राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु बुखारेस्ट पहुंचीं, तीन देशों की यात्रा के अंतिम पड़ाव में रोमानिया से द्विपक्षीय वार्ता
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 23 जुलाई, गुरुवार को अपनी तीन देशों की राजकीय यात्रा के अंतिम चरण में रोमानिया की राजधानी बुखारेस्ट पहुंचीं। पूर्वी यूरोप के साथ भारत के कूटनीतिक और आर्थिक संबंधों को नई गहराई देने की दृष्टि से यह यात्रा अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
आगमन और स्वागत
राष्ट्रपति सचिवालय ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी देते हुए लिखा, "राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु अपनी तीन देशों की राजकीय यात्रा के आखिरी पड़ाव के तहत रोमानिया के बुखारेस्ट पहुंचीं। हवाई अड्डे पर रोमानिया की विदेश मंत्री ओआना-सिल्विया तोइउ ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।" राष्ट्रपति मुर्मु रविवार को भारत से रवाना हुई थीं और इस यात्रा में मोल्दोवा, उत्तर मैसेडोनिया तथा रोमानिया तीनों देशों का दौरा शामिल है।
मुख्य द्विपक्षीय बैठकें
रोमानिया प्रवास के दौरान राष्ट्रपति मुर्मु, रोमानिया के राष्ट्रपति निकुशोर डैन और कार्यवाहक प्रधानमंत्री इलिए बोलोजान के साथ उच्च स्तरीय वार्ता करेंगी। इसके साथ ही वह रोमानिया की सीनेट के अध्यक्ष मिर्सेआ अब्रुडेन, प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष सोरिन ग्रिंडियानु और भारत-रोमानिया संसदीय मित्रता समूह के सदस्यों से भी मुलाकात करेंगी।
इसके अतिरिक्त, राष्ट्रपति भारत-रोमानिया बिजनेस फोरम को संबोधित करेंगी और रोमानिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों से भी संवाद करेंगी — जो इस यात्रा के जन-कूटनीति आयाम को रेखांकित करता है।
विदेश मंत्रालय का नज़रिया
विदेश मंत्रालय (MEA) ने पिछले सप्ताह स्पष्ट किया था, "रोमानिया यूरोपीय संघ का एक महत्वपूर्ण साझेदार है। भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के पूरा होने के बाद आने वाले वर्षों में दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी और मजबूत होगी।" मंत्रालय ने यह भी कहा कि यह यात्रा पूरे पूर्वी यूरोपीय क्षेत्र के साथ भारत के जुड़ाव को विस्तार देने की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
उत्तर मैसेडोनिया में राष्ट्रपति का संदेश
मंगलवार को उत्तर मैसेडोनिया की संसद में अपने ऐतिहासिक संबोधन के दौरान राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा, "हम मानव इतिहास के एक महत्वपूर्ण दौर में मिल रहे हैं। दुनिया में राजनीतिक और आर्थिक ताकतों का संतुलन बदल रहा है। इस नए दौर में भारत दक्षिण-पूर्वी यूरोप को हाशिए का क्षेत्र नहीं, बल्कि विकास और नवाचार के एक गतिशील केंद्र के रूप में देखता है।" यह बयान भारत की व्यापक विदेश नीति में पूर्वी यूरोप को दी जा रही प्राथमिकता को स्पष्ट करता है।
आगे की राह
यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत-EU FTA वार्ता निर्णायक दौर में है और भारत अपनी वैश्विक कूटनीतिक उपस्थिति को यूरोप के उन देशों तक विस्तारित कर रहा है जो पारंपरिक रूप से भारतीय राष्ट्राध्यक्षों की यात्रा सूची में कम रहे हैं। बुखारेस्ट में होने वाली बैठकों के परिणाम द्विपक्षीय व्यापार, निवेश और सांस्कृतिक सहयोग की दिशा तय करेंगे।