राष्ट्रपति मुर्मु की उत्तर मैसेडोनिया यात्रा: स्कोप्जे में दावकोवा से मुलाकात, 7 क्षेत्रों में सहयोग पर सहमति
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 22 जुलाई 2025 को स्कोप्जे स्थित विला वोड्नो में उत्तर मैसेडोनिया की राष्ट्रपति गोर्डाना सिल्यानोव्स्का-दावकोवा से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊँचाई देने पर व्यापक चर्चा की। यह किसी भारतीय राष्ट्रपति की उत्तर मैसेडोनिया की पहली राजकीय यात्रा है, जो दोनों देशों के राजनयिक इतिहास में एक ऐतिहासिक पड़ाव है।
मुख्य घटनाक्रम
राष्ट्रपति मुर्मु का विला वोड्नो में औपचारिक स्वागत किया गया और उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। राष्ट्रपति सचिवालय ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर बताया कि दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय सहयोग के सभी अहम पहलुओं पर विचार-विमर्श किया और क्षेत्रीय व वैश्विक मुद्दों पर अपने दृष्टिकोण साझा किए।
यह यात्रा राष्ट्रपति मुर्मु के तीन देशों के दौरे का दूसरा चरण है। इससे पहले उन्होंने मोल्दोवा की यात्रा सफलतापूर्वक पूरी की थी।
सहयोग के प्रमुख क्षेत्र
दोनों राष्ट्राध्यक्षों के बीच हुई वार्ता में अर्थव्यवस्था, शिक्षा, विज्ञान, संस्कृति, पर्यटन, स्वास्थ्य सेवाओं और डिजिटल परिवर्तन — इन सात क्षेत्रों में साझेदारी के नए अवसरों पर विशेष ज़ोर दिया गया। दोनों नेताओं ने साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और परस्पर सम्मान पर आधारित संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
दावकोवा का बयान
राष्ट्रपति दावकोवा ने एक्स पर लिखा, 'हमारे देश की आधिकारिक यात्रा पर आईं भारत की पहली राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का स्वागत करना मेरे लिए बड़े सम्मान की बात है। हमने मैसेडोनिया और भारत के रिश्तों पर चर्चा की, जिसमें अर्थव्यवस्था, शिक्षा, विज्ञान, संस्कृति, पर्यटन, स्वास्थ्य सेवाओं और डिजिटल बदलाव के क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर खास ध्यान दिया गया।'
उन्होंने आगे कहा, 'संत मदर टेरेसा की साझा मानवीय विरासत और गुटनिरपेक्ष आंदोलन का अनुभव हमारे रिश्तों के नए दौर के लिए मजबूत आधार प्रदान करता है।' यह उल्लेख कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और ऐतिहासिक जुड़ाव को रेखांकित करता है।
ऐतिहासिक संदर्भ
गौरतलब है कि भारत और उत्तर मैसेडोनिया के बीच राजनयिक संबंध दशकों पुराने हैं, लेकिन राष्ट्राध्यक्ष स्तर की यात्रा अब तक नहीं हुई थी। यह ऐसे समय में आया है जब भारत यूरोप के छोटे और उभरते देशों के साथ अपनी कूटनीतिक पहुँच को व्यापक बना रहा है। गुटनिरपेक्ष आंदोलन की साझा विरासत और मदर टेरेसा जैसे प्रतीक दोनों देशों के बीच जन-जन के स्तर पर जुड़ाव की नींव रखते हैं।
आगे की राह
दोनों नेताओं की इस मुलाकात से भारत-उत्तर मैसेडोनिया संबंधों में एक नई गति आने की उम्मीद है। राष्ट्रपति मुर्मु अपने तीन देशों के दौरे के अगले चरण में रवाना होंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस यात्रा से व्यापार और डिजिटल क्षेत्र में ठोस समझौतों का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।