ट्रैफिक जाम पर बड़ा कदम: सांसद सस्मित पात्रा ने CM माझी को लिखा पत्र, मांगा तत्काल समाधान
सारांश
Key Takeaways
- बीजद सांसद सस्मित पात्रा ने 24 अप्रैल 2025 को मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को भुवनेश्वर के ट्रैफिक संकट पर पत्र लिखा।
- भुवनेश्वर की मुख्य सड़कों पर एक साथ खुदाई और निर्माण कार्य बिना ट्रैफिक डायवर्जन योजना के जारी हैं।
- पात्रा ने BMC कमिश्नर, BDA उपाध्यक्ष और कमिश्नरेट पुलिस कमिश्नर को निर्देश देने की मांग की।
- पीक ट्रैफिक आवर्स में निर्माण कार्य पर प्रतिबंध और सुनियोजित ट्रैफिक डायवर्जन रणनीति लागू करने का सुझाव दिया गया।
- आपातकालीन सेवाएं, स्कूली परिवहन और कार्यालय जाने वाले — सभी इस अव्यवस्था से प्रतिकूल रूप से प्रभावित हो रहे हैं।
- स्मार्ट सिटी मिशन के बावजूद भुवनेश्वर में यातायात प्रबंधन की बुनियादी खामियाँ उजागर हुई हैं।
भुवनेश्वर, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। बीजू जनता दल (बीजद) के सांसद सस्मित पात्रा ने ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को एक महत्वपूर्ण पत्र लिखकर भुवनेश्वर में बिना किसी ठोस योजना के चल रहे सड़क मरम्मत और खुदाई कार्यों के कारण उत्पन्न गंभीर यातायात संकट की ओर ध्यान दिलाया है। उन्होंने विभागों के बीच बेहतर समन्वय, सुनियोजित ट्रैफिक डायवर्जन और पीक आवर्स में निर्माण कार्यों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है।
भुवनेश्वर में यातायात संकट की असली तस्वीर
सांसद सस्मित पात्रा ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि भुवनेश्वर की मुख्य सड़कों और अहम चौराहों पर एक साथ खुदाई, सड़क कटाई और मरम्मत कार्य शुरू कर दिए गए हैं, जबकि यातायात को वैकल्पिक मार्गों पर मोड़ने की कोई सुनियोजित रणनीति नहीं है। इसका सीधा असर आम नागरिकों, कार्यालय जाने वालों, स्कूली बच्चों और आपातकालीन सेवाओं पर पड़ रहा है।
पात्रा ने लिखा, "शहर की प्रगति के लिए ऐसी पहल जरूरी हैं, लेकिन जिस तरीके से इन्हें अंजाम दिया जा रहा है, उससे साफ है कि विभागों में आपसी तालमेल की गंभीर कमी है।" उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भीड़भाड़ वाले समय में हो रहे निर्माण कार्यों ने स्थिति को और विकट बना दिया है।
समस्याओं की जड़: विभागीय समन्वय की विफलता
सांसद ने पत्र में चार प्रमुख कारण गिनाए जिनसे यातायात की स्थिति बिगड़ी है। पहला — स्पष्ट रूप से चिह्नित वैकल्पिक मार्गों का अभाव। दूसरा — यातायात कर्मियों की अपर्याप्त तैनाती। तीसरा — नागरिक एजेंसियों और यातायात अधिकारियों के बीच समन्वय की कमी। चौथा — पीक ट्रैफिक आवर्स के दौरान निर्माण कार्य जारी रखना।
यह स्थिति तब और चिंताजनक हो जाती है जब यह ध्यान में आता है कि भुवनेश्वर ओडिशा की राजधानी होने के साथ-साथ एक तेजी से विकसित हो रहा स्मार्ट सिटी भी है, जहाँ प्रतिदिन लाखों नागरिक सड़कों पर निर्भर रहते हैं। आपातकालीन वाहनों के लिए रास्ता बाधित होना जानलेवा भी साबित हो सकता है।
सांसद की मुख्यमंत्री से मांग और सुझाव
सस्मित पात्रा ने मुख्यमंत्री माझी से आग्रह किया कि वे भुवनेश्वर नगर निगम के कमिश्नर, भुवनेश्वर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष और कमिश्नरेट पुलिस (भुवनेश्वर-कटक) के कमिश्नर को तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दें।
उन्होंने निम्नलिखित सुझाव दिए: कार्य शुरू करने से पहले ट्रैफिक डायवर्जन की सुनियोजित रणनीति लागू की जाए; पीक ट्रैफिक आवर्स के दौरान बड़े निर्माण कार्यों को सीमित किया जाए; पर्याप्त सिग्नल, बैरिकेडिंग और सार्वजनिक सूचना प्रणाली सुनिश्चित की जाए; और सभी कार्यकारी एवं निगरानी एजेंसियों के बीच अंतर-विभागीय समन्वय को मजबूत किया जाए।
व्यापक संदर्भ: स्मार्ट सिटी और जमीनी हकीकत का विरोधाभास
गौरतलब है कि भुवनेश्वर को भारत सरकार की स्मार्ट सिटी मिशन के तहत चुने गए शहरों में शामिल किया गया है। इस योजना के अंतर्गत करोड़ों रुपये के बुनियादी ढांचे के प्रोजेक्ट चल रहे हैं। लेकिन यदि इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन में समन्वय का अभाव हो, तो विकास की यह रफ्तार आम नागरिकों के लिए परेशानी का सबब बन जाती है।
यह भी उल्लेखनीय है कि बीजद विपक्ष में होते हुए भी जनहित के मुद्दों पर सत्तारूढ़ भाजपा सरकार को सीधे पत्र लिखकर जवाबदेही तय करने की कोशिश कर रही है। यह राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ओडिशा में 2024 के विधानसभा चुनावों के बाद बीजद सत्ता से बाहर हुई और अब वह एक सक्रिय विपक्षी भूमिका निभा रही है।
अन्य भारतीय महानगरों के अनुभव बताते हैं कि जब निर्माण कार्यों की योजना बिना यातायात प्रबंधन के बनाई जाती है, तो न केवल आर्थिक उत्पादकता प्रभावित होती है, बल्कि वायु और ध्वनि प्रदूषण भी बढ़ता है। दिल्ली और बेंगलुरु जैसे शहरों में अनियोजित निर्माण कार्यों के कारण यातायात जाम से अरबों रुपये की आर्थिक क्षति का अनुमान लगाया जा चुका है।
आगे क्या होगा?
अब सबकी नजरें मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और संबंधित विभागों की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। यदि सरकार इस पत्र पर त्वरित कार्रवाई करती है, तो यह भुवनेश्वर के नागरिकों को राहत देगा और प्रशासनिक जवाबदेही का एक सकारात्मक उदाहरण स्थापित करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि रात्रिकालीन निर्माण कार्य, डिजिटल ट्रैफिक प्रबंधन और एकीकृत परियोजना निगरानी तंत्र इस समस्या का दीर्घकालिक समाधान हो सकते हैं।