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राष्ट्रपति मुर्मु ने बुखारेस्ट में भारत-रोमानिया व्यापार मंच को संबोधित किया, इंडिया-EU FTA के शीघ्र क्रियान्वयन पर दिया जोर

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राष्ट्रपति मुर्मु ने बुखारेस्ट में भारत-रोमानिया व्यापार मंच को संबोधित किया, इंडिया-EU FTA के शीघ्र क्रियान्वयन पर दिया जोर

सारांश

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बुखारेस्ट में रोमानिया के राष्ट्रपति निकुसोर डैन की मौजूदगी में भारत-रोमानिया व्यापार मंच को संबोधित किया। लगभग $25 ट्रिलियन की संयुक्त अर्थव्यवस्था वाले भारत-EU FTA को जल्द लागू करने की वकालत करते हुए उन्होंने IT, ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स और फार्मा में सहयोग के नए द्वार खोलने का आह्वान किया।

मुख्य बातें

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 24 जुलाई 2026 को बुखारेस्ट में भारत-रोमानिया व्यापार मंच को संबोधित किया।
रोमानिया के राष्ट्रपति निकुसोर डैन सहित दोनों देशों के प्रमुख उद्योगपति और सरकारी प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
भारत-EU FTA लगभग दो अरब लोगों के बाज़ार और $25 ट्रिलियन की संयुक्त अर्थव्यवस्था को एकजुट करेगा।
राष्ट्रपति ने IT, साइबर-सिक्योरिटी, ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, फार्मा और कृषि में द्विपक्षीय सहयोग के अवसर रेखांकित किए।
'विकसित भारत 2047' के तहत भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को अंतरराष्ट्रीय निवेश से जोड़ा।
PLI योजना और सरलीकृत कर व्यवस्था को निवेशकों के अनुकूल माहौल के प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 24 जुलाई 2026 को बुखारेस्ट में आयोजित भारत-रोमानिया व्यापार मंच को संबोधित करते हुए भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के शीघ्र और प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता पर बल दिया। इस मंच पर रोमानिया के राष्ट्रपति निकुसोर डैन, रोमानिया सरकार के सदस्य, तथा दोनों देशों के प्रमुख उद्योगपति और उद्योग संघों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

रोमानिया को बताया यूरोप का स्वाभाविक प्रवेश द्वार

राष्ट्रपति मुर्मु ने अपने संबोधन में कहा कि रोमानिया यूरोप के प्रमुख संपर्क बिंदु पर स्थित होने के कारण — अपनी रणनीतिक भौगोलिक स्थिति, कुशल मानव संसाधन, उन्नत औद्योगिक क्षमता और यूरोपीय संघ (EU) के साथ सुदृढ़ एकीकरण के चलते — भारत का एक स्वाभाविक और महत्त्वपूर्ण साझेदार है। उन्होंने रोमानिया को न केवल निवेश के लिए एक महत्वपूर्ण गंतव्य, बल्कि वृहत्तर यूरोपीय बाज़ार का प्रवेश द्वार भी बताया।

उन्होंने कहा कि इस मंच पर भारतीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल की बड़ी संख्या में भागीदारी रोमानिया में विद्यमान अवसरों के प्रति भारतीय उद्योगों के बढ़ते विश्वास और रोमानियाई व्यवसायों के साथ स्थायी साझेदारी बनाने की उनकी इच्छाशक्ति को दर्शाती है।

भारत-EU FTA: लगभग $25 ट्रिलियन की संयुक्त अर्थव्यवस्था

राष्ट्रपति ने कहा कि व्यापार और आर्थिक सहयोग भारत-EU समकालीन साझेदारी का प्रमुख आधार हैं। लगभग दो अरब लोगों के संयुक्त बाज़ार और लगभग $25 ट्रिलियन की संयुक्त अर्थव्यवस्था के साथ, भारत-EU मुक्त व्यापार समझौता (FTA) दुनिया की सबसे महत्त्वपूर्ण आर्थिक साझेदारियों में से एक बनने की क्षमता रखता है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि इस FTA का उद्देश्य व्यापारिक एकीकरण को गहरा करना, निवेश प्रवाह में तेजी लाना और सशक्त एवं विविधतापूर्ण आपूर्ति शृंखलाओं का निर्माण करना है। मुर्मु ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि FTA का शीघ्र और प्रभावी क्रियान्वयन एक विश्वसनीय कारोबारी परिवेश तैयार करेगा, मूल्य शृंखलाओं का एकीकरण मजबूत करेगा तथा दोनों पक्षों के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME), स्टार्टअप और नवाचारकर्ताओं के लिए नए द्वार खोलेगा।

सहयोग के प्रमुख क्षेत्र

राष्ट्रपति मुर्मु ने दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावनाओं वाले कई क्षेत्रों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा और ग्रीन ट्रांजिशन में सहयोग की व्यापक गुंजाइश है। रसायन और उर्वरक उद्योग में रोमानिया की क्षमताओं को देखते हुए इस क्षेत्र में भी साझा कार्य संभव है।

