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अंतरिक्ष में उगाई जा रही स्टेम सेल्स: कैंसर और ब्लड डिसऑर्डर के इलाज में क्रांति की उम्मीद

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अंतरिक्ष में उगाई जा रही स्टेम सेल्स: कैंसर और ब्लड डिसऑर्डर के इलाज में क्रांति की उम्मीद

सारांश

अंतरिक्ष में शून्य गुरुत्वाकर्षण का उपयोग कर वैज्ञानिक ऐसी स्टेम सेल्स तैयार कर रहे हैं जो पृथ्वी पर उगाई गई कोशिकाओं से बेहतर गुणवत्ता और अधिक मात्रा में हो सकती हैं। यदि यह प्रयोग सफल रहा, तो कैंसर और जानलेवा ब्लड डिसऑर्डर के लाखों मरीजों के लिए इलाज सस्ता और प्रभावी बन सकता है।

मुख्य बातें

इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर माइक्रोग्रैविटी में स्टेम सेल्स विकसित करने का प्रयोग जारी है।
पृथ्वी पर उगाई गई स्टेम सेल्स समय के साथ क्षमता खोती हैं; अंतरिक्ष में यह समस्या कम हो सकती है।
नासा की अंतरिक्ष यात्री जेसिका मीर स्टेम सेल्स एक्स-एच2 प्रयोग पर लाइफ साइंसेज ग्लोबबॉक्स में काम कर रही हैं।
बायोसर्व के माइक्रोग्रैविटी बायोरिएक्टर से बड़ी मात्रा में उच्च गुणवत्ता वाली स्टेम सेल्स तैयार करना लक्ष्य है।
नमूनों को फ्रीज कर पृथ्वी पर भेजा जाएगा, जहाँ हीमेटोपोएटिक स्टेम कोशिकाओं का विस्तृत अध्ययन होगा।
इस शोध से ब्लड कैंसर , इम्यून विकार और कीमोथेरेपी के बाद रक्त तंत्र पुनर्निर्माण में मदद मिल सकती है।

इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर वैज्ञानिक एक अभूतपूर्व प्रयोग को अंजाम दे रहे हैं, जिसमें माइक्रोग्रैविटी वातावरण में स्टेम सेल्स विकसित की जा रही हैं। उद्देश्य यह है कि पृथ्वी पर कैंसर, ब्लड कैंसर और अन्य गंभीर रक्त विकारों से पीड़ित मरीजों के लिए बेहतर गुणवत्ता वाली और अधिक मात्रा में स्टेम सेल्स उपलब्ध कराई जा सकें। ISS के आधिकारिक सोशल मीडिया पर साझा की गई जानकारी के अनुसार, यह शोध भविष्य में स्टेम सेल थेरेपी को अधिक प्रभावी, सुलभ और किफायती बना सकता है।

माइक्रोग्रैविटी में स्टेम सेल्स क्यों बेहतर होती हैं

पृथ्वी पर उगाई गई स्टेम सेल्स समय के साथ अपनी विभाजन क्षमता खोने लगती हैं और उनकी गुणवत्ता में गिरावट आती है। शोधकर्ताओं का मानना है कि शून्य गुरुत्वाकर्षण (माइक्रोग्रैविटी) में यह समस्या काफी हद तक कम हो जाती है। अंतरिक्ष में विकसित स्टेम सेल्स न केवल अधिक संख्या में तैयार हो सकती हैं, बल्कि वे लंबे समय तक अपनी जैविक क्षमता भी बनाए रख सकती हैं।

वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि माइक्रोग्रैविटी में स्टेम सेल्स किस प्रकार विकसित होती हैं और क्या वे दीर्घकालिक रूप से सक्रिय रह सकती हैं। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब दुनियाभर में ब्लड कैंसर और इम्यून सिस्टम से जुड़ी बीमारियों के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

प्रयोग का स्वरूप और तकनीक

इस प्रयोग में नासा की अंतरिक्ष यात्री जेसिका मीर को लाइफ साइंसेज ग्लोबबॉक्स के अंदर स्टेम सेल्स एक्स-एच2 प्रयोग पर काम करते हुए देखा गया है। इस शोध का मुख्य उपकरण बायोसर्व का नया माइक्रोग्रैविटी बायोरिएक्टर है, जो बड़ी मात्रा में उच्च गुणवत्ता वाली स्टेम सेल्स तैयार करने में सक्षम है।

अंतरिक्ष में विकसित स्टेम सेल्स के नमूनों को फ्रीज करके पृथ्वी पर भेजा जाएगा, जहाँ उनका विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा। ISS द्वारा साझा की गई एक माइक्रोस्कोपिक छवि में हीमेटोपोएटिक स्टेम कोशिकाओं की संरचना भी दिखाई गई है।

