राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु बुखारेस्ट में बोलीं — 'भारत-रोमानिया संबंधों की नींव लोगों के आत्मीय रिश्ते हैं'
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 25 जुलाई 2026 को बुखारेस्ट में भारतीय प्रवासी समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि भारत-रोमानिया संबंधों की सबसे मज़बूत नींव दोनों देशों के लोगों के बीच के आत्मीय रिश्ते हैं। यह संबोधन उनके तीन देशों के यूरोपीय दौरे के अंतिम चरण में हुआ, जब वे रोमानिया की राजधानी बुखारेस्ट में थीं।
भारतीय समुदाय को संबोधन
राष्ट्रपति मुर्मु ने भारतीय प्रवासियों से कहा, 'मुझे यह देखकर प्रसन्नता होती है कि भारत की कंपनियाँ और भारतीय पेशेवर रोमानिया के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। इसके साथ ही हमारे दोनों देशों के बीच सहयोग के नए अवसर भी खुल रहे हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि जब वे समारोह स्थल पर पहुँचीं तो बच्चों और युवतियों को भारतीय परिधान में सजा देखकर उन्हें लगा जैसे वे भारत के किसी कार्यक्रम में आई हों, रोमानिया में नहीं।
राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय आईटी इंजीनियर, शोधकर्ता, स्वास्थ्य पेशेवर और विद्यार्थियों की नई पीढ़ी रोमानिया को अपना घर बना रही है। उन्होंने प्रवासी भारतीयों को 'भारत का सच्चा प्रतिनिधि' बताते हुए रोमानिया सरकार और वहाँ की जनता का भी आभार व्यक्त किया, जिन्होंने भारतीयों का खुले मन से स्वागत किया है।
विकसित भारत 2047 का आह्वान
राष्ट्रपति मुर्मु ने प्रवासी भारतीयों से 'विकसित भारत 2047' के संकल्प में सक्रिय भागीदारी निभाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, 'आप विश्व के किसी भी भाग में रहते हों, आपका अनुभव, विश्वसनीयता और उपलब्धियाँ भारत की प्रगति को नई शक्ति देती हैं और विभिन्न देशों के साथ हमारे संबंधों को और अधिक सुदृढ़ बनाती हैं।' उनका यह आह्वान भारत सरकार की उस व्यापक नीति का हिस्सा है जिसके तहत डायस्पोरा को राष्ट्र-निर्माण में भागीदार बनाया जा रहा है।
बुखारेस्ट विश्वविद्यालय ने दी मानद डॉक्टरेट
इससे एक दिन पहले, शुक्रवार को बुखारेस्ट यूनिवर्सिटी ऑफ इकोनॉमिक स्टडीज ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने बुखारेस्ट विश्वविद्यालय और रोमानिया के अन्य शैक्षणिक संस्थानों से संयुक्त शोध, शिक्षक एवं छात्र आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की अपील की।
गौरतलब है कि यह सम्मान भारत और रोमानिया के बीच शैक्षणिक सहयोग को औपचारिक स्वीकृति का प्रतीक है, और ऐसे समय में आया है जब दोनों देश द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊँचाई देने की दिशा में काम कर रहे हैं।
शिक्षा और तकनीक पर राष्ट्रपति का संदेश
राष्ट्रपति मुर्मु ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल तकनीकों के तेज़ी से बदलते दौर में विश्वविद्यालयों की ज़िम्मेदारी पर ज़ोर देते हुए कहा, 'ज्ञान के साथ समझदारी, नैतिकता और इंसानियत भी जुड़ी रहनी चाहिए।' उन्होंने शिक्षा को व्यक्तिगत उन्नति का नहीं, बल्कि एक न्यायपूर्ण और समावेशी समाज की सबसे मज़बूत नींव बताया।
यह दौरा भारत की राजनयिक सक्रियता का हिस्सा है, जिसमें राष्ट्रपति मुर्मु ने यूरोप में भारतीय उपस्थिति और साझेदारी को मज़बूत करने का प्रयास किया है। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच शैक्षणिक और आर्थिक सहयोग के नए समझौतों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।