अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर जबलपुर में राष्ट्रपति मुर्मु बोलीं — योग विश्व चेतना से जोड़ने का सशक्त माध्यम
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 21 जून 2025 को मध्य प्रदेश के जबलपुर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग दिवस समारोह में सहभागिता की और योगाभ्यास किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि योग व्यक्ति को स्वयं और समाज से, समाज को प्रकृति से तथा संपूर्ण मानवता को विश्व चेतना से जोड़ने का सशक्त माध्यम है। जबलपुर में आयोजित यह कार्यक्रम देशभर में मनाए जा रहे योग दिवस समारोहों में से एक प्रमुख आयोजन रहा।
राष्ट्रपति का संबोधन
समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति मुर्मु ने देशवासियों और विश्वभर के योग साधकों को शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा, 'जबलपुर की पावन धरती पर उपस्थित होकर मुझे प्रसन्नता हो रही है। आज हम भारत की उस महान परंपरा का उत्सव मना रहे हैं, जिसने मानवता को स्वस्थ, संतुलित और सार्थक जीवन का मार्ग दिखाया है। योग विश्व समुदाय के लिए हमारी सांस्कृतिक धरोहर का अमूल्य उपहार है। यह हमारे ऋषियों-मुनियों की हजारों वर्षों की साधना का परिणाम है।'
मुर्मु ने योग के मूल अर्थ को रेखांकित करते हुए कहा, 'हमारे शास्त्रों में शरीर, मन और आत्मा के संतुलन को जीवन की सफलता का आधार माना गया है। योग उसी संतुलन को स्थापित करने का मार्ग है। योग का शाब्दिक अर्थ है 'जोड़ना' — यह व्यक्ति को स्वयं और समाज से, समाज को प्रकृति से तथा संपूर्ण मानवता को विश्व चेतना से जोड़ने का सशक्त माध्यम है।'
वैश्विक चुनौतियों में योग की भूमिका
राष्ट्रपति ने कहा कि आज जब विश्व अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब योग मानवता को शांति, संतुलन, समरसता और सामूहिक कल्याण का मार्ग दिखाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने स्मरण दिलाया कि वर्ष 2014 में भारत की पहल पर संयुक्त राष्ट्र महासभा ने प्रति वर्ष 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा कि इस पहल के बाद विश्व कल्याण के एक सशक्त माध्यम के रूप में योग की पहचान और अधिक मजबूत हुई है तथा आज दुनिया के अनेक देशों में करोड़ों लोग योग को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बना रहे हैं।
वर्ल्ड योगासन चैंपियनशिप और वैश्विक स्वीकार्यता
मुर्मु ने बताया कि इसी महीने अहमदाबाद में आयोजित प्रथम 'वर्ल्ड योगासन एक्सपर्ट चैंपियनशिप' भी योग की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता का एक उदाहरण है, जिसमें कई देशों के प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। उन्होंने अपने विदेश दौरों का उल्लेख करते हुए कहा कि जब वे विदेश यात्राओं पर जाती हैं, तो वहाँ के लोग योग के बारे में जिज्ञासा से पूछते हैं और कई देशों में नियमित रूप से योगाभ्यास किया जाता है।
इस वर्ष की थीम: 'योग फॉर हेल्दी एजिंग'
राष्ट्रपति ने इस वर्ष की थीम 'योग फॉर हेल्दी एजिंग' का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह थीम वरिष्ठ नागरिकों के स्वस्थ, सक्रिय, आत्मनिर्भर और गरिमापूर्ण जीवन के लिए योग की उपयोगिता को रेखांकित करती है। मुर्मु ने कहा, 'आज हम जो जीवनशैली अपनाते हैं, वही भविष्य में हमारे स्वास्थ्य और सुख का आधार बनती है। योग बढ़ती आयु में भी सक्रिय और आत्मनिर्भर बने रहने में सहायक है।' यह आयोजन इस बात का संकेत है कि योग अब केवल आध्यात्मिक साधना नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति का भी अभिन्न अंग बनता जा रहा है।