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राष्ट्रपति मुर्मु का मोल्दोवा दौरा: व्यापार, निवेश और सप्लाई चेन सहयोग पर ऐतिहासिक सहमति

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राष्ट्रपति मुर्मु का मोल्दोवा दौरा: व्यापार, निवेश और सप्लाई चेन सहयोग पर ऐतिहासिक सहमति

सारांश

किसी भारतीय राष्ट्रपति का मोल्दोवा का पहला राजकीय दौरा महज़ शिष्टाचार नहीं था — यह भारत की वैश्विक दक्षिण कूटनीति का विस्तार था। व्यापार, एआई, नवीकरणीय ऊर्जा और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर ठोस सहमति के साथ, मुर्मु ने यूरोप के पड़ोस में एक नई साझेदारी की नींव रखी।

मुख्य बातें

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 20 जुलाई 2026 को चिसीनाउ में मोल्दोवा की राष्ट्रपति माइया सैंडू से मुलाकात की — यह किसी भारतीय राष्ट्रपति का मोल्दोवा का पहला राजकीय दौरा है।
दोनों देशों ने व्यापार, निवेश, सप्लाई चेन और कनेक्टिविटी में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में कृषि, फार्मास्यूटिकल्स, नवीकरणीय ऊर्जा, एआई और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं।
मोल्दोवा के प्रोफेशनल्स के लिए आईटीईसी ट्रेनिंग स्लॉट दोगुने किए गए; डिप्लोमैट्स को एआई और साइबर डिप्लोमेसी कोर्स का निमंत्रण।
भारत ने मोल्दोवा के कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस में शामिल होने की उम्मीद जताई।
दोनों नेताओं ने शांति, बातचीत और अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रति साझा प्रतिबद्धता दोहराई।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 20 जुलाई 2026 को चिसीनाउ के प्रेसिडेंशियल पैलेस में मोल्दोवा की राष्ट्रपति माइया सैंडू से मुलाकात की और दोनों देशों ने व्यापार, निवेश तथा सप्लाई चेन में सहयोग को मजबूत बनाने पर सहमति जताई। यह किसी भारतीय राष्ट्रपति का मोल्दोवा का पहला राजकीय दौरा है, जिसे दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर माना जा रहा है।

मुख्य घटनाक्रम

जॉइंट प्रेस मीट में राष्ट्रपति मुर्मु ने गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए मोल्दोवा का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, 'यह किसी भारतीय राष्ट्रपति का मोल्दोवा का पहला राजकीय दौरा है, जो हमारे आपसी संबंधों में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है और हमारे दोनों देशों के बीच बढ़ती दोस्ती और आपसी भरोसे को दिखाता है।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत और मोल्दोवा के बीच तीन दशकों से अधिक समय से मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं।

आर्थिक सहयोग के प्रमुख क्षेत्र

दोनों राष्ट्रपतियों ने कृषि, लॉजिस्टिक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य सुविधा और फार्मास्यूटिकल्स, नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इनोवेशन जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने पर सहमति जताई। राष्ट्रपति मुर्मु ने स्पष्ट किया कि आर्थिक सहयोग दोनों देशों की साझेदारी का एक अनिवार्य स्तंभ है।

शिक्षा और क्षमता निर्माण

शिक्षा के क्षेत्र में भारत ने मोल्दोवा के प्रोफेशनल्स के लिए आईटीईसी ट्रेनिंग स्लॉट दोगुने करने की घोषणा की, जिसमें एआई और नई तकनीक पर विशेष पाठ्यक्रम शामिल हैं। मोल्दोवा के डिप्लोमैट्स को भारत के विदेश सेवा संस्थान में विशेष एआई और साइबर डिप्लोमेसी कोर्स में भाग लेने का निमंत्रण भी दिया गया है। उच्च शिक्षा में शैक्षणिक लेन-देन और संस्थागत साझेदारी पर भी विस्तृत चर्चा हुई।

