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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु मोल्दोवा पहुंचीं, किसी भारतीय राष्ट्रपति का पहला ऐतिहासिक दौरा

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु मोल्दोवा पहुंचीं, किसी भारतीय राष्ट्रपति का पहला ऐतिहासिक दौरा

सारांश

किसी भारतीय राष्ट्रपति का मोल्दोवा में पहला कदम — राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की यह यात्रा महज शिष्टाचार नहीं, बल्कि कृषि, आईटी, स्वास्थ्य और नवीकरणीय ऊर्जा में ठोस साझेदारी की नींव रखने का प्रयास है। तीन यूरोपीय देशों का यह दौरा भारत की विस्तृत होती कूटनीतिक पहुंच का संकेत है।

मुख्य बातें

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 20 जुलाई को चिसीनाउ, मोल्दोवा पहुंचीं — यह किसी भारतीय राष्ट्रपति का मोल्दोवा का पहला दौरा है।
मोल्दोवा के उपप्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री मिहाई पोपसोई ने चिसीनाउ अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर स्वागत किया।
राष्ट्रपति मुर्मु मोल्दोवा की राष्ट्रपति मैया सैंडू और संसद अध्यक्ष इगोर ग्रोसु से मुलाकात करेंगी।
कृषि, स्वास्थ्य, फार्मास्यूटिकल्स, आईटी और शिक्षा में सहयोग के प्रमुख क्षेत्र चिह्नित किए गए हैं।
मोल्दोवा के बाद राष्ट्रपति नॉर्थ मेसेडोनिया और रोमानिया की यात्रा करेंगी।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 20 जुलाई को चिसीनाउ पहुंचीं और मोल्दोवा, नॉर्थ मेसेडोनिया तथा रोमानिया के अपने तीन-देशीय राजकीय दौरे का पहला पड़ाव पूरा किया। यह किसी भारतीय राष्ट्रपति का मोल्दोवा का पहला दौरा है, जो दोनों देशों के राजनयिक संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ता है। चिसीनाउ अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर मोल्दोवा के उपप्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री मिहाई पोपसोई ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।

दौरे का महत्व और पृष्ठभूमि

राष्ट्रपति मुर्मु, मोल्दोवा की राष्ट्रपति मैया सैंडू के आमंत्रण पर इस राजकीय यात्रा पर पहुंची हैं। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपने यूरोपीय साझेदारों के साथ संबंधों को नई गहराई देने की दिशा में काम कर रहा है। गौरतलब है कि भारत और मोल्दोवा के बीच अब तक राष्ट्राध्यक्ष स्तर की कोई यात्रा नहीं हुई थी, जिससे यह दौरा कूटनीतिक दृष्टि से विशेष रूप से महत्वपूर्ण बन जाता है।

बैठकों और कार्यक्रमों का कार्यक्रम

अपने दौरे के दौरान राष्ट्रपति मुर्मु मोल्दोवा की राष्ट्रपति मैया सैंडू के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगी। वह मोल्दोवा संसद के अध्यक्ष इगोर ग्रोसु से भी मुलाकात करेंगी। विदेश मंत्रालय के अनुसार, मोल्दोवा-इंडिया पार्लियामेंट्री फ्रेंडशिप ग्रुप के सदस्यों के साथ भी बातचीत निर्धारित है। इसके अलावा, वह एक बिजनेस फोरम और स्थानीय भारतीय समुदाय को भी संबोधित करेंगी।

सहयोग के प्रमुख क्षेत्र

विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, "भारत और मोल्दोवा के बीच अच्छे और मैत्रीपूर्ण संबंध हैं। यह दौरा एक अहम और ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगा और दोनों देशों के संबंधों को एक बड़ी साझेदारी तक ले जाएगा।" मंत्रालय ने कृषि, स्वास्थ्य, फार्मास्यूटिकल्स, आईटी और शिक्षा के क्षेत्रों में आपसी सहयोग की विशेष संभावनाएं रेखांकित की हैं।

