21 जुलाई 2026
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राष्ट्रपति मुर्मु की मोल्दोवा यात्रा: ट्रेड, टेक्नोलॉजी, टूरिज्म और टैलेंट पर नई साझेदारी की नींव

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राष्ट्रपति मुर्मु की मोल्दोवा यात्रा: ट्रेड, टेक्नोलॉजी, टूरिज्म और टैलेंट पर नई साझेदारी की नींव

सारांश

राष्ट्रपति मुर्मु की मोल्दोवा यात्रा महज़ कूटनीतिक शिष्टाचार नहीं — यह भारत की यूरोप-नीति में एक नई कड़ी है। पहले भारत-मोल्दोवा बिजनेस फोरम और 4-टी फ्रेमवर्क के ज़रिये दोनों देश व्यापार, प्रौद्योगिकी, पर्यटन और प्रतिभा के क्षेत्र में नई साझेदारी की नींव रख रहे हैं।

मुख्य बातें

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 20 जुलाई को मोल्दोवा (चिसीनाउ) की राजकीय यात्रा की, जो भारत-मोल्दोवा संबंधों में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।
मोल्दोवा में पहला भारत-मोल्दोवा बिजनेस फोरम आयोजित हुआ, जिसे दोनों देशों के राष्ट्रपतियों ने संयुक्त रूप से संबोधित किया।
यात्रा का मुख्य फोकस '4-टी' फ्रेमवर्क — ट्रेड, टेक्नोलॉजी, टूरिज्म और टैलेंट — पर रहा।
राष्ट्रपति मुर्मु ने मोल्दोवा संसद के स्पीकर से मुलाकात की और भारत-मोल्दोवा संसदीय मैत्री समूह से संवाद किया।
मोल्दोवा EU का उम्मीदवार देश है; भारत इसे यूरोपीय साझेदारी विस्तार के लिए रणनीतिक सेतु मानता है।
विकसित भारत 2047 लक्ष्य के संदर्भ में यूरोप और मोल्दोवा को अहम भागीदार बताया गया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की मोल्दोवा की राजकीय यात्रा के दौरान विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने 20 जुलाई को चिसीनाउ में एक विशेष ब्रीफिंग को संबोधित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह यात्रा भारत और मोल्दोवा के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊर्जा देने, व्यापारिक सहयोग को विस्तार देने और लोकतांत्रिक संस्थाओं के बीच संवाद को प्रगाढ़ करने की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

संसदीय संपर्क और लोकतांत्रिक सेतु

राष्ट्रपति मुर्मु ने यात्रा के दौरान मोल्दोवा गणराज्य की संसद के स्पीकर से मुलाकात की और भारत-मोल्दोवा संसदीय मैत्री समूह के सदस्यों के साथ विस्तृत चर्चा की। उन्होंने संसद भवन का दौरा भी किया।

सचिव जॉर्ज के अनुसार, इन मुलाकातों ने यह रेखांकित किया कि संसदीय लोकतंत्र दोनों देशों के बीच आपसी समझ को गहरा करने, संस्थागत रिश्तों को सुदृढ़ करने और दोनों लोकतांत्रिक समाजों को एक-दूसरे के करीब लाने में केंद्रीय भूमिका निभाता है।

पहला भारत-मोल्दोवा बिजनेस फोरम

इस यात्रा का एक ऐतिहासिक पहलू रहा भारत-मोल्दोवा बिजनेस फोरम का आयोजन — मोल्दोवा में इस प्रकार का यह पहला कार्यक्रम था। राष्ट्रपति मुर्मु ने मोल्दोवा के राष्ट्रपति के साथ मिलकर इस फोरम को संयुक्त रूप से संबोधित किया।

फोरम में दोनों देशों के प्रमुख कारोबारी प्रतिनिधियों ने व्यापार, निवेश, नवाचार और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नए अवसरों पर विचार-विमर्श किया। इस यात्रा का मूल फोकस '4-टी' फ्रेमवर्क — यानी ट्रेड (व्यापार), टेक्नोलॉजी (प्रौद्योगिकी), टूरिज्म (पर्यटन) और टैलेंट (प्रतिभा) — पर केंद्रित रहा।

