राजभर का अखिलेश पर तीखा वार: 'तिलचट्टों' के भरोसे सत्ता की तलाश में सपा — एक्स पर बोले UP मंत्री
सारांश
मुख्य बातें
सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने 4 सितंबर 2026 को समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा राजनीतिक प्रहार किया। राजभर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट के ज़रिये व्यंग्यात्मक भाषा में आरोप लगाया कि अखिलेश यादव अब 'तिलचट्टों' के सहारे सत्ता में वापसी का सपना देख रहे हैं।
क्या कहा राजभर ने
राजभर ने एक्स पर लिखा — 'सुने हैं कि आप अभिजीत नक्षत्र में दीपक जलाने की कोशिश कर रहे हैं। इसी बीच आपके घर में 'तिलचट्टे' आने लगे, वो भी मुंह बांध के।' उन्होंने आगे तंज कसते हुए जोड़ा कि टीवी पर तो 'लाल' वाला स्प्रे तिलचट्टों को खत्म करने के लिए दिखाया जाता है, लेकिन यहाँ 'लाल' वाले खुद ही तिलचट्टों से मदद माँग रहे हैं।
सपा के इतिहास पर निशाना
राजभर ने अखिलेश यादव के पिता और सपा के संस्थापक मुलायम सिंह यादव तथा 'चच्चू' का हवाला देते हुए कहा कि उन नेताओं ने गाँव-गाँव साइकिल चलाकर पार्टी खड़ी की थी। उन्होंने व्यंग्य किया कि वह सब मेहनत इसीलिए हुई थी कि 'बेटवा एसी में बैठकर तिलचट्टों के भरोसे सरकार बनाएगा?'
सैफई सिंडिकेट और विदेशी ताकत का आरोप
राजभर ने आगे आरोप लगाया कि अखिलेश यादव 'चाँदी के चम्मच' वाले नेता हैं और विदेशी ताकत तथा अकूत धन के बल पर सत्ता का खेल उनकी पुरानी आदत है। उन्होंने कहा कि 'सैफई सिंडिकेट' के बच्चे विदेश में पढ़ते और लंदन-पेरिस घूमते हैं।
पसमांदा-यादव युवाओं को चेतावनी
राजभर ने अपनी पोस्ट के अंत में अखिलेश से अपील की कि वे गाँव-देहात के यादव और गरीब जोलहा-पसमांदा मुस्लिम युवाओं को 'ऐसी आग में न झोंकें जिससे उनका और उनके परिवार का भविष्य तबाह हो जाए।' यह टिप्पणी राजनीतिक रूप से संवेदनशील मानी जा रही है, क्योंकि पसमांदा मुस्लिम और यादव समुदाय सपा के पारंपरिक वोट आधार का हिस्सा हैं।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि ओम प्रकाश राजभर पहले सपा के साथ गठबंधन में रह चुके हैं और बाद में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार में शामिल हो गए। यह ऐसे समय में आया है जब 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ ज़ोर पकड़ रही हैं और सभी दल अपनी-अपनी सियासी ज़मीन मज़बूत करने में जुटे हैं। राजभर का यह हमला आने वाले चुनावी समीकरणों को और पेचीदा बना सकता है।