कुणाल घोष का सवाल: भाजपा को हराने में कांग्रेस को कौन रोक रहा है?
सारांश
Key Takeaways
- कुणाल घोष ने कांग्रेस के नेतृत्व पर सवाल उठाया।
- टीएमसी भाजपा को हराने की योजना बना रही है।
- कांग्रेस को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
- विरोध प्रदर्शन की पद्धति पर विचार करने की आवश्यकता है।
कोलकाता, 23 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। तृणमूल कांग्रेस के नेता कुणाल घोष ने पश्चिम बंगाल कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के हालिया बयान पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने यह सवाल उठाया कि कांग्रेस को आखिर भाजपा को हराने से कौन रोक रहा है। इस विषय पर पूरी स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।
उन्होंने सोमवार को संवाददाताओं से कहा, "मुझे यह कहने में कोई हिचक नहीं है कि यदि आज कोई भाजपा को पराजित करने की योजना बना रहा है, तो वह हमारी पार्टी टीएमसी है।" पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में भाजपा को हराने की योजना बनाई जा रही है, जिसे जल्द ही क्रियान्वित किया जाएगा। इस दिशा में कोई भी लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष का बयान वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में पूरी तरह से निरर्थक है।
कुणाल घोष ने यह भी कहा कि ममता बनर्जी ना केवल भाजपा को हराने की योजना बना रही हैं, बल्कि उन्होंने कई बार यह साबित किया है कि उनके पास भाजपा को हराने की सामर्थ्य है।
उन्होंने सवाल किया कि जिन राज्यों में कांग्रेस को भाजपा को मात देने का अवसर मिला, वहां कांग्रेस ने क्या किया? इस पर भी स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। इस संदर्भ में एक आधिकारिक बयान जारी किया जाना चाहिए, ताकि पूरी वस्तुस्थिति सामने आ सके।
टीएमसी नेता ने सीधे सवाल किया, "कांग्रेस के नेताओं ने महाराष्ट्र में क्या किया? वहाँ आपकी तैयारी कैसी थी? आपको इस बारे में स्पष्ट होना चाहिए।" उन्होंने यह भी पूछा कि दिल्ली में आपको हार का सामना क्यों करना पड़ा? इसके अलावा, हरियाणा और बिहार में भी कांग्रेस को क्यों हार का सामना करना पड़ा। आखिरकार, आप लोग क्यों नहीं जीत पाए?
उन्होंने 'एआई इम्पैक्ट समिट' में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के विरोध प्रदर्शन के तरीके पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शन होना चाहिए, लेकिन यह भी ध्यान रखना चाहिए कि आप किस प्रकार से विरोध कर रहे हैं। विरोध प्रदर्शन के दौरान ऐसी स्थिति नहीं बननी चाहिए जिससे इसकी प्रासंगिकता कमजोर हो।
उन्होंने कहा कि जब ममता बनर्जी को ऑक्सफोर्ड में आमंत्रित किया गया था, तब कुछ भाजपा नेताओं ने जिस तरह की स्थिति उत्पन्न की थी, वैसी स्थिति नहीं होनी चाहिए थी। हम इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं कर सकते हैं।