अंतरिक्ष प्रयोगशालाएं अब विश्वविद्यालयों में: रॉकेटरी-सैटेलाइट का मिलेगा प्रैक्टिकल अनुभव

Click to start listening
अंतरिक्ष प्रयोगशालाएं अब विश्वविद्यालयों में: रॉकेटरी-सैटेलाइट का मिलेगा प्रैक्टिकल अनुभव

सारांश

भारत सरकार ने विश्वविद्यालयों में अंतरिक्ष प्रयोगशालाएं स्थापित करने की योजना बनाई है। पहले चरण में 7 लैब बनेंगी जहाँ छात्रों को रॉकेटरी व सैटेलाइट का प्रशिक्षण मिलेगा। निजी क्षेत्र में 400+ स्टार्टअप और $600 मिलियन निवेश के साथ भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र नई ऊँचाइयों पर है।

Key Takeaways

  • पहले चरण में 7 अंतरिक्ष प्रयोगशालाएं देशभर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में स्थापित की जाएंगी।
  • केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 26 अप्रैल 2026 को परियोजना की समीक्षा की; IN-SPACe अध्यक्ष डॉ. पवन गोयनका ने प्रस्तुति दी।
  • भारत में निजी अंतरिक्ष स्टार्टअप्स की संख्या 2019 के सिंगल डिजिट से बढ़कर 400+ हो गई है और $600 मिलियन से अधिक निजी निवेश आया है।
  • ₹1,000 करोड़ का वेंचर कैपिटल फंड (SIDBI के साथ) और ₹500 करोड़ का टेक्नोलॉजी एडॉप्शन फंड स्टार्टअप्स को सहयोग दे रहे हैं।
  • अब तक 17 प्रशिक्षण कार्यक्रमों में लगभग 900 व्यक्तियों को अंतरिक्ष क्षेत्र में प्रमाणित किया जा चुका है।
  • भारत की अंतरिक्ष वैश्विक साझेदारी 45 से अधिक देशों तक फैली है, जिसमें सिंगापुर और UAE के साथ हालिया समझौते शामिल हैं।

नई दिल्ली, 26 अप्रैल। भारत सरकार ने देशभर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में अंतरिक्ष प्रयोगशालाएं स्थापित करने की महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की है। पहले चरण में सात प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी जहाँ छात्रों को उपग्रह प्रणालियों, रॉकेटरी और मिशन डिजाइन में सीधा व्यावहारिक अनुभव प्रदान किया जाएगा। केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने रविवार को इस परियोजना की विस्तृत समीक्षा की।

परियोजना का उद्देश्य और संरचना

इस पहल का मूल लक्ष्य अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए कुशल भारतीय युवाओं की एक सशक्त श्रृंखला तैयार करना है। समीक्षा बैठक में इन-स्पेस (IN-SPACe) के अध्यक्ष डॉ. पवन गोयनका ने भारत के अंतरिक्ष सुधारों में हुई प्रगति और निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी पर विस्तृत प्रस्तुति दी।

इन प्रयोगशालाओं में प्रक्षेपण यान प्रणाली, उपग्रह निर्माण और अंतरिक्ष साइबर सुरक्षा जैसे अत्याधुनिक विषयों पर हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग दी जाएगी। यह कदम उस समय उठाया गया है जब भारत का निजी अंतरिक्ष क्षेत्र तेज़ी से विस्तार पा रहा है और कुशल जनशक्ति की माँग लगातार बढ़ रही है।

निजी अंतरिक्ष क्षेत्र की उड़ान — आंकड़े बोलते हैं

गौरतलब है कि 2019 में भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में स्टार्टअप्स की संख्या मात्र सिंगल डिजिट तक सीमित थी। 2026 की शुरुआत तक यह संख्या 400 से अधिक हो चुकी है — यह वृद्धि किसी भी पैमाने पर असाधारण है।

इस क्षेत्र को गैर-सरकारी संस्थाओं के लिए खोले जाने के बाद पिछले पाँच वर्षों में 600 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक का निजी निवेश आकर्षित हो चुका है। ये स्टार्टअप्स अब प्रक्षेपण यान, उपग्रह व पेलोड निर्माण, जमीनी अवसंरचना, डेटा सेवाओं और उभरते इन-ऑर्बिट क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

सरकार की वित्तीय पहलें और प्रशिक्षण कार्यक्रम

स्टार्टअप्स को गति देने के लिए केंद्र सरकार ने एसआईडीबीआई (SIDBI) के साथ मिलकर ₹1,000 करोड़ का वेंचर कैपिटल फंड शुरू किया है। इसके साथ ही ₹500 करोड़ का टेक्नोलॉजी एडॉप्शन फंड प्रारंभिक चरण के नवाचारों को सहयोग दे रहा है।