वैश्विक मंचों पर सहयोग

अंतरराष्ट्रीय सोलर अलायंस के तहत भारत और मोल्दोवा के बीच सहयोग पहले से जारी है। राष्ट्रपति मुर्मु ने उम्मीद जताई कि मोल्दोवा कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस में भी शामिल होगा। यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक दक्षिण के देशों के साथ अपने संबंधों को सक्रिय रूप से विस्तार दे रहा है।

शांति और कूटनीति पर साझा प्रतिबद्धता

दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार साझा किए। राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा, 'हमने शांति, बातचीत और अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान के लिए अपनी साझा प्रतिबद्धता को फिर से सुनिश्चित किया।' भारत ने विवादों और तनावों को सुलझाने के लिए बातचीत और कूटनीति की वकालत करते हुए शांति के पक्ष में अपना रुख दोहराया। गौरतलब है कि मोल्दोवा एक ऐसे क्षेत्र में स्थित है जहाँ यूरोपीय सुरक्षा तनाव के बीच स्थिरता की दरकार है, जिससे भारत का यह रुख और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच इन समझौतों के क्रियान्वयन पर नज़र रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि क्या ये घोषणाएँ ठोस व्यापारिक समझौतों में बदलती हैं — दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार अभी भी बेहद सीमित है। एआई, साइबर डिप्लोमेसी और नवीकरणीय ऊर्जा पर जोर भारत की 'टेक-फर्स्ट डिप्लोमेसी' की रणनीति को दर्शाता है, जो विकासशील और मध्यम देशों के साथ संबंध बनाने का नया तरीका बन रही है। मोल्दोवा की यूरोपीय एकीकरण की महत्वाकांक्षाओं के बीच भारत का यह जुड़ाव भू-राजनीतिक संतुलन की दृष्टि से भी उल्लेखनीय है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का मोल्दोवा दौरा क्यों ऐतिहासिक है?
यह किसी भारतीय राष्ट्रपति का मोल्दोवा का पहला राजकीय दौरा है, जो तीन दशकों से अधिक पुराने द्विपक्षीय संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ता है। इस दौरे ने व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग के लिए ठोस आधार तैयार किया है।
भारत और मोल्दोवा ने किन क्षेत्रों में सहयोग पर सहमति जताई?
दोनों देशों ने कृषि, लॉजिस्टिक्स, फार्मास्यूटिकल्स, नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इनोवेशन में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। इसके अलावा व्यापार, निवेश, सप्लाई चेन और कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने पर भी सहमति हुई।
आईटीईसी ट्रेनिंग स्लॉट दोगुने करने का क्या मतलब है?
भारत ने मोल्दोवा के प्रोफेशनल्स के लिए आईटीईसी (Indian Technical and Economic Cooperation) ट्रेनिंग स्लॉट दोगुने करने की घोषणा की है, जिसमें एआई और नई तकनीक पर विशेष पाठ्यक्रम शामिल हैं। इससे मोल्दोवा के विशेषज्ञों को भारत में उन्नत तकनीकी प्रशिक्षण का अवसर मिलेगा।
मोल्दोवा को ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस में शामिल होने का निमंत्रण क्यों दिया गया?
राष्ट्रपति मुर्मु ने उम्मीद जताई कि मोल्दोवा कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस में शामिल होगा, जो भारत-नेतृत्व वाली वैश्विक पहलें हैं। यह भारत की उस रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह अपने साझेदार देशों को इन बहुपक्षीय मंचों से जोड़ना चाहता है।
इस दौरे में शांति और कूटनीति पर क्या संदेश दिया गया?
राष्ट्रपति मुर्मु ने स्पष्ट किया कि भारत हमेशा विवादों को बातचीत और कूटनीति से सुलझाने का पक्षधर रहा है। दोनों नेताओं ने शांति, बातचीत और अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई, जो यूरोपीय क्षेत्र में जारी तनावों के संदर्भ में विशेष महत्व रखती है।
राष्ट्र प्रेस
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