राष्ट्रपति मुर्मु का मोल्दोवा में ऐतिहासिक दौरा, राष्ट्रपति सैंडू से मिलकर द्विपक्षीय सहयोग पर की चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 20 जुलाई 2026 को चिसीनाउ के प्रेसिडेंशियल पैलेस में मोल्दोवा की राष्ट्रपति माइया सैंडू से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग को और गहरा करने के तरीकों पर विस्तृत चर्चा की। यह किसी भारतीय राष्ट्रपति का मोल्दोवा गणराज्य का पहला राजकीय दौरा है, जिसे दोनों देशों के संबंधों में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर माना जा रहा है।
ऐतिहासिक स्वागत और औपचारिक समारोह
चिसीनाउ पहुँचने पर मोल्दोवा के उपप्रधानमंत्री एवं विदेश मामलों के मंत्री मिहाई पोपसोई ने चिसीनाउ अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर राष्ट्रपति मुर्मु का गर्मजोशी से स्वागत किया। प्रेसिडेंशियल पैलेस में उन्हें औपचारिक स्वागत और गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। राष्ट्रपति मुर्मु, राष्ट्रपति सैंडू के निमंत्रण पर मोल्दोवा के इस आधिकारिक दौरे पर आई हैं।
गौरतलब है कि यह दौरा भारत की राष्ट्रपति की तीन देशों की यात्रा का पहला चरण है, जिसमें मोल्दोवा के बाद नॉर्थ मेसेडोनिया और रोमानिया भी शामिल हैं।
बैठक में क्या हुई चर्चा
विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने भारत-मोल्दोवा सहयोग के पूरे दायरे की समीक्षा की और आपसी संबंधों को नई ऊँचाई देने के लिए साझा प्रतिबद्धता दोहराई। राष्ट्रपति सचिवालय ने बताया कि बातचीत 'फायदेमंद और भविष्योन्मुखी' रही तथा दोनों पक्षों ने नए अवसर तलाशने पर सहमति जताई।
राष्ट्रपति मुर्मु ने इस अवसर पर कहा कि किसी भारतीय राष्ट्रपति का मोल्दोवा का यह पहला राजकीय दौरा दोनों देशों के बीच बढ़ती मित्रता और आपसी विश्वास का प्रतीक है।
किन क्षेत्रों में सहयोग की गुंजाइश
विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि भारत और मोल्दोवा के बीच कृषि, स्वास्थ्य सेवा, फार्मास्यूटिकल्स, सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और शिक्षा के क्षेत्रों में परस्पर लाभकारी सहयोग की व्यापक संभावनाएँ हैं। मंत्रालय ने यह भी कहा कि यह दौरा दोनों देशों के संबंधों को एक 'बड़ी साझेदारी' की दिशा में ले जाएगा।
आगे का कार्यक्रम
राष्ट्रपति मुर्मु मोल्दोवा संसद के अध्यक्ष इगोर ग्रोसु से भी मुलाकात करेंगी। इसके अतिरिक्त, वे मोल्दोवा-इंडिया पार्लियामेंट्री फ्रेंडशिप ग्रुप के सदस्यों से बातचीत करेंगी। एक बिजनेस फोरम और भारतीय समुदाय के सदस्यों को संबोधित करने का कार्यक्रम भी निर्धारित है।
यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत पूर्वी यूरोपीय देशों के साथ अपने कूटनीतिक और आर्थिक संबंध सक्रिय रूप से विस्तारित कर रहा है। राष्ट्रपति स्तर की इस पहली यात्रा से दोनों देशों के बीच संस्थागत संपर्क की नींव मज़बूत होने की उम्मीद है।