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भारत-मोल्दोवा संबंध आज़ादी और सम्मान के साझा मूल्यों पर टिके हैं: राष्ट्रपति माइया सैंडू

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भारत-मोल्दोवा संबंध आज़ादी और सम्मान के साझा मूल्यों पर टिके हैं: राष्ट्रपति माइया सैंडू

सारांश

34 वर्षों में पहली बार कोई भारतीय राष्ट्राध्यक्ष मोल्दोवा पहुँचीं। राष्ट्रपति माइया सैंडू ने इसे ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि दोनों देश आज़ादी और सम्मान के साझा मूल्यों से बंधे हैं। व्यापार, शिक्षा और फार्मास्यूटिकल्स में सहयोग के नए द्वार खुले।

मुख्य बातें

भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की 20 जुलाई को मोल्दोवा यात्रा — 34 वर्षों में किसी भारतीय राष्ट्राध्यक्ष का पहला दौरा।
राष्ट्रपति माइया सैंडू ने भारत और मोल्दोवा को आज़ादी, सम्मान और नागरिक कल्याण के साझा मूल्यों से जुड़े लोकतंत्र बताया।
2024 में 21 वर्षों के अंतराल के बाद द्विपक्षीय राजनीतिक परामर्श पुनः शुरू; नई दिल्ली में मोल्दोवा दूतावास का उद्घाटन।
संयुक्त मोल्दोवा-भारत बिज़नेस फोरम का शुभारंभ; व्यापार, ऊर्जा, शिक्षा और स्वास्थ्य में सहयोग का लक्ष्य।
मोल्दोवा के विश्वविद्यालयों में 1,400 भारतीय छात्र ; उच्च शिक्षा सहयोग समझौते पर शीघ्र हस्ताक्षर अपेक्षित।
राष्ट्रपति मुर्मु द्वारा महात्मा गांधी की प्रतिमा उपहार में दी गई; सैंडू ने शांति और आपसी समझ का संदेश दोहराया।

मोल्दोवा की राजधानी चिसीनाउ में 20 जुलाई को आयोजित एक संयुक्त प्रेस वार्ता में मोल्दोवा की राष्ट्रपति माइया सैंडू ने कहा कि भारत और मोल्दोवा लोकतांत्रिक आज़ादी, मानवीय सम्मान और नागरिकों की भलाई जैसे साझा मूल्यों से बंधे हैं। यह बयान उन्होंने भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की ऐतिहासिक मोल्दोवा यात्रा के अवसर पर दिया — जो 34 वर्षों में किसी भारतीय राष्ट्राध्यक्ष की इस देश की पहली यात्रा है।

ऐतिहासिक यात्रा का महत्व

राष्ट्रपति सैंडू ने इस अवसर को मोल्दोवा के लिए विशेष सम्मान का क्षण बताया। उन्होंने कहा, 'आज रिपब्लिक ऑफ मोल्दोवा के लिए बहुत खास दिन है। 34 साल पहले हमारे राजनयिक संबंध बनने के बाद पहली बार भारत का कोई हेड ऑफ स्टेट हमारे देश आ रहा है। राष्ट्रपति मुर्मु, रिपब्लिक ऑफ मोल्दोवा में आपका स्वागत है। यह हमारे देश और इसके नागरिकों के लिए भी सम्मान की निशानी है।'

गौरतलब है कि दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध स्थापित होने के बाद से यह द्विपक्षीय संवाद का सबसे ऊँचा स्तर है, जो बढ़ती वैश्विक अस्थिरता के बीच दोनों लोकतंत्रों की एक-दूसरे के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।

साझा मूल्य और भरोसेमंद साझेदारी

राष्ट्रपति सैंडू ने भारत और मोल्दोवा के संबंधों को महज कूटनीतिक औपचारिकता से परे बताया। उन्होंने कहा, 'मोल्दोवा सहयोग और एक भरोसेमंद साझेदारी चुन रहा है। हम दोनों लोकतंत्र हैं — एक बड़ी और एक छोटी — लेकिन एक ही मूल्यों से जुड़े हुए: आज़ादी, डिग्निटी और लोगों की भलाई के लिए काम करना। मोल्दोवा में आपको हमेशा एक भरोसेमंद दोस्त मिलेगा।'

उन्होंने भारत को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र और 1.4 अरब से अधिक लोगों वाली एक गतिशील अर्थव्यवस्था बताया, साथ ही कहा कि हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच राजनीतिक संवाद में नई रफ्तार आई है।

राजनयिक और व्यापारिक सहयोग

2024 में दोनों देशों ने 21 वर्षों के अंतराल के बाद द्विपक्षीय राजनीतिक परामर्श पुनः शुरू किया और नई दिल्ली में मोल्दोवा के दूतावास का उद्घाटन किया। सैंडू ने बताया कि दोनों नेताओं ने बैठक में शिक्षा, स्वास्थ्य, ऊर्जा और व्यापार समेत विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसर तलाशे।

