4 सितंबर 2026
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राजभर का अखिलेश पर तीखा वार: 'तिलचट्टों' के भरोसे सत्ता की तलाश में सपा — एक्स पर बोले UP मंत्री

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राजभर का अखिलेश पर तीखा वार: 'तिलचट्टों' के भरोसे सत्ता की तलाश में सपा — एक्स पर बोले UP मंत्री

सारांश

UP मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने एक्स पर अखिलेश यादव को 'तिलचट्टों' के सहारे सत्ता की तलाश करने वाला बताया — सैफई सिंडिकेट, पसमांदा युवाओं और सपा की विरासत पर तीखे सवाल उठाकर 2027 चुनाव से पहले सियासी तापमान बढ़ा दिया।

मुख्य बातें

ओम प्रकाश राजभर ने 4 सितंबर 2026 को एक्स पर अखिलेश यादव पर तीखा व्यंग्यात्मक हमला बोला।
राजभर ने आरोप लगाया कि सपा अब 'तिलचट्टों' के भरोसे उत्तर प्रदेश में सत्ता में वापसी का सपना देख रही है।
उन्होंने मुलायम सिंह यादव की विरासत का हवाला देते हुए अखिलेश को 'चाँदी के चम्मच' वाला नेता बताया।
'सैफई सिंडिकेट' पर निशाना साधते हुए कहा कि परिवार के बच्चे लंदन-पेरिस घूमते हैं।
राजभर ने यादव और पसमांदा मुस्लिम युवाओं को 'राजनीतिक आग' में न झोंकने की अपील की।

सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने 4 सितंबर 2026 को समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा राजनीतिक प्रहार किया। राजभर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट के ज़रिये व्यंग्यात्मक भाषा में आरोप लगाया कि अखिलेश यादव अब 'तिलचट्टों' के सहारे सत्ता में वापसी का सपना देख रहे हैं।

क्या कहा राजभर ने

राजभर ने एक्स पर लिखा — 'सुने हैं कि आप अभिजीत नक्षत्र में दीपक जलाने की कोशिश कर रहे हैं। इसी बीच आपके घर में 'तिलचट्टे' आने लगे, वो भी मुंह बांध के।' उन्होंने आगे तंज कसते हुए जोड़ा कि टीवी पर तो 'लाल' वाला स्प्रे तिलचट्टों को खत्म करने के लिए दिखाया जाता है, लेकिन यहाँ 'लाल' वाले खुद ही तिलचट्टों से मदद माँग रहे हैं।

सपा के इतिहास पर निशाना

राजभर ने अखिलेश यादव के पिता और सपा के संस्थापक मुलायम सिंह यादव तथा 'चच्चू' का हवाला देते हुए कहा कि उन नेताओं ने गाँव-गाँव साइकिल चलाकर पार्टी खड़ी की थी। उन्होंने व्यंग्य किया कि वह सब मेहनत इसीलिए हुई थी कि 'बेटवा एसी में बैठकर तिलचट्टों के भरोसे सरकार बनाएगा?'

सैफई सिंडिकेट और विदेशी ताकत का आरोप

राजभर ने आगे आरोप लगाया कि अखिलेश यादव 'चाँदी के चम्मच' वाले नेता हैं और विदेशी ताकत तथा अकूत धन के बल पर सत्ता का खेल उनकी पुरानी आदत है। उन्होंने कहा कि 'सैफई सिंडिकेट' के बच्चे विदेश में पढ़ते और लंदन-पेरिस घूमते हैं।

