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राष्ट्रपति मुर्मु की रोमानिया यात्रा: रक्षा, व्यापार और डिजिटल तकनीक में सहयोग का नया अध्याय

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राष्ट्रपति मुर्मु की रोमानिया यात्रा: रक्षा, व्यापार और डिजिटल तकनीक में सहयोग का नया अध्याय

सारांश

तीन दशकों के अंतराल के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की रोमानिया यात्रा महज़ प्रतीकात्मक नहीं है — यह रक्षा, डिजिटल तकनीक और ऊर्जा में ठोस साझेदारी की नींव है। दोनों देशों ने ३-५ वर्षों में व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य रखा है और ड्रोन तकनीक से लेकर महत्वपूर्ण खनिजों तक संयुक्त सहयोग का रास्ता खोला है।

मुख्य बातें

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 24 जुलाई को रोमानिया पहुँचीं — 1994 के बाद किसी भारतीय राष्ट्रपति की पहली राजकीय यात्रा।
यह मोल्दोवा और उत्तर मैसेडोनिया के बाद उनकी तीन देशों की यात्रा का अंतिम पड़ाव था।
दोनों देशों ने अगले तीन से पाँच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य तय किया।
रक्षा उत्पादन, ड्रोन तकनीक , समुद्री सुरक्षा और साइबर सुरक्षा में संयुक्त सहयोग पर सहमति।
भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते के बाद व्यापार में और तेज़ी आने की उम्मीद जताई गई।
विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने विशेष ब्रीफिंग में यात्रा का विवरण साझा किया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की तीन देशों की यात्रा के अंतिम पड़ाव रोमानिया में 24 जुलाई को भारत और रोमानिया ने रक्षा, व्यापार, डिजिटल तकनीक, नवीकरणीय ऊर्जा और शिक्षा सहित कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को नई ऊँचाई देने का संकल्प लिया। विदेश मंत्रालय (MEA) की विशेष ब्रीफिंग में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने बताया कि दोनों देशों ने अगले तीन से पाँच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

तीन दशक बाद ऐतिहासिक राजकीय यात्रा

सचिव सिबी जॉर्ज ने स्पष्ट किया कि 1994 के बाद यह पहली बार है जब किसी भारतीय राष्ट्रपति ने रोमानिया की राजकीय यात्रा की है — यानी तीन दशकों से भी अधिक के अंतराल के बाद। रोमानिया के राष्ट्रपति निकुसोर डैन के निमंत्रण पर राष्ट्रपति मुर्मु यहाँ पहुँचीं। इससे पहले वे मोल्दोवा और उत्तर मैसेडोनिया की यात्रा कर चुकी थीं।

गुरुवार शाम रोमानिया के राष्ट्रपति ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति मुर्मु का राजकीय सम्मान के साथ स्वागत किया। इसके बाद दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों के साथ विस्तृत वार्ता हुई।

व्यापार और निवेश: दोगुना करने का संकल्प

दोनों राष्ट्रपतियों ने भरोसा जताया कि भारत और रोमानिया के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है और भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते के लागू होने के बाद इसमें और तेज़ी आएगी। दोनों पक्षों ने अगले तीन से पाँच वर्षों में आपसी व्यापार को दोगुना करने के लिए मिलकर काम करने पर सहमति जताई। यह ऐसे समय में आया है जब भारत-EU व्यापार वार्ता एक निर्णायक दौर में है।

रक्षा सहयोग: नई पीढ़ी की तकनीक तक साझेदारी

सचिव जॉर्ज ने बताया कि रक्षा सहयोग दोनों देशों की साझेदारी का एक अहम स्तंभ बनकर उभर रहा है। इस वर्ष मई में हुई रक्षा सहयोग संयुक्त समिति की बैठक को दोनों पक्षों ने एक सकारात्मक कदम बताया। रक्षा उत्पादन, औद्योगिक सहयोग, समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और नई पीढ़ी की ड्रोन तकनीक में संयुक्त विकास एवं उत्पादन की संभावनाएँ तलाशी जा रही हैं।

