को एस-400 की पहली स्क्वाड्रन दिसंबर 2021 में मिली थी।
क्या एस-400 में रखरखाव कॉन्ट्रैक्ट होता है?
हाँ, एस-400 के लिए वार्षिक रखरखाव अनुबंध को भी मंजूरी दी गई है।
यह प्रणाली कितनी दूर तक दुश्मनों को पहचान सकती है?
एस-400 का रडार 600 किलोमीटर दूर से दुश्मन के हवाई खतरों का पता लगा सकता है।
भारत ने एस-400 के लिए कितना खर्च किया?
भारत ने रूस के साथ एस-400 सिस्टम के लिए लगभग 39,000 करोड़ रुपए का अनुबंध किया था।
राष्ट्र प्रेस
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