राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु तीन यूरोपीय देशों के दौरे पर रवाना, मोल्दोवा-उत्तर मैसेडोनिया में पहली बार पहुँचेंगी भारतीय राष्ट्रपति
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 19 जुलाई 2026 को नई दिल्ली से मोल्दोवा गणराज्य, उत्तरी मैसेडोनिया गणराज्य और रोमानिया की सात दिवसीय राजकीय यात्रा पर रवाना हुईं। यह किसी भी भारतीय राष्ट्रपति की मोल्दोवा और उत्तरी मैसेडोनिया की पहली द्विपक्षीय यात्रा है, जबकि रोमानिया के लिए यह तीन दशकों से अधिक समय — यानी 1994 के बाद — की पहली राष्ट्रपति-स्तरीय यात्रा है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह दौरा 19 से 25 जुलाई 2026 तक चलेगा।
दौरे की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने विशेष प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि यह यात्रा तीनों देशों के राष्ट्रपतियों के निमंत्रण पर हो रही है। उन्होंने रेखांकित किया कि मोल्दोवा ने 2023 में नई दिल्ली में अपना दूतावास खोला था, और इस नए राजनयिक ढाँचे के बाद यह पहली उच्चस्तरीय भारतीय यात्रा है। रोमानिया के संदर्भ में, पिछली राष्ट्रपति-स्तरीय यात्रा 1994 में हुई थी — यानी 32 वर्षों के अंतराल के बाद यह दौरा हो रहा है।
जॉर्ज ने कहा कि यह यात्रा स्पष्ट करती है कि भारत अब मध्य और पूर्वी यूरोप के देशों के साथ अपने संबंधों को प्राथमिकता दे रहा है, और यह यूरोपीय संघ के साथ भारत की व्यापक साझेदारी को आगे बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम है।
तीन 'टी' का एजेंडा: व्यापार, तकनीक और पर्यटन
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस ब्रीफिंग में स्पष्ट किया कि इस दौरे का मुख्य उद्देश्य तीन 'टी' — ट्रेड (व्यापार), टेक्नोलॉजी (तकनीक) और टूरिज्म (पर्यटन) — के क्षेत्रों में सहयोग को नई ऊँचाई देना है। इस ब्रीफिंग में राष्ट्रपति की प्रेस सचिव डॉ. मनीषा वर्मा और विदेश मंत्रालय में दक्षिणी यूरोप क्षेत्र की संयुक्त सचिव अल्पना दुबे भी उपस्थित रहीं।
यात्रा का व्यापक लक्ष्य इन तीन यूरोपीय देशों के साथ भारत के राजनीतिक, आर्थिक, व्यापारिक और तकनीकी संबंधों को सुदृढ़ करना है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर भी सक्रिय रूप से बातचीत कर रहा है।
मध्य-पूर्वी यूरोप में भारत की बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता
गौरतलब है कि भारत पिछले कुछ वर्षों में यूरोप के उन देशों के साथ भी संबंध प्रगाढ़ कर रहा है जो परंपरागत रूप से भारतीय कूटनीति के केंद्र में नहीं रहे। सचिव जॉर्ज के अनुसार, मोल्दोवा, उत्तरी मैसेडोनिया और रोमानिया की यात्रा इसी रणनीतिक दृष्टिकोण का हिस्सा है। यह भारत की 'यूरोप-प्लस' नीति को दर्शाता है, जहाँ केवल ब्रिटेन, फ्रांस या जर्मनी तक सीमित न रहकर छोटे और उभरते यूरोपीय देशों के साथ भी सक्रिय संवाद बनाया जा रहा है।
आगे क्या होगा
राष्ट्रपति मुर्मु 25 जुलाई 2026 तक इन तीनों देशों में राजकीय कार्यक्रमों, द्विपक्षीय बैठकों और सांस्कृतिक आदान-प्रदान में भाग लेंगी। इस दौरे से निकलने वाले समझौतों और संयुक्त वक्तव्यों पर देश की नज़रें टिकी रहेंगी, क्योंकि यह यात्रा भारत-यूरोप संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है।