21 जुलाई 2026
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मोल्दोवा की राष्ट्रपति मैया सैंडू ने भारत को बताया 'सबसे बड़ा लोकतंत्र और भरोसेमंद दोस्त', मुर्मु की ऐतिहासिक यात्रा

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मोल्दोवा की राष्ट्रपति मैया सैंडू ने भारत को बताया 'सबसे बड़ा लोकतंत्र और भरोसेमंद दोस्त', मुर्मु की ऐतिहासिक यात्रा

सारांश

किसी भारतीय राष्ट्राध्यक्ष की मोल्दोवा की पहली यात्रा में राष्ट्रपति मुर्मु का गर्मजोशी से स्वागत हुआ। मोल्दोवा की राष्ट्रपति मैया सैंडू ने भारत को 'सबसे बड़ा लोकतंत्र और भरोसेमंद दोस्त' कहा — यूरोप में बढ़ती अस्थिरता के बीच यह संकेत भारत की कूटनीतिक पहुँच के लिए अहम है।

मुख्य बातें

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की 20 जुलाई 2026 को चिसीनाउ, मोल्दोवा यात्रा — किसी भारतीय राष्ट्राध्यक्ष की इस देश की पहली यात्रा।
मोल्दोवा की राष्ट्रपति मैया सैंडू ने भारत को 'दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र' और 'भरोसेमंद दोस्त' बताया।
सैंडू ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि दोनों देश मिलकर ऐसी साझेदारी बना रहे हैं जिससे दोनों देशों के लोगों को सीधा फायदा होगा।
राष्ट्रपति मुर्मु ने संसद अध्यक्ष इगोर ग्रोसु और भारत-मोल्दोवा संसदीय मित्रता समूह के सदस्यों से मुलाकात की।
यात्रा के अगले पड़ाव उत्तर मैसिडोनिया और रोमानिया हैं।

मोल्दोवा की राष्ट्रपति मैया सैंडू ने 20 जुलाई 2026 को चिसीनाउ में भारत को 'दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र' और एक 'भरोसेमंद एवं अहम दोस्त' करार दिया। यह टिप्पणी उन्होंने भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की मोल्दोवा यात्रा के दौरान की, जो किसी भारतीय राष्ट्राध्यक्ष की इस देश की पहली यात्रा है।

मैया सैंडू का संदेश

राष्ट्रपति सैंडू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का स्वागत करके मुझे खुशी हुई। यह पहली बार है जब भारत के किसी राष्ट्राध्यक्ष ने मोल्दोवा का दौरा किया है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और हमारा एक अहम दोस्त है। हम मिलकर ऐसी साझेदारी बना रहे हैं, जिससे दोनों देशों के लोगों को सीधे फायदा मिलेगा।'

राष्ट्रपति मुर्मु के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में सैंडू ने कहा, 'हम दोनों लोकतांत्रिक देश हैं — एक बहुत बड़ा और दूसरा छोटा, लेकिन हम आज़ादी, सम्मान और लोगों की भलाई जैसे साझा मूल्यों को मानते हैं। मोल्दोवा में आपको हमेशा एक भरोसेमंद दोस्त मिलेगा।'

साझा लोकतांत्रिक मूल्य

दुनिया में बढ़ती भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच सैंडू ने इस द्विपक्षीय संबंध को विशेष संदर्भ में रखा। उन्होंने कहा कि दोनों देश आज़ादी, सम्मान और जनकल्याण जैसे साझा लोकतांत्रिक मूल्यों से बंधे हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मोल्दोवा सहयोग और भरोसेमंद साझेदारी का रास्ता चुन रहा है।

गौरतलब है कि यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब यूरोप में रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण मोल्दोवा जैसे छोटे देश अपनी विदेश नीति में नए साझेदारों की तलाश कर रहे हैं। भारत की 'वसुधैव कुटुम्बकम' की नीति और गुटनिरपेक्ष छवि इस संदर्भ में मोल्दोवा के लिए आकर्षक है।