सीड फंड योजना के अंतर्गत विचार और प्रोटोटाइप चरण में स्टार्टअप्स को ₹1 करोड़ तक का अनुदान प्रदान किया जा रहा है। अब तक 17 विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरे हो चुके हैं जिनमें लगभग 900 व्यक्तियों को उपग्रह निर्माण, प्रक्षेपण यान प्रणाली और अंतरिक्ष साइबर सुरक्षा में प्रमाणित किया जा चुका है।

वैश्विक साझेदारी और IN-SPACe की उपलब्धियाँ

भारत की अंतरिक्ष क्षेत्र में वैश्विक भागीदारी अब 45 से अधिक देशों तक विस्तृत हो चुकी है। हाल के सहयोगों में सिंगापुर और संयुक्त अरब अमीरात के साथ हुए समझौते, अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष मंचों में भारतीय कंपनियों की भागीदारी और घरेलू स्टार्टअप्स को वैश्विक बाजारों से जोड़ने की पहलें शामिल हैं।

IN-SPACe की स्थापना के बाद से इसे स्टार्टअप्स, एमएसएमई, शैक्षणिक संस्थानों और उद्योग जगत से 1,000 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं और अब तक 129 प्राधिकरण जारी किए जा चुके हैं।

आगे की राह — युवा भारत, अंतरिक्ष भारत

यह पहल उस बड़ी रणनीति का हिस्सा है जिसमें भारत 2040 तक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में वैश्विक अग्रणी बनने का लक्ष्य रखता है। विश्वविद्यालय स्तर पर अंतरिक्ष प्रयोगशालाओं की स्थापना से न केवल तकनीकी प्रतिभा का निर्माण होगा, बल्कि शोध और नवाचार की एक नई संस्कृति भी विकसित होगी।

आने वाले महीनों में पहले चरण की सात प्रयोगशालाओं के लिए चयनित विश्वविद्यालयों की सूची जारी होने की संभावना है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस योजना में किन राज्यों और संस्थानों को प्राथमिकता मिलती है।

Point of View

बल्कि भारत की दीर्घकालिक अंतरिक्ष महत्वाकांक्षा की नींव है। जब अमेरिका और चीन दशकों से विश्वविद्यालय-उद्योग-सरकार का त्रिकोण बना चुके हैं, भारत अभी इस दिशा में कदम बढ़ा रहा है — देर से, लेकिन सही दिशा में। असली परीक्षा यह होगी कि ये प्रयोगशालाएं केवल कागज़ी घोषणा न बनें, बल्कि IIT और केंद्रीय विश्वविद्यालयों से आगे टियर-2 और टियर-3 शहरों के संस्थानों तक भी पहुँचें। ₹1,000 करोड़ का वेंचर फंड और 400+ स्टार्टअप्स की संख्या बताती है कि इकोसिस्टम तैयार है — अब ज़रूरत है निरंतरता और जवाबदेही की।
NationPress
27/04/2026

Frequently Asked Questions

विश्वविद्यालयों में अंतरिक्ष प्रयोगशालाएं कब तक स्थापित होंगी?
पहले चरण में सात अंतरिक्ष प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी, जिसकी समीक्षा केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने अप्रैल 2026 में की। चयनित विश्वविद्यालयों की सूची और समयसीमा जल्द जारी होने की उम्मीद है।
इन अंतरिक्ष प्रयोगशालाओं में छात्रों को क्या सिखाया जाएगा?
इन प्रयोगशालाओं में छात्रों को उपग्रह प्रणालियों, रॉकेटरी, मिशन डिजाइन, प्रक्षेपण यान प्रणाली और अंतरिक्ष साइबर सुरक्षा में व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह प्रशिक्षण सीधे उद्योग की जरूरतों के अनुरूप होगा।
भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में कितना निवेश आया है?
अंतरिक्ष क्षेत्र को गैर-सरकारी संस्थाओं के लिए खोलने के बाद पिछले पाँच वर्षों में 600 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक का निजी निवेश आकर्षित हुआ है। इस दौरान स्टार्टअप्स की संख्या 2019 के सिंगल डिजिट से बढ़कर 2026 में 400 से अधिक हो गई है।
IN-SPACe क्या है और इसकी भूमिका क्या है?
IN-SPACe (इंडियन नेशनल स्पेस प्रमोशन एंड ऑथराइजेशन सेंटर) भारत सरकार की वह संस्था है जो निजी कंपनियों को अंतरिक्ष गतिविधियों के लिए अनुमति और समर्थन प्रदान करती है। इसने अब तक 1,000 से अधिक आवेदनों में से 129 प्राधिकरण जारी किए हैं।
अंतरिक्ष स्टार्टअप्स के लिए सरकार कौन-कौन से फंड दे रही है?
सरकार ने SIDBI के साथ मिलकर ₹1,000 करोड़ का वेंचर कैपिटल फंड और ₹500 करोड़ का टेक्नोलॉजी एडॉप्शन फंड शुरू किया है। इसके अलावा सीड फंड योजना के तहत प्रारंभिक चरण के स्टार्टअप्स को ₹1 करोड़ तक का अनुदान दिया जा रहा है।
Nation Press