उन्होंने कहा कि भारत का विश्व-स्तर पर मान्यता प्राप्त डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, तेजी से बढ़ता स्टार्टअप इकोसिस्टम और सूचना प्रौद्योगिकी में नेतृत्व, सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग, साइबर-सिक्योरिटी, रिसर्च और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी में रोमानिया की विशेषज्ञता के साथ मिलकर काम कर सकता है। इसके अलावा, परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स — जिसमें पोर्ट, रेलवे, हाईवे, लॉजिस्टिक्स पार्क और मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट शामिल हैं — तथा फार्मास्यूटिकल्स, हेल्थकेयर, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण में भी सहयोग को मजबूत किया जा सकता है।

विकसित भारत 2047 और निवेश अवसर

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। 'विकसित भारत 2047' का संकल्प — स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने तक भारत को एक विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य — अंतरराष्ट्रीय साझेदारी, निवेश और प्रौद्योगिकी सहयोग के व्यापक अवसर प्रदान कर रहा है। भारत कर व्यवस्था को सरल बनाकर और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) जैसी पहलों के माध्यम से पारदर्शी, विश्वसनीय और निवेशकों के अनुकूल कारोबारी वातावरण तैयार करने में जुटा है।

आगे की राह

राष्ट्रपति मुर्मु ने विश्वास जताया कि दोनों देशों के कारोबारी समुदाय इन नए अवसरों का लाभ उठाते हुए उन्हें सफल वाणिज्यिक साझेदारियों में बदलेंगे। उन्होंने रोमानियाई कंपनियों से भारत की विकास यात्रा में सक्रिय रूप से शामिल होने का आग्रह किया और कहा कि दोनों देशों के व्यवसाय मिलकर सुदृढ़ आपूर्ति शृंखलाएं बना सकते हैं, रोजगार पैदा कर सकते हैं, नवाचार को बढ़ावा दे सकते हैं और दोनों देशों के नागरिकों के लिए दीर्घकालिक समृद्धि सुनिश्चित कर सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

भारत-EU FTA की बातचीत वर्षों से चल रही है और इसे अंतिम रूप देने में कई संवेदनशील क्षेत्रों — जैसे कृषि, डेटा प्रवाह और श्रम गतिशीलता — पर गहरे मतभेद बाधा बनते रहे हैं। 'शीघ्र क्रियान्वयन' का आह्वान तब तक आकांक्षा ही रहेगा, जब तक दोनों पक्ष इन विवादित बिंदुओं पर ठोस सहमति नहीं बना लेते।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-रोमानिया व्यापार मंच क्या है और यह कब हुआ?
यह एक द्विपक्षीय व्यापार कार्यक्रम था जो 24 जुलाई 2026 को बुखारेस्ट में आयोजित हुआ। इसमें दोनों देशों के राष्ट्रपतियों, सरकारी प्रतिनिधियों और उद्योगपतियों ने भाग लिया।
राष्ट्रपति मुर्मु ने भारत-EU FTA पर क्या कहा?
राष्ट्रपति मुर्मु ने भारत-EU FTA के शीघ्र और प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह समझौता लगभग दो अरब लोगों के बाज़ार और $25 ट्रिलियन की संयुक्त अर्थव्यवस्था को जोड़ेगा, जिससे MSME, स्टार्टअप और नवाचारकर्ताओं को नए अवसर मिलेंगे।
भारत और रोमानिया के बीच किन क्षेत्रों में सहयोग की संभावना है?
राष्ट्रपति मुर्मु ने IT, साइबर-सिक्योरिटी, ऊर्जा सुरक्षा, ग्रीन ट्रांजिशन, रसायन एवं उर्वरक, परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स, फार्मास्यूटिकल्स, हेल्थकेयर, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण को प्रमुख सहयोग क्षेत्रों के रूप में रेखांकित किया।
'विकसित भारत 2047' का इस व्यापार मंच से क्या संबंध है?
'विकसित भारत 2047' भारत सरकार का वह संकल्प है जिसके तहत स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाना है। राष्ट्रपति मुर्मु ने इस लक्ष्य को रोमानिया सहित यूरोपीय निवेश और प्रौद्योगिकी सहयोग के अवसर के रूप में प्रस्तुत किया।
रोमानिया को भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण बताया गया?
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि रोमानिया यूरोप के प्रमुख संपर्क बिंदु पर स्थित है, उसके पास कुशल मानव संसाधन और उन्नत औद्योगिक क्षमता है, और वह EU के साथ सुदृढ़ रूप से एकीकृत है। इसलिए वह न केवल निवेश गंतव्य है, बल्कि वृहत्तर यूरोपीय बाज़ार का प्रवेश द्वार भी है।
राष्ट्र प्रेस
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