संसद भवन में मुलाकात

राष्ट्रपति मुर्मु ने मोल्दोवा की संसद का भी दौरा किया, जहाँ उन्होंने संसद अध्यक्ष इगोर ग्रोसु और भारत-मोल्दोवा संसदीय मित्रता समूह के सदस्यों से मुलाकात की। राष्ट्रपति मुर्मु ने इस अवसर पर विश्वास जताया कि दोनों देशों के नेता आगे भी मज़बूत, भविष्योन्मुखी और परस्पर लाभकारी साझेदारी को आगे बढ़ाते रहेंगे।

विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया

विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने इस राजकीय यात्रा पर आयोजित विशेष मीडिया ब्रीफिंग में कहा, 'इन बैठकों से यह साफ हुआ कि संसदीय लोकतंत्र दोनों देशों के बीच आपसी समझ बढ़ाने, संस्थागत रिश्तों को मजबूत करने और दोनों लोकतांत्रिक समाजों को एक-दूसरे के और करीब लाने में अहम भूमिका निभाता है।'

आगे की यात्रा

मोल्दोवा राष्ट्रपति मुर्मु की तीन देशों की यात्रा का पहला पड़ाव है। इसके बाद वह उत्तर मैसिडोनिया और रोमानिया का दौरा करेंगी, जहाँ उनकी कई उच्च-स्तरीय बैठकें और कार्यक्रम निर्धारित हैं। यह यात्रा भारत की यूरोपीय देशों के साथ बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता का संकेत देती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो रूस-यूक्रेन संघर्ष की छाया में हैं, भारत जैसे गुटनिरपेक्ष और बड़े लोकतांत्रिक देश में स्वाभाविक साझेदार देखते हैं। हालाँकि, साझा मूल्यों की भाषा से परे यह देखना ज़रूरी होगा कि दोनों देश व्यापार, निवेश या तकनीकी सहयोग में ठोस परिणाम कब और कैसे देते हैं। संसदीय मित्रता समूह की बैठकें सकारात्मक संकेत हैं, लेकिन असली परीक्षा द्विपक्षीय समझौतों के क्रियान्वयन में होगी।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की मोल्दोवा यात्रा क्यों खास है?
यह किसी भारतीय राष्ट्राध्यक्ष की मोल्दोवा की पहली यात्रा है, जो दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत का प्रतीक है। इस यात्रा में राष्ट्रपति स्तर की वार्ता, संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस और संसदीय मुलाकातें शामिल रहीं।
मैया सैंडू ने भारत के बारे में क्या कहा?
मोल्दोवा की राष्ट्रपति मैया सैंडू ने भारत को 'दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र' और 'एक अहम और भरोसेमंद दोस्त' बताया। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि दोनों देश मिलकर ऐसी साझेदारी बना रहे हैं जिससे दोनों देशों के लोगों को सीधा फायदा होगा।
भारत और मोल्दोवा के बीच किन साझा मूल्यों की बात हुई?
दोनों राष्ट्रपतियों ने आज़ादी, सम्मान और जनकल्याण को दोनों देशों के बीच साझा लोकतांत्रिक मूल्यों के रूप में रेखांकित किया। सैंडू ने कहा कि दोनों देश इन्हीं मूल्यों के आधार पर मज़बूत द्विपक्षीय संबंध बना सकते हैं।
राष्ट्रपति मुर्मु मोल्दोवा के बाद किन देशों की यात्रा करेंगी?
मोल्दोवा के बाद राष्ट्रपति मुर्मु उत्तर मैसिडोनिया और रोमानिया जाएंगी। यह उनकी तीन देशों की यूरोप यात्रा का हिस्सा है, जिसमें कई उच्च-स्तरीय बैठकें और कार्यक्रम निर्धारित हैं।
भारत-मोल्दोवा संसदीय मित्रता समूह क्या है?
यह दोनों देशों की संसदों के बीच आपसी संवाद और संस्थागत संबंध मज़बूत करने का एक मंच है। राष्ट्रपति मुर्मु ने इस यात्रा में मोल्दोवा के संसद अध्यक्ष इगोर ग्रोसु और इस समूह के सदस्यों से मुलाकात की।
राष्ट्र प्रेस
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