उन्होंने कहा, 'हम चाहते हैं कि यह रिश्ता हमारे लोगों के लिए व्यापार, निवेश, ऊर्जा, शिक्षा और स्वास्थ्य में ठोस नतीजे लाए। हम अपना व्यापार बढ़ाना चाहेंगे और चाहते हैं कि हमारे उत्पाद भारतीय बाज़ार में अधिक से अधिक पहुँचें।' इसी कड़ी में दोनों देशों ने संयुक्त रूप से मोल्दोवा-भारत बिज़नेस फोरम का शुभारंभ किया, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के उद्यमियों और कंपनियों के बीच सीधे संपर्क स्थापित करना है।

शिक्षा और फार्मास्यूटिकल्स में संभावनाएँ

लोगों के बीच संबंधों को और मज़बूत करने की दिशा में सैंडू ने बताया कि वर्तमान में 1,400 भारतीय छात्र मोल्दोवा के विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत हैं, जिनमें से अधिकांश मेडिकल विश्वविद्यालय में हैं। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक नए सहयोग समझौते पर वार्ता पूर्ण हो चुकी है और उस पर शीघ्र हस्ताक्षर होने की उम्मीद है।

फार्मास्यूटिकल्स क्षेत्र में भी सैंडू ने भारत के अनुभव का लाभ उठाने की इच्छा जताई और मोल्दोवा में भारतीय दवा निवेश आकर्षित करने की बात कही।

गांधी की विरासत और शांति का संदेश

राष्ट्रपति मुर्मु द्वारा महात्मा गांधी की प्रतिमा उपहार में देने पर आभार व्यक्त करते हुए सैंडू ने कहा, 'उनसे हमें यह सबक मिला है कि सच्ची शांति ताकतवर लोगों द्वारा थोपी गई चुप्पी नहीं, बल्कि स्वतंत्र देशों के बीच आपसी समझ है।' यह संदेश ऐसे समय में विशेष रूप से प्रासंगिक है जब यूरोप में भू-राजनीतिक तनाव चरम पर है और मोल्दोवा खुद इस अस्थिरता के करीब स्थित है। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच उच्च शिक्षा समझौते पर हस्ताक्षर और बिज़नेस फोरम की गतिविधियाँ इस साझेदारी को और ठोस रूप देंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि क्या दोनों देश 'साझा मूल्यों' की बयानबाज़ी को ठोस आर्थिक और संस्थागत ढाँचे में बदल पाते हैं। मोल्दोवा यूरोपीय संघ की सदस्यता की राह पर है और रूस-यूक्रेन संघर्ष की छाया में है — ऐसे में भारत से जुड़ाव उसे पश्चिम और पूर्व दोनों के बाहर एक विश्वसनीय भागीदार देता है। भारत के लिए यह पूर्वी यूरोप में पैठ बनाने का एक सुलभ अवसर है, जहाँ उसकी उपस्थिति अभी तक सीमित रही है। बिज़नेस फोरम और शिक्षा समझौते अच्छे संकेत हैं, पर द्विपक्षीय व्यापार के ठोस आँकड़े और समयबद्ध लक्ष्य सार्वजनिक नहीं किए गए — बिना इसके यह साझेदारी इरादों तक सीमित रह सकती है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की मोल्दोवा यात्रा क्यों ऐतिहासिक है?
यह 34 वर्षों में किसी भारतीय राष्ट्राध्यक्ष की मोल्दोवा की पहली यात्रा है। दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध स्थापित होने के बाद से यह उच्चतम स्तरीय द्विपक्षीय संवाद है, जो बढ़ती वैश्विक अस्थिरता के बीच हो रहा है।
भारत और मोल्दोवा के बीच किन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी?
दोनों देशों ने व्यापार, निवेश, ऊर्जा, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा की। मोल्दोवा-भारत बिज़नेस फोरम का शुभारंभ हुआ और उच्च शिक्षा सहयोग समझौते पर शीघ्र हस्ताक्षर की उम्मीद जताई गई।
मोल्दोवा में कितने भारतीय छात्र पढ़ते हैं?
राष्ट्रपति सैंडू के अनुसार, वर्तमान में 1,400 भारतीय छात्र मोल्दोवा के विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत हैं, जिनमें से अधिकांश मेडिकल विश्वविद्यालय में हैं।
भारत-मोल्दोवा के बीच राजनयिक संबंधों में हाल में क्या बदलाव आए हैं?
2024 में 21 वर्षों के अंतराल के बाद दोनों देशों ने द्विपक्षीय राजनीतिक परामर्श पुनः शुरू किए और नई दिल्ली में मोल्दोवा के दूतावास का उद्घाटन किया। राष्ट्रपति मुर्मु की यात्रा इसी नई रफ्तार की अगली कड़ी है।
राष्ट्रपति सैंडू ने महात्मा गांधी का ज़िक्र क्यों किया?
राष्ट्रपति मुर्मु द्वारा महात्मा गांधी की प्रतिमा उपहार में दिए जाने पर सैंडू ने आभार जताते हुए कहा कि गांधी का संदेश है कि सच्ची शांति ताकत से थोपी गई चुप्पी नहीं, बल्कि स्वतंत्र देशों के बीच आपसी समझ है — जो मोल्दोवा की वर्तमान भू-राजनीतिक स्थिति के संदर्भ में विशेष रूप से प्रासंगिक है।
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