स्काईरूट एयरोस्पेस बनी भारत की पहली स्पेस-टेक यूनिकॉर्न, ₹570 करोड़ की नई फंडिंग से वैल्यूएशन ₹9,200 करोड़ पार
हैदराबाद स्थित स्पेस-टेक स्टार्टअप स्काईरूट एयरोस्पेस ने 7 मई 2026 को 60 मिलियन डॉलर (करीब ₹570 करोड़) की नई फंडिंग जुटाने की घोषणा की, जिसके साथ कंपनी की कुल वैल्यूएशन 1.1 अरब डॉलर (लगभग ₹9,200 करोड़) को पार कर गई। इस उपलब्धि के साथ स्काईरूट एयरोस्पेस भारत की पहली स्पेस-टेक स्टार्टअप यूनिकॉर्न बन गई है — एक ऐसा मील का पत्थर जो देश के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र की तेज़ रफ्तार को रेखांकित करता है।
फंडिंग राउंड का विवरण
इस ताज़ा फंडिंग राउंड में वैश्विक निवेशकों जीआईसी (GIC) और ब्लैकरॉक (BlackRock) सहित कई प्रतिष्ठित संस्थागत निवेशकों ने हिस्सा लिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी अब तक के सभी फंडिंग राउंड मिलाकर 160 मिलियन डॉलर (करीब ₹1,500 करोड़) से अधिक की पूंजी जुटा चुकी है। गौरतलब है कि मौजूदा वैल्यूएशन 2023 में कंपनी की 519 मिलियन डॉलर की वैल्यू से करीब चार गुना अधिक है, जो निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है।
यूनिकॉर्न का दर्जा क्यों अहम है
स्टार्टअप जगत में जब किसी कंपनी की वैल्यूएशन 1 अरब डॉलर से अधिक हो जाती है, तो उसे 'यूनिकॉर्न' का दर्जा दिया जाता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में अभी विभिन्न क्षेत्रों में 100 से अधिक यूनिकॉर्न मौजूद हैं, लेकिन स्पेस-टेक क्षेत्र में यह पहली बार है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार ने निजी अंतरिक्ष क्षेत्र को खोलने के लिए नीतिगत सुधार किए हैं और इसरो (ISRO) के साथ निजी कंपनियों का सहयोग बढ़ा है।
विक्रम-1 और आगामी मिशन
स्काईरूट एयरोस्पेस के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी पवन कुमार चंदना ने कहा,