क्या मस्क की कंपनी स्टारलिंक को भारत के स्पेस रेगुलेटर से मंजूरी मिली?
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नई दिल्ली, 9 जुलाई (राष्ट्र प्रेस)। एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक को भारत में सैटेलाइट आधारित इंटरनेट सेवा शुरू करने के लिए भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (इन-स्पेस) से मंजूरी प्राप्त हुई है।
इन-स्पेस की वेबसाइट पर उपलब्ध अधिकृत सूची के अनुसार, इस मंजूरी के बाद स्टारलिंक के लिए भारत में व्यावसायिक सैटेलाइट आधारित इंटरनेट सेवा शुरू करने में अंतिम बाधा समाप्त हो गई है।
अब स्टारलिंक को सरकार से स्पेक्ट्रम प्राप्त करना होगा और अपनी सेवाओं के लिए आवश्यक जमीनी अवसंरचना तैयार करनी होगी। दूरसंचार विभाग (डीओटी) सुरक्षा अनुपालन को पूरा करने के लिए अमेरिकी कंपनी को ट्रायल स्पेक्ट्रम प्रदान करने के लिए तैयार है।
इस प्रक्रिया के सफल होने के बाद स्टारलिंक कुछ महीनों में सैटेलाइट आधारित इंटरनेट सेवा शुरू कर सकती है।
स्टारलिंक ने भारत में वीसैट प्रदाताओं के साथ पहले ही व्यावसायिक समझौते पर हस्ताक्षर कर लिए हैं। वीसैट (बड़े छोटे एंटीना) सेवा प्रदाता उपग्रह-आधारित इंटरनेट और संचार समाधान प्रदान करते हैं, विशेषकर उन क्षेत्रों के लिए जहां भूमि आधारित कनेक्टिविटी सीमित या अनुपलब्ध है।
केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पिछले सप्ताह कहा कि स्पेसएक्स की स्टारलिंक सेवा के भारत में प्रवेश के लिए सभी आवश्यक प्रक्रियाएँ पूरी हो चुकी हैं, और स्पेस रेगुलेटर से आवश्यक अनुमतियाँ मिलने के बाद, वे जब चाहें इस सेवा को शुरू कर सकते हैं।
अनुमति देने से पहले स्पेस रेगुलेटर ने स्टारलिंक को एक लेटर ऑफ इंटेंट (एलओआई) जारी किया था।
स्टारलिंक पृथ्वी की कक्षा में उपग्रहों के एक नेटवर्क के माध्यम से इंटरनेट सेवाएं प्रदान करता है। कंपनी वर्तमान में दुनिया का सबसे बड़ा सैटेलाइट नेटवर्क संचालित कर रही है, जिसमें 6,750 से अधिक उपग्रह कक्षा में स्थापित हैं। स्टारलिंक की इंटरनेट सेवाएं मंगोलिया, जापान, फिलीपींस, मलेशिया, इंडोनेशिया, जॉर्डन, यमन, अजरबैजान और श्रीलंका सहित कई देशों में पहले से ही उपलब्ध हैं।