बस्ती घटना पर ओम प्रकाश राजभर का अखिलेश यादव पर प्रहार: 'तुष्टिकरण से यदुवंश कुचल रहा है'
सारांश
मुख्य बातें
सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने 4 अगस्त को बस्ती जिले की एक घटना को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला। राजभर ने आरोप लगाया कि सपा की तुष्टिकरण की राजनीति का खामियाजा अब उसके परंपरागत समर्थक यादव समुदाय को भी भुगतना पड़ रहा है।
एक्स पर क्या लिखा राजभर ने
राजभर ने सोशल मीडिया मंच एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर सीधे अखिलेश यादव को संबोधित करते हुए लिखा कि बस्ती जिले में एक यदुवंशी परिवार की गर्भवती महिला के पेट पर लात मारकर एक अजन्मे शिशु को नुकसान पहुँचाने का प्रयास किया गया। उन्होंने इस कृत्य के लिए 'अशफाक' नामक व्यक्ति को जिम्मेदार ठहराया। राजभर ने कहा कि पीड़ित यदुवंशी परिवार घर-मकान छोड़कर पलायन को मजबूर हो गया है।
कैराना से तुलना और राजनीतिक आरोप
राजभर ने इस घटना की तुलना कैराना पलायन प्रकरण से करते हुए कहा कि यह वैसा ही है जैसा सपा के शासनकाल में हुआ था। उन्होंने सपा के 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समीकरण पर कटाक्ष करते हुए कहा कि अब यह 'पीट देगा अशफाक' बन गया है। राजभर के अनुसार, सपा के एमवाई (मुस्लिम-यादव) समीकरण में 'एम' इतना भारी पड़ गया है कि 'वाई' यानी यादव समुदाय हर रोज कुचल रहा है।
योगी सरकार का हवाला
राजभर ने यह भी कहा कि ऐसी घटनाओं को रोका जाएगा, क्योंकि प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार है। उन्होंने दिवंगत मुलायम सिंह यादव का भी उल्लेख करते हुए कहा कि काश वे आज जीवित होते और यह सब देख पाते। राजभर ने अखिलेश यादव को चेतावनी देते हुए कहा कि तुष्टिकरण की आग से इतना न खेलें कि यदुवंश का नाश हो जाए।
राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ शुरू हो चुकी हैं और यादव-मुस्लिम गठजोड़ को लेकर राजनीतिक बहस तेज़ है। गौरतलब है कि सुभासपा वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा है और राजभर का यह हमला विपक्षी सपा को यादव वोट बैंक पर घेरने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। बस्ती घटना के तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक उपलब्ध नहीं है; राजभर के बयान उनके अपने एक्स पोस्ट पर आधारित हैं।
आगे क्या
अभी तक अखिलेश यादव या समाजवादी पार्टी की ओर से इस हमले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। बस्ती की घटना को लेकर स्थानीय प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयानबाज़ी आगामी चुनावी मौसम में जातीय ध्रुवीकरण को और गहरा कर सकती है।