25 जुलाई 2026
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को बुखारेस्ट यूनिवर्सिटी ऑफ इकोनॉमिक स्टडीज ने दी मानद डॉक्टरेट

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को बुखारेस्ट यूनिवर्सिटी ऑफ इकोनॉमिक स्टडीज ने दी मानद डॉक्टरेट

सारांश

बुखारेस्ट यूनिवर्सिटी ऑफ इकोनॉमिक स्टडीज ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को मानद डॉक्टरेट से नवाज़ा। मुर्मु ने AI युग में नैतिक शिक्षा की ज़रूरत पर ज़ोर दिया और टैगोर-एमिनेस्कु के ज़रिए भारत-रोमानिया के सदियों पुराने सभ्यतागत जुड़ाव को रेखांकित किया।

मुख्य बातें

बुखारेस्ट यूनिवर्सिटी ऑफ इकोनॉमिक स्टडीज ने 24 जुलाई 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की।
राष्ट्रपति ने संयुक्त शोध और छात्र-शिक्षक आदान-प्रदान के ज़रिए भारत-रोमानिया शैक्षणिक सहयोग बढ़ाने की अपील की।
मुर्मु ने नवंबर 1926 में रवींद्रनाथ टैगोर की बुखारेस्ट यात्रा और कवि मिहाई एमिनेस्कु पर उपनिषदों के प्रभाव का उल्लेख कर दोनों देशों की सभ्यतागत निकटता को रेखांकित किया।
राष्ट्रपति ने रोमानियाई प्रधानमंत्री इली बोलोजान से विक्टोरिया पैलेस में मुलाकात की; व्यापार, स्वच्छ ऊर्जा और उभरती तकनीकों पर चर्चा हुई।
विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, दोनों देशों ने निवेश और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में सहयोग विस्तार पर सहमति जताई।

रोमानिया की राजधानी बुखारेस्ट में 24 जुलाई 2026 को आयोजित एक विशेष दीक्षांत समारोह में बुखारेस्ट यूनिवर्सिटी ऑफ इकोनॉमिक स्टडीज ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की। यह सम्मान भारत-रोमानिया शैक्षणिक और राजनयिक संबंधों को नई ऊँचाई देने के संदर्भ में दिया गया।

समारोह में राष्ट्रपति का संबोधन

उपाधि ग्रहण करने के बाद राष्ट्रपति मुर्मु ने अपने संबोधन में बुखारेस्ट यूनिवर्सिटी और रोमानिया के अन्य शैक्षणिक संस्थानों से संयुक्त शोध, शिक्षकों और छात्रों के आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में आपसी सहयोग बढ़ाने की अपील की।

उन्होंने कहा, "आज जब दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल तकनीकों और विज्ञान की तेज़ी से हो रही नई प्रगति के दौर से गुज़र रही है, तब ऐसी यूनिवर्सिटियों की ज़िम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वे यह सुनिश्चित करें कि ज्ञान के साथ समझदारी, नैतिकता और इंसानियत भी जुड़ी रहे।"

राष्ट्रपति ने शिक्षा की व्यापक भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा, "शिक्षा केवल किसी एक व्यक्ति की तरक्की का ज़रिया नहीं है, बल्कि एक न्यायपूर्ण और सभी को साथ लेकर चलने वाले समाज की सबसे मज़बूत नींव है।"

शिक्षक के रूप में निजी अनुभव

राष्ट्रपति मुर्मु ने अपने जीवन के उस दौर का उल्लेख किया जब उन्हें शिक्षक के रूप में कार्य करने का अवसर मिला था। उन्होंने कहा कि उस अनुभव ने उन्हें यह समझाया कि एक साधारण-सी कक्षा भी किसी परिवार का भविष्य बदल सकती है और धीरे-धीरे पूरे समाज पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति इसी दृष्टिकोण पर आधारित है, जिसमें नवाचार, शोध, रचनात्मकता और वैश्विक शैक्षणिक सहयोग को केंद्र में रखा गया है।

