राष्ट्रपति मुर्मु की मोल्दोवा यात्रा: ट्रेड, टेक्नोलॉजी, टूरिज्म और टैलेंट पर नई साझेदारी की नींव
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की मोल्दोवा की राजकीय यात्रा के दौरान विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने 20 जुलाई को चिसीनाउ में एक विशेष ब्रीफिंग को संबोधित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह यात्रा भारत और मोल्दोवा के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊर्जा देने, व्यापारिक सहयोग को विस्तार देने और लोकतांत्रिक संस्थाओं के बीच संवाद को प्रगाढ़ करने की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
संसदीय संपर्क और लोकतांत्रिक सेतु
राष्ट्रपति मुर्मु ने यात्रा के दौरान मोल्दोवा गणराज्य की संसद के स्पीकर से मुलाकात की और भारत-मोल्दोवा संसदीय मैत्री समूह के सदस्यों के साथ विस्तृत चर्चा की। उन्होंने संसद भवन का दौरा भी किया।
सचिव जॉर्ज के अनुसार, इन मुलाकातों ने यह रेखांकित किया कि संसदीय लोकतंत्र दोनों देशों के बीच आपसी समझ को गहरा करने, संस्थागत रिश्तों को सुदृढ़ करने और दोनों लोकतांत्रिक समाजों को एक-दूसरे के करीब लाने में केंद्रीय भूमिका निभाता है।
पहला भारत-मोल्दोवा बिजनेस फोरम
इस यात्रा का एक ऐतिहासिक पहलू रहा भारत-मोल्दोवा बिजनेस फोरम का आयोजन — मोल्दोवा में इस प्रकार का यह पहला कार्यक्रम था। राष्ट्रपति मुर्मु ने मोल्दोवा के राष्ट्रपति के साथ मिलकर इस फोरम को संयुक्त रूप से संबोधित किया।
फोरम में दोनों देशों के प्रमुख कारोबारी प्रतिनिधियों ने व्यापार, निवेश, नवाचार और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नए अवसरों पर विचार-विमर्श किया। इस यात्रा का मूल फोकस '4-टी' फ्रेमवर्क — यानी ट्रेड (व्यापार), टेक्नोलॉजी (प्रौद्योगिकी), टूरिज्म (पर्यटन) और टैलेंट (प्रतिभा) — पर केंद्रित रहा।
यूरोप से जुड़ाव और मोल्दोवा की रणनीतिक भूमिका
सचिव जॉर्ज ने बताया कि वर्ष की शुरुआत में हुआ भारत-ईएफटीए (EFTA) समझौता यूरोप के साथ भारत के संबंधों को आगे बढ़ाने में एक अहम कदम है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी यूरोपीय कूटनीति को व्यापक आर्थिक साझेदारियों की दिशा में विस्तार दे रहा है।
गौरतलब है कि मोल्दोवा यूरोपीय संघ (EU) का सदस्य नहीं है, लेकिन यह EU का उम्मीदवार देश है और यूरोपीय देशों के साथ इसके विशेष संबंध हैं। इस स्थिति का लाभ उठाते हुए भारत-मोल्दोवा साझेदारी को यूरोपीय बाज़ार तक पहुँच के एक वैकल्पिक सेतु के रूप में देखा जा रहा है।
विकसित भारत 2047 और यूरोप की भूमिका
सचिव जॉर्ज ने अमृत काल के संदर्भ में स्पष्ट किया कि जब भारत 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा, तो यूरोप एक अनिवार्य रणनीतिक साझेदार होगा — और उस समीकरण में मोल्दोवा की भी सार्थक भूमिका होगी।
उन्होंने कहा कि यह यात्रा पिछले कई वर्षों से जारी उन प्रयासों की कड़ी है, जिनके तहत भारत यूरोप के साथ अपने संबंधों को संस्थागत और आर्थिक दोनों स्तरों पर सुदृढ़ कर रहा है। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच 4-टी फ्रेमवर्क के अंतर्गत ठोस समझौतों और आदान-प्रदान की उम्मीद है।