राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का निफ्ट दीक्षांत समारोह में संदेश: वैश्विक सोच, भारतीय जड़ें
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोमवार, 31 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (निफ्ट) के 18 परिसरों के संयुक्त दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि उनकी सोच वैश्विक हो, किंतु उनकी जड़ें अपनी मिट्टी और देश के सांस्कृतिक मूल्यों से अटूट रूप से जुड़ी रहें। राष्ट्रपति ने फैशन प्रौद्योगिकी को भारत की वैश्विक भूमिका विस्तार के लिए एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया।
वस्त्र क्षेत्र: सांस्कृतिक विरासत और आजीविका का आधार
राष्ट्रपति मुर्मु ने अपने संबोधन में रेखांकित किया कि वस्त्र और परिधान क्षेत्र केवल भारत की सांस्कृतिक विरासत का अंग नहीं, बल्कि करोड़ों देशवासियों की आजीविका का आधार भी है। उन्होंने कहा कि यदि पारंपरिक कारीगरों को उचित सहयोग और मार्गदर्शन मिले, तो उनकी आने वाली पीढ़ियाँ भी गर्व और आत्मविश्वास के साथ इस व्यवसाय से जुड़ी रह सकती हैं। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब देश में हस्तशिल्प और हथकरघा क्षेत्र के कारीगर आधुनिक बाजार की चुनौतियों से जूझ रहे हैं।
क्राफ्ट क्लस्टर पहल की सराहना
राष्ट्रपति ने यह जानकर प्रसन्नता व्यक्त की कि विभिन्न निफ्ट केंद्रों ने 'क्राफ्ट क्लस्टर पहल' जैसे कार्यक्रम लागू किए हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से संबंधित क्षेत्रों के बुनकरों और कारीगरों को वस्त्र एवं परिधान क्षेत्र की आधुनिक तकनीकों से परिचित कराया जा रहा है और उन्हें बाजारों से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि निफ्ट इस दिशा में सर्कुलर इकोनॉमी की विधाओं को व्यापक और लाभदायक बनाने के लिए प्रभावी कदम उठाएगा।
पर्यावरण अनुकूल उत्पादन पर जोर
राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि वे विश्वस्तरीय उत्पाद और ब्रांड बनाएँ, लेकिन साथ ही यह सुनिश्चित करें कि वे पर्यावरण के अनुकूल हों। उन्होंने कहा कि उत्पादों के लिए स्थानीय कच्चे माल का उपयोग पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। बचे हुए अंश को बेकार समझकर फेंकने की बजाय उसे नया रूप, नई उपयोगिता और नया मूल्य दिया जा सकता है — यह 'जीरो वेस्ट' दृष्टिकोण की ओर स्पष्ट संकेत था।
विकसित भारत 2047 और युवाओं की भूमिका
राष्ट्रपति मुर्मु ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि इसे प्राप्त करने में युवा महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने निफ्ट जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों से ऐसे समाज के निर्माण में सहयोग करने का आग्रह किया जिसमें प्रत्येक नागरिक को राष्ट्र की प्रगति में योगदान का उचित अवसर मिले। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की वास्तविक सफलता इस बात में है कि उनके प्रयासों से किसी शिल्पकार को अपने शिल्प की मूल पहचान बनाए रखते हुए अपनी उत्पादकता और आय बढ़ाने में कितनी सहायता मिलती है। यह संदेश भारत के फैशन स्नातकों को जमीनी वास्तविकताओं से जोड़ने का आह्वान था।