राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का उत्तरी मैसेडोनिया दौरा: व्यापार दोगुना करने और B2B सहयोग पर बनी सहमति
सारांश
मुख्य बातें
भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 22 जुलाई 2025 को स्कोप्जे में उत्तरी मैसेडोनिया की राष्ट्रपति गोर्दाना सिलियानोव्स्का-दावकोवा के साथ द्विपक्षीय वार्ता की और संयुक्त प्रेस संबोधन में दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) सहयोग को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई। राष्ट्रपति मुर्मु ने इस यात्रा को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह किसी भारतीय राष्ट्रपति की उत्तरी मैसेडोनिया की पहली आधिकारिक यात्रा है।
मुख्य घोषणाएँ और सहमति के बिंदु
राष्ट्रपति मुर्मु ने स्पष्ट किया कि दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का निर्णय लिया है। उन्होंने आर्थिक सहयोग को भारत-उत्तरी मैसेडोनिया संबंधों का 'महत्वपूर्ण स्तंभ' करार दिया। वार्ता में कृषि, औषधि, वस्त्र, पर्यटन, सूचना प्रौद्योगिकी, खाद्य प्रसंस्करण, आतिथ्य और फिल्म निर्माण सहित कई क्षेत्रों में सहयोग विस्तार पर विस्तृत चर्चा हुई।
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा, 'हमने साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और पारस्परिक सम्मान पर आधारित अपनी घनिष्ठ मित्रता की पुष्टि की। आर्थिक सहयोग भारत-उत्तर मैसेडोनिया संबंधों का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।'
बिजनेस फोरम और व्यावसायिक अवसर
इसी दिन आयोजित बिजनेस फोरम को राष्ट्रपति मुर्मु ने दोनों देशों के व्यापारिक समुदायों के बीच सहयोग बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण मंच बताया। यह मंच उन क्षेत्रों में निवेश संवाद को गति देने के लिए तैयार किया गया जिन पर वार्ता में सहमति बनी। गौरतलब है कि भारत और उत्तरी मैसेडोनिया के बीच राजनयिक संबंध स्थापित होने के बाद से यह दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को संस्थागत ढाँचा देने की दिशा में एक उल्लेखनीय कदम है।
सांस्कृतिक और जन-संपर्क पहल
राष्ट्रपति मुर्मु ने दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और जन-से-जन संपर्कों की सराहना की। उन्होंने क्रिएटिव इंडस्ट्री — जिसमें फिल्म निर्माण और रचनात्मक उद्योग शामिल हैं — को सांस्कृतिक आदान-प्रदान के एक सशक्त माध्यम के रूप में रेखांकित किया। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी सॉफ्ट पावर को मध्य और दक्षिण-पूर्व यूरोप में विस्तारित करने की रणनीति पर काम कर रहा है।
वैश्विक पहलों में उत्तरी मैसेडोनिया की भागीदारी
राष्ट्रपति मुर्मु ने भारत की तीन प्रमुख वैश्विक पहलों — इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA), कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर (CDRI) और ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस — का उल्लेख किया और उत्तरी मैसेडोनिया की इन पहलों में शामिल होने की इच्छा का स्वागत किया। ये पहलें सतत विकास और जलवायु लचीलेपन के लक्ष्यों से जुड़ी हैं, जिन पर दोनों देशों के बीच साझा दृष्टिकोण उभरा है।
आगे की राह
यह यात्रा भारत-उत्तरी मैसेडोनिया संबंधों में एक नई नींव रखती है। दोनों पक्षों के बीच बनी सहमतियों को मूर्त रूप देने के लिए आने वाले महीनों में क्षेत्रवार कार्ययोजनाएँ तैयार होने की उम्मीद है। व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य तभी साकार होगा जब दोनों देश निवेश बाधाओं को दूर करने और B2B नेटवर्क को मजबूत करने पर ठोस कदम उठाएँगे।