यूरोप से जुड़ाव और मोल्दोवा की रणनीतिक भूमिका

सचिव जॉर्ज ने बताया कि वर्ष की शुरुआत में हुआ भारत-ईएफटीए (EFTA) समझौता यूरोप के साथ भारत के संबंधों को आगे बढ़ाने में एक अहम कदम है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी यूरोपीय कूटनीति को व्यापक आर्थिक साझेदारियों की दिशा में विस्तार दे रहा है।

गौरतलब है कि मोल्दोवा यूरोपीय संघ (EU) का सदस्य नहीं है, लेकिन यह EU का उम्मीदवार देश है और यूरोपीय देशों के साथ इसके विशेष संबंध हैं। इस स्थिति का लाभ उठाते हुए भारत-मोल्दोवा साझेदारी को यूरोपीय बाज़ार तक पहुँच के एक वैकल्पिक सेतु के रूप में देखा जा रहा है।

विकसित भारत 2047 और यूरोप की भूमिका

सचिव जॉर्ज ने अमृत काल के संदर्भ में स्पष्ट किया कि जब भारत 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा, तो यूरोप एक अनिवार्य रणनीतिक साझेदार होगा — और उस समीकरण में मोल्दोवा की भी सार्थक भूमिका होगी।

उन्होंने कहा कि यह यात्रा पिछले कई वर्षों से जारी उन प्रयासों की कड़ी है, जिनके तहत भारत यूरोप के साथ अपने संबंधों को संस्थागत और आर्थिक दोनों स्तरों पर सुदृढ़ कर रहा है। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच 4-टी फ्रेमवर्क के अंतर्गत ठोस समझौतों और आदान-प्रदान की उम्मीद है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की मोल्दोवा यात्रा का मुख्य उद्देश्य क्या था?
इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत और मोल्दोवा के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मज़बूत करना और '4-टी' यानी ट्रेड, टेक्नोलॉजी, टूरिज्म और टैलेंट के क्षेत्र में नई साझेदारी की नींव रखना था। इसके साथ ही लोकतांत्रिक संस्थाओं के बीच संपर्क को बेहतर बनाना भी प्राथमिकता रही।
भारत-मोल्दोवा बिजनेस फोरम क्या है और यह क्यों खास है?
भारत-मोल्दोवा बिजनेस फोरम मोल्दोवा में आयोजित इस प्रकार का पहला कार्यक्रम था, जिसे दोनों देशों के राष्ट्रपतियों ने संयुक्त रूप से संबोधित किया। इसमें व्यापार, निवेश, नवाचार और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नए अवसरों पर चर्चा हुई।
मोल्दोवा के साथ साझेदारी भारत के लिए रणनीतिक रूप से क्यों महत्वपूर्ण है?
मोल्दोवा यूरोपीय संघ का उम्मीदवार देश है और यूरोपीय देशों के साथ उसके विशेष संबंध हैं, जो भारत को यूरोपीय बाज़ार तक पहुँच का एक वैकल्पिक मार्ग प्रदान कर सकते हैं। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के संदर्भ में यूरोप एक अनिवार्य साझेदार है और मोल्दोवा उस समीकरण में सहायक भूमिका निभा सकता है।
राष्ट्रपति मुर्मु ने मोल्दोवा संसद में क्या किया?
राष्ट्रपति मुर्मु ने मोल्दोवा गणराज्य की संसद के स्पीकर से मुलाकात की, भारत-मोल्दोवा संसदीय मैत्री समूह के सदस्यों से बातचीत की और संसद भवन का दौरा किया। इन मुलाकातों ने दोनों देशों के बीच संसदीय लोकतंत्र को साझा आधार के रूप में रेखांकित किया।
भारत-EFTA समझौते का मोल्दोवा यात्रा से क्या संबंध है?
विदेश मंत्रालय के सचिव सिबी जॉर्ज के अनुसार, वर्ष की शुरुआत में हुआ भारत-EFTA समझौता यूरोप के साथ भारत के आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। मोल्दोवा के साथ साझेदारी इसी रणनीति की अगली कड़ी है, जो EU के बाहर के यूरोपीय देशों को भी भारत के कूटनीतिक और आर्थिक दायरे में लाती है।
राष्ट्र प्रेस
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