भारत-रोमानिया सभ्यतागत संबंध

राष्ट्रपति मुर्मु ने दोनों देशों के गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जुड़ाव की याद दिलाई। उन्होंने कहा, "भारत और रोमानिया भले ही भौगोलिक रूप से एक-दूसरे से दूर हों, लेकिन हमारी सभ्यताएं लंबे समय से एक-दूसरे से जुड़ी रही हैं। कई बार यह जुड़ाव राजनयिक रिश्तों से पहले हमारे कवियों के माध्यम से दिखाई दिया।"

उन्होंने नवंबर 1926 में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की बुखारेस्ट यात्रा का उल्लेख किया, जब टैगोर ने बुखारेस्ट के नेशनल थिएटर में मानवता की एकता पर भाषण दिया था। उन्होंने यह भी बताया कि रोमानिया के राष्ट्रीय कवि मिहाई एमिनेस्कु ने अपने छात्र जीवन में उपनिषदों और भगवद्गीता का अध्ययन किया था, जिसका उनके लेखन पर गहरा प्रभाव पड़ा।

रोमानियाई प्रधानमंत्री से मुलाकात

समारोह से पूर्व राष्ट्रपति मुर्मु ने बुखारेस्ट के विक्टोरिया पैलेस में रोमानिया के प्रधानमंत्री इली बोलोजान से द्विपक्षीय वार्ता की। विदेश मंत्रालय (MEA) के बयान के अनुसार, दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, स्वच्छ ऊर्जा, कनेक्टिविटी और नई उभरती तकनीकों जैसे महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विस्तार से चर्चा की।

यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत यूरोपीय देशों के साथ अपनी साझेदारी को रणनीतिक रूप से मज़बूत कर रहा है। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच शैक्षणिक और आर्थिक सहयोग के नए आयाम खुलने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह होगी कि शैक्षणिक सहयोग के वादे ठोस समझौतों में कब और कैसे तब्दील होते हैं। स्वच्छ ऊर्जा और उभरती तकनीकों पर हुई चर्चा संकेत देती है कि दोनों देश संबंधों को परंपरागत व्यापार से आगे ले जाने के इच्छुक हैं।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को मानद डॉक्टरेट किसने और कब दी?
बुखारेस्ट यूनिवर्सिटी ऑफ इकोनॉमिक स्टडीज ने 24 जुलाई 2026 को रोमानिया की राजधानी बुखारेस्ट में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की।
राष्ट्रपति मुर्मु ने बुखारेस्ट में अपने संबोधन में क्या कहा?
राष्ट्रपति मुर्मु ने AI और डिजिटल तकनीक के युग में विश्वविद्यालयों की ज़िम्मेदारी पर ज़ोर दिया कि ज्ञान के साथ नैतिकता और इंसानियत को भी बनाए रखा जाए। उन्होंने भारत-रोमानिया के बीच संयुक्त शोध और छात्र-शिक्षक आदान-प्रदान बढ़ाने की भी अपील की।
भारत और रोमानिया के बीच ऐतिहासिक सांस्कृतिक संबंध क्या हैं?
नवंबर 1926 में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने बुखारेस्ट के नेशनल थिएटर में मानवता की एकता पर भाषण दिया था। रोमानिया के राष्ट्रीय कवि मिहाई एमिनेस्कु ने उपनिषदों और भगवद्गीता का अध्ययन किया था, जिसका उनके लेखन पर गहरा प्रभाव पड़ा।
राष्ट्रपति मुर्मु ने रोमानियाई प्रधानमंत्री से किन विषयों पर चर्चा की?
राष्ट्रपति मुर्मु ने विक्टोरिया पैलेस में रोमानिया के प्रधानमंत्री इली बोलोजान से मुलाकात की। विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, स्वच्छ ऊर्जा, कनेक्टिविटी और नई उभरती तकनीकों में सहयोग बढ़ाने पर बातचीत की।
भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उल्लेख राष्ट्रपति ने क्यों किया?
राष्ट्रपति मुर्मु ने बताया कि भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति नवाचार, शोध, रचनात्मकता और वैश्विक शैक्षणिक सहयोग को बढ़ावा देने पर आधारित है। यह उल्लेख रोमानियाई विश्वविद्यालयों के साथ सहयोग की संभावनाओं को रेखांकित करने के संदर्भ में था।
राष्ट्र प्रेस
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