विदेश मंत्रालय की विशेष ब्रीफिंग

17 जुलाई को आयोजित एक विशेष ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने कहा कि यह दौरा दोनों देशों के संबंधों की समीक्षा करने और सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर बात करने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने कहा, "यह दौरा दोनों देशों के बीच संबंधों को राजनीतिक सद्भावना से आगे बढ़ाकर व्यापार और निवेश, डिजिटल तकनीक, इनोवेशन, नवीकरणीय ऊर्जा, स्वास्थ्य सुविधा, शिक्षा, खेती, संस्कृति और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में बड़ी साझेदारी तक ले जाने के तरीकों पर चर्चा करने का मौका देता है।"

आगे का कार्यक्रम

मोल्दोवा के बाद राष्ट्रपति मुर्मु नॉर्थ मेसेडोनिया और फिर रोमानिया की यात्रा करेंगी, जहाँ उच्च-स्तरीय बैठकें निर्धारित हैं। यह तीन-देशीय दौरा भारत की यूरोप के साथ बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता का प्रतीक है और आने वाले समय में द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह होगी कि बिजनेस फोरम और संसदीय वार्ताएं किस हद तक ठोस समझौतों में तब्दील होती हैं। मोल्दोवा एक छोटा लेकिन रणनीतिक यूरोपीय देश है जो यूरोपीय संघ की सदस्यता की दिशा में आगे बढ़ रहा है — ऐसे में भारत का यह कदम पश्चिमी यूरोप तक पहुंच के नए रास्ते खोल सकता है। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि भारत और मोल्दोवा के बीच व्यापार की मात्रा अभी बेहद सीमित है, और बिना ठोस निवेश प्रतिबद्धताओं के यह दौरा केवल राजनयिक औपचारिकता बनकर रह सकता है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का मोल्दोवा दौरा क्यों ऐतिहासिक है?
यह किसी भारतीय राष्ट्रपति का मोल्दोवा का पहला राजकीय दौरा है। इससे पहले दोनों देशों के बीच राष्ट्राध्यक्ष स्तर की कोई यात्रा नहीं हुई थी, जिससे यह दौरा द्विपक्षीय संबंधों में एक नई शुरुआत का प्रतीक बनता है।
राष्ट्रपति मुर्मु मोल्दोवा में किन नेताओं से मिलेंगी?
राष्ट्रपति मुर्मु मोल्दोवा की राष्ट्रपति मैया सैंडू और संसद अध्यक्ष इगोर ग्रोसु से मुलाकात करेंगी। वह मोल्दोवा-इंडिया पार्लियामेंट्री फ्रेंडशिप ग्रुप के सदस्यों, एक बिजनेस फोरम और भारतीय समुदाय को भी संबोधित करेंगी।
भारत और मोल्दोवा के बीच किन क्षेत्रों में सहयोग की संभावना है?
विदेश मंत्रालय के अनुसार कृषि, स्वास्थ्य, फार्मास्यूटिकल्स, आईटी, शिक्षा, डिजिटल तकनीक, नवीकरणीय ऊर्जा और कनेक्टिविटी में आपसी सहयोग की विशेष संभावनाएं हैं। इन क्षेत्रों में व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत करना इस दौरे का प्रमुख उद्देश्य है।
राष्ट्रपति मुर्मु के तीन-देशीय दौरे में कौन-कौन से देश शामिल हैं?
राष्ट्रपति मुर्मु मोल्दोवा, नॉर्थ मेसेडोनिया और रोमानिया की यात्रा कर रही हैं। मोल्दोवा इस दौरे का पहला पड़ाव है, जिसके बाद वह उच्च-स्तरीय बैठकों के लिए नॉर्थ मेसेडोनिया और रोमानिया जाएंगी।
मोल्दोवा दौरे की तैयारी कब से चल रही थी?
17 जुलाई को विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने एक विशेष ब्रीफिंग में इस दौरे की जानकारी दी थी। उन्होंने बताया कि यह यात्रा बिजनेस-टू-बिजनेस संबंधों और व्यापार-निवेश को बढ़ावा देने में सहायक होगी।
राष्ट्र प्रेस
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