पसमांदा-यादव युवाओं को चेतावनी

राजभर ने अपनी पोस्ट के अंत में अखिलेश से अपील की कि वे गाँव-देहात के यादव और गरीब जोलहा-पसमांदा मुस्लिम युवाओं को 'ऐसी आग में न झोंकें जिससे उनका और उनके परिवार का भविष्य तबाह हो जाए।' यह टिप्पणी राजनीतिक रूप से संवेदनशील मानी जा रही है, क्योंकि पसमांदा मुस्लिम और यादव समुदाय सपा के पारंपरिक वोट आधार का हिस्सा हैं।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि ओम प्रकाश राजभर पहले सपा के साथ गठबंधन में रह चुके हैं और बाद में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार में शामिल हो गए। यह ऐसे समय में आया है जब 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ ज़ोर पकड़ रही हैं और सभी दल अपनी-अपनी सियासी ज़मीन मज़बूत करने में जुटे हैं। राजभर का यह हमला आने वाले चुनावी समीकरणों को और पेचीदा बना सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि 2027 की चुनावी बिसात पर एक सोचा-समझा दाँव है — पसमांदा मुस्लिम और यादव युवाओं को सपा से दूर करने की कोशिश, जो सपा का पारंपरिक वोट आधार है। यह ऐसे समय में आया है जब राजभर खुद BJP के साथ गठबंधन में हैं और अपनी अलग पहचान बनाए रखने की ज़रूरत महसूस कर रहे हैं। 'तिलचट्टा' जैसी भाषा राजनीतिक विमर्श को निचले स्तर पर ले जाती है, लेकिन इसकी पहुँच सोशल मीडिया पर व्यापक होती है — और यही इसका असली मकसद भी लगता है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक जाती है, वह यह है कि राजभर खुद कभी सपा के साझेदार थे; उनकी यह आलोचना उतनी ही उनके अपने राजनीतिक पुनर्निर्माण की कहानी है जितनी अखिलेश की।
RashtraPress
4 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर क्या आरोप लगाए?
राजभर ने एक्स पर लिखा कि अखिलेश यादव अब 'तिलचट्टों' के सहारे उत्तर प्रदेश में सत्ता में वापसी का सपना देख रहे हैं। उन्होंने सपा की विरासत पर सवाल उठाते हुए कहा कि मुलायम सिंह यादव ने गाँव-गाँव साइकिल चलाकर पार्टी बनाई, लेकिन अब उनका बेटा एसी में बैठकर राजनीति कर रहा है।
'तिलचट्टा' टिप्पणी का राजनीतिक मतलब क्या है?
राजभर ने यह शब्द व्यंग्यात्मक रूप से उन राजनीतिक सहयोगियों के लिए इस्तेमाल किया जिन्हें वे अखिलेश यादव का नया समर्थन आधार बता रहे हैं। यह टिप्पणी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले सपा के वोट बैंक को कमज़ोर करने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है।
राजभर ने पसमांदा मुस्लिम और यादव युवाओं का ज़िक्र क्यों किया?
राजभर ने अखिलेश से अपील की कि वे गाँव-देहात के यादव और गरीब जोलहा-पसमांदा मुस्लिम युवाओं को 'राजनीतिक आग' में न झोंकें। यह इसलिए अहम है क्योंकि ये दोनों समुदाय सपा के पारंपरिक वोट आधार का हिस्सा हैं, और राजभर इन्हें सपा से दूर करने की कोशिश करते दिख रहे हैं।
ओम प्रकाश राजभर और समाजवादी पार्टी का रिश्ता कैसा रहा है?
राजभर पहले सपा के साथ गठबंधन में रह चुके हैं, लेकिन बाद में अलग होकर BJP के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार में शामिल हो गए। अब वे सपा के कड़े आलोचक बन गए हैं और 2027 चुनाव से पहले अपनी राजनीतिक ज़मीन मज़बूत करने में जुटे हैं।
'सैफई सिंडिकेट' पर राजभर का क्या आरोप था?
राजभर ने आरोप लगाया कि सैफई सिंडिकेट के बच्चे विदेश में पढ़ते हैं और लंदन-पेरिस घूमते हैं, जबकि गाँव के गरीब युवाओं को राजनीतिक जोखिम में डाला जा रहा है। उन्होंने अखिलेश को 'चाँदी के चम्मच' वाला नेता बताते हुए विदेशी ताकत और अकूत पैसे के बल पर सत्ता का खेल खेलने का आरोप लगाया।
राष्ट्र प्रेस
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