गौरतलब है कि कई भारतीय कंपनियाँ रोमानिया में नागरिक और रक्षा विमानन क्षेत्र में संयुक्त उद्यम के अवसर खोज रही हैं, जो इस साझेदारी को महज़ कूटनीतिक औपचारिकता से आगे ले जाती है।

बहुक्षेत्रीय सहयोग की व्यापक रूपरेखा

दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों के बीच हुई बैठकों में नवीकरणीय ऊर्जा, आईटी, महत्वपूर्ण खनिज, उर्वरक, दवा एवं स्वास्थ्य सेवा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, खेल, संस्कृति और लोगों की आवाजाही जैसे विविध क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की गई। सचिव जॉर्ज ने यह भी रेखांकित किया कि यह यात्रा यूरोपीय संघ के साथ भारत के समग्र जुड़ाव और बहुपक्षीय सहयोग को भी मज़बूती देती है।

आगे क्या होगा

यह यात्रा भारत-रोमानिया संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है। दोनों देशों के बीच तय किए गए लक्ष्यों को मूर्त रूप देने के लिए आने वाले महीनों में क्षेत्रवार कार्य-योजनाओं पर काम होने की उम्मीद है। भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते की प्रगति इस साझेदारी की गति तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी घोषणाओं से परे है। व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य तब तक कागज़ी रहेगा जब तक भारत-EU FTA की वार्ता किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुँचती — जो वर्षों से लंबित है। रक्षा क्षेत्र में ड्रोन और विमानन में संयुक्त उत्पादन की संभावना उत्साहजनक है, पर मई की संयुक्त समिति बैठक के बाद से कोई ठोस अनुबंध सामने नहीं आया। मध्य और पूर्वी यूरोप में भारत की कूटनीतिक उपस्थिति बढ़ाने की दृष्टि से यह यात्रा सही दिशा में है, बशर्ते अनुवर्ती कार्रवाई उतनी ही सक्रिय हो।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की रोमानिया यात्रा क्यों महत्वपूर्ण है?
यह 1994 के बाद किसी भारतीय राष्ट्रपति की पहली रोमानिया राजकीय यात्रा है, यानी तीन दशकों से भी अधिक के अंतराल के बाद। यह यात्रा भारत-रोमानिया संबंधों को नई गति देने के साथ-साथ यूरोपीय संघ के साथ भारत के व्यापक जुड़ाव को भी मज़बूत करती है।
भारत और रोमानिया ने व्यापार को लेकर क्या लक्ष्य तय किया है?
दोनों देशों ने अगले तीन से पाँच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करने पर सहमति जताई है। भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते के लागू होने के बाद इस लक्ष्य को हासिल करना और आसान होगा, ऐसा दोनों पक्षों का मानना है।
भारत-रोमानिया रक्षा सहयोग में क्या नया है?
इस वर्ष मई में दोनों देशों की रक्षा सहयोग संयुक्त समिति की बैठक हुई थी। अब रक्षा उत्पादन, नागरिक एवं रक्षा विमानन, नई पीढ़ी की ड्रोन तकनीक , समुद्री सुरक्षा और साइबर सुरक्षा में संयुक्त विकास एवं उत्पादन की संभावनाएँ तलाशी जा रही हैं।
राष्ट्रपति मुर्मु की तीन देशों की यात्रा में कौन-से देश शामिल थे?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने क्रमशः मोल्दोवा , उत्तर मैसेडोनिया और रोमानिया की यात्रा की। रोमानिया इस तीन देशों की यात्रा का तीसरा और अंतिम पड़ाव था।
भारत और रोमानिया के बीच किन-किन क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा हुई?
दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने व्यापार एवं निवेश, रक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल तकनीक, आईटी, महत्वपूर्ण खनिज, उर्वरक, दवा एवं स्वास्थ्य सेवा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, शिक्षा, खेल, संस्कृति और लोगों की आवाजाही जैसे विविध क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की और आगे की योजनाओं पर चर्चा की।
राष्ट्र प्रेस
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