मरीजों के लिए क्या है उम्मीद

जिन मरीजों को कीमोथेरेपी के बाद अपने रक्त तंत्र को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता होती है, उनके लिए ब्लड स्टेम सेल्स अत्यंत महत्वपूर्ण होती हैं। इसके अलावा, ब्लड कैंसर (ल्यूकेमिया), इम्यून सिस्टम विकार और अन्य जानलेवा रक्त रोगों के उपचार में भी इस शोध से बड़ा सुधार संभव है।

शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि यदि अंतरिक्ष में स्टेम सेल्स की उत्पादन क्षमता सिद्ध हो जाती है, तो भविष्य में यह तकनीक व्यावसायिक स्तर पर लागू की जा सकती है, जिससे लाखों मरीजों को सस्ती और प्रभावी चिकित्सा मिल सकेगी।

ISS की भूमिका और आगे की राह

इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन दशकों से पृथ्वी पर जीवन को बेहतर बनाने वाली तकनीकों और दवाओं के लिए एक उन्नत परीक्षण केंद्र के रूप में काम कर रहा है। स्टेम सेल शोध इसका एक उल्लेखनीय उदाहरण है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब ISS पर चिकित्सा विज्ञान के लिए महत्वपूर्ण प्रयोग किए जा रहे हों — इससे पहले भी हड्डियों की कमज़ोरी, मांसपेशियों के क्षरण और आँखों से जुड़े शोध अंतरिक्ष में किए जा चुके हैं। अब जब नमूने पृथ्वी पर पहुँचेंगे, तब विस्तृत विश्लेषण से यह तय होगा कि यह तकनीक वास्तव में कितनी कारगर है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन व्यावहारिक अनुप्रयोग तक की राह लंबी है — अंतरिक्ष में नमूने तैयार करना और उन्हें पृथ्वी पर उपचार में बदलना दो बिल्कुल अलग चुनौतियाँ हैं। माइक्रोग्रैविटी में बेहतर गुणवत्ता की स्टेम सेल्स का दावा अभी प्रारंभिक चरण में है और व्यापक पीयर-रिव्यूड डेटा का इंतज़ार है। असली सवाल यह है कि क्या इस तकनीक को व्यावसायिक स्तर पर इतना सस्ता बनाया जा सकता है कि भारत जैसे देशों में आम मरीज़ों तक पहुँचे — क्योंकि अभी स्टेम सेल थेरेपी की लागत ही अधिकांश मरीज़ों की पहुँच से बाहर है।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ISS पर स्टेम सेल्स उगाने का प्रयोग क्या है?
इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर माइक्रोग्रैविटी वातावरण में हीमेटोपोएटिक स्टेम सेल्स विकसित की जा रही हैं, ताकि पृथ्वी पर कैंसर और रक्त विकारों के इलाज के लिए बेहतर गुणवत्ता की कोशिकाएँ उपलब्ध हो सकें। बायोसर्व के माइक्रोग्रैविटी बायोरिएक्टर की मदद से यह प्रयोग किया जा रहा है।
माइक्रोग्रैविटी में स्टेम सेल्स बेहतर क्यों होती हैं?
पृथ्वी पर उगाई गई स्टेम सेल्स समय के साथ विभाजन की क्षमता खो देती हैं, जबकि शोधकर्ताओं के अनुसार माइक्रोग्रैविटी में यह गिरावट कम होती है और कोशिकाएँ लंबे समय तक सक्रिय रह सकती हैं। इससे अधिक मात्रा और बेहतर गुणवत्ता वाली स्टेम सेल्स तैयार होने की संभावना है।
इस शोध से किन मरीज़ों को फायदा होगा?
ब्लड कैंसर (ल्यूकेमिया), इम्यून सिस्टम विकार, और कीमोथेरेपी के बाद रक्त तंत्र को पुनर्जीवित करने की ज़रूरत वाले मरीज़ों को सबसे अधिक लाभ मिल सकता है। इसके अलावा अन्य गंभीर रक्त विकारों से पीड़ित लोगों के लिए भी यह थेरेपी कारगर हो सकती है।
अंतरिक्ष में तैयार स्टेम सेल्स पृथ्वी तक कैसे पहुँचेंगी?
ISS पर विकसित स्टेम सेल्स के नमूनों को फ्रीज करके पृथ्वी पर भेजा जाएगा, जहाँ प्रयोगशालाओं में उनका विस्तृत वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाएगा। यह विश्लेषण यह तय करेगा कि अंतरिक्ष में तैयार कोशिकाएँ वास्तव में चिकित्सा उपयोग के लिए कितनी प्रभावी हैं।
यह प्रयोग स्टेम सेल थेरेपी को कितना सस्ता बना सकता है?
अभी यह शोध प्रारंभिक चरण में है और लागत में कमी का सीधा अनुमान लगाना संभव नहीं है। हालाँकि, शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि यदि बड़ी मात्रा में उच्च गुणवत्ता वाली स्टेम सेल्स तैयार की जा सकीं, तो भविष्य में थेरेपी अधिक सुलभ और किफायती हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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