31 अगस्त 2026
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का निफ्ट दीक्षांत समारोह में संदेश: वैश्विक सोच, भारतीय जड़ें

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का निफ्ट दीक्षांत समारोह में संदेश: वैश्विक सोच, भारतीय जड़ें

सारांश

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने निफ्ट के 18 परिसरों के संयुक्त दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को दो-टूक संदेश दिया — वैश्विक बाजार को साधो, लेकिन भारतीय कारीगरों और सांस्कृतिक मूल्यों की जड़ों से कभी न कटो। पर्यावरण, सर्कुलर इकोनॉमी और विकसित भारत 2047 — तीनों को एक सूत्र में पिरोया।

मुख्य बातें

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 31 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में निफ्ट के 18 परिसरों के संयुक्त दीक्षांत समारोह को संबोधित किया।
उन्होंने कहा कि वस्त्र और परिधान क्षेत्र करोड़ों देशवासियों की आजीविका का आधार है और पारंपरिक कारीगरों को सहयोग मिलना आवश्यक है।
निफ्ट की 'क्राफ्ट क्लस्टर पहल' की सराहना की, जिसके तहत बुनकरों और कारीगरों को आधुनिक तकनीक व बाजारों से जोड़ा जा रहा है।
विद्यार्थियों से पर्यावरण अनुकूल उत्पाद बनाने और स्थानीय कच्चे माल के उपयोग पर जोर दिया।
विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में युवाओं की भूमिका को केंद्रीय बताया; सफलता को शिल्पकारों की आय वृद्धि से जोड़ा।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोमवार, 31 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (निफ्ट) के 18 परिसरों के संयुक्त दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि उनकी सोच वैश्विक हो, किंतु उनकी जड़ें अपनी मिट्टी और देश के सांस्कृतिक मूल्यों से अटूट रूप से जुड़ी रहें। राष्ट्रपति ने फैशन प्रौद्योगिकी को भारत की वैश्विक भूमिका विस्तार के लिए एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया।

वस्त्र क्षेत्र: सांस्कृतिक विरासत और आजीविका का आधार

राष्ट्रपति मुर्मु ने अपने संबोधन में रेखांकित किया कि वस्त्र और परिधान क्षेत्र केवल भारत की सांस्कृतिक विरासत का अंग नहीं, बल्कि करोड़ों देशवासियों की आजीविका का आधार भी है। उन्होंने कहा कि यदि पारंपरिक कारीगरों को उचित सहयोग और मार्गदर्शन मिले, तो उनकी आने वाली पीढ़ियाँ भी गर्व और आत्मविश्वास के साथ इस व्यवसाय से जुड़ी रह सकती हैं। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब देश में हस्तशिल्प और हथकरघा क्षेत्र के कारीगर आधुनिक बाजार की चुनौतियों से जूझ रहे हैं।

क्राफ्ट क्लस्टर पहल की सराहना

राष्ट्रपति ने यह जानकर प्रसन्नता व्यक्त की कि विभिन्न निफ्ट केंद्रों ने 'क्राफ्ट क्लस्टर पहल' जैसे कार्यक्रम लागू किए हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से संबंधित क्षेत्रों के बुनकरों और कारीगरों को वस्त्र एवं परिधान क्षेत्र की आधुनिक तकनीकों से परिचित कराया जा रहा है और उन्हें बाजारों से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि निफ्ट इस दिशा में सर्कुलर इकोनॉमी की विधाओं को व्यापक और लाभदायक बनाने के लिए प्रभावी कदम उठाएगा।

पर्यावरण अनुकूल उत्पादन पर जोर

राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि वे विश्वस्तरीय उत्पाद और ब्रांड बनाएँ, लेकिन साथ ही यह सुनिश्चित करें कि वे पर्यावरण के अनुकूल हों। उन्होंने कहा कि उत्पादों के लिए स्थानीय कच्चे माल का उपयोग पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। बचे हुए अंश को बेकार समझकर फेंकने की बजाय उसे नया रूप, नई उपयोगिता और नया मूल्य दिया जा सकता है — यह 'जीरो वेस्ट' दृष्टिकोण की ओर स्पष्ट संकेत था।

विकसित भारत 2047 और युवाओं की भूमिका

राष्ट्रपति मुर्मु ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि इसे प्राप्त करने में युवा महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने निफ्ट जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों से ऐसे समाज के निर्माण में सहयोग करने का आग्रह किया जिसमें प्रत्येक नागरिक को राष्ट्र की प्रगति में योगदान का उचित अवसर मिले। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की वास्तविक सफलता इस बात में है कि उनके प्रयासों से किसी शिल्पकार को अपने शिल्प की मूल पहचान बनाए रखते हुए अपनी उत्पादकता और आय बढ़ाने में कितनी सहायता मिलती है। यह संदेश भारत के फैशन स्नातकों को जमीनी वास्तविकताओं से जोड़ने का आह्वान था।

संपादकीय दृष्टिकोण

किंतु असली सवाल यह है कि निफ्ट स्नातक बाजार की व्यावसायिक माँगों और पारंपरिक कारीगरों के हितों के बीच संतुलन कैसे साधेंगे — जबकि दोनों की प्राथमिकताएँ अक्सर टकराती हैं। 'क्राफ्ट क्लस्टर पहल' की सराहना उचित है, परंतु इन कार्यक्रमों का पैमाना और दीर्घकालिक प्रभाव अभी सार्वजनिक रूप से सत्यापित नहीं है। सर्कुलर इकोनॉमी और जीरो वेस्ट का आह्वान तब तक नीतिगत दिशा नहीं बनता, जब तक इसे संस्थागत पाठ्यक्रम और उद्योग-नियमन से न जोड़ा जाए। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में फैशन क्षेत्र की भूमिका तभी सार्थक होगी जब स्नातकों की सफलता के मानक महज ब्रांड-निर्माण से आगे, कारीगर-समृद्धि तक विस्तृत हों।
RashtraPress
31 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने निफ्ट दीक्षांत समारोह में क्या कहा?
राष्ट्रपति मुर्मु ने 31 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में निफ्ट के 18 परिसरों के संयुक्त दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों से आह्वान किया कि उनकी सोच वैश्विक हो, किंतु जड़ें भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ी रहें। उन्होंने पर्यावरण अनुकूल उत्पादन, स्थानीय कच्चे माल के उपयोग और पारंपरिक कारीगरों के सशक्तिकरण पर भी जोर दिया।
निफ्ट की 'क्राफ्ट क्लस्टर पहल' क्या है?
यह निफ्ट के विभिन्न केंद्रों द्वारा चलाया जा रहा एक कार्यक्रम है जिसके तहत संबंधित क्षेत्रों के बुनकरों और कारीगरों को वस्त्र एवं परिधान क्षेत्र की आधुनिक तकनीकों से परिचित कराया जाता है और उन्हें बाजारों से जोड़ा जाता है। राष्ट्रपति मुर्मु ने इस पहल की विशेष सराहना की।
राष्ट्रपति ने फैशन विद्यार्थियों को पर्यावरण को लेकर क्या सलाह दी?
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि विद्यार्थियों को विश्वस्तरीय उत्पाद बनाते समय यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे पर्यावरण के अनुकूल हों। उन्होंने स्थानीय कच्चे माल के उपयोग और बचे हुए अंश को नया रूप व उपयोगिता देने पर बल दिया, जो सर्कुलर इकोनॉमी के सिद्धांत के अनुरूप है।
विकसित भारत 2047 में फैशन क्षेत्र की क्या भूमिका है?
राष्ट्रपति ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। फैशन टेक्नोलॉजी एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें वैश्विक स्तर पर भारत की भूमिका बढ़ाने की अपार संभावनाएँ हैं, और निफ्ट जैसे संस्थानों के स्नातक इस लक्ष्य में योगदान दे सकते हैं।
निफ्ट के 18 परिसरों का संयुक्त दीक्षांत समारोह कब और कहाँ हुआ?
यह संयुक्त दीक्षांत समारोह 31 अगस्त 2026, सोमवार को नई दिल्ली में आयोजित किया गया। इसमें राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (निफ्ट) के सभी 18 परिसरों के विद्यार्थी शामिल हुए और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु मुख्य अतिथि थीं।
राष्ट्र प्रेस
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