राष्ट्रपति मुर्मु का आह्वान: जनजातीय विश्वविद्यालय शिक्षा के साथ आजीविका और नेतृत्व भी गढ़े
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 30 जून 2026 को विजयनगरम स्थित आंध्र प्रदेश केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि यह संस्थान केवल डिग्री देने का केंद्र नहीं, बल्कि जनजातीय समाज में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और नीति निर्माण की दृष्टि विकसित करने का मंच बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय के उद्देश्य से स्थापित संस्थाओं की जिम्मेदारी कक्षाओं से कहीं आगे तक जाती है।
विश्वविद्यालय की विशेष जिम्मेदारियाँ
राष्ट्रपति मुर्मु ने रेखांकित किया कि जनजातीय विश्वविद्यालयों को शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, आजीविका और वनाधिकार जैसे क्षेत्रों में जमीनी स्तर पर सक्रिय भूमिका निभानी होगी। उन्होंने कहा कि ये संस्थान वंचित और जनजातीय समुदायों के युवाओं के समग्र विकास के साथ-साथ पूरे क्षेत्र की प्रगति में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। गौरतलब है कि यह विश्वविद्यालय उत्तर आंध्र प्रदेश के जनजातीय बहुल क्षेत्र में स्थित है, जहाँ शैक्षणिक और आर्थिक पिछड़ापन दशकों से एक चुनौती रहा है।
आजीविका और नवाचार पर जोर
राष्ट्रपति ने सभी विश्वविद्यालयों — विशेषकर जनजातीय विश्वविद्यालयों — से आग्रह किया कि वे ऐसे नवाचार-आधारित तंत्र विकसित करें जो जनजातीय समुदायों की आजीविका को सुदृढ़ करें। उन्होंने वन उपज, हस्तशिल्प, मिलेट्स (मोटे अनाज), औषधीय पौधों, ईको-टूरिज्म और स्थानीय उद्यमिता को रोजगार और आय के नए अवसरों के रूप में चिह्नित किया। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार मिलेट्स को वैश्विक स्तर पर प्रोत्साहित कर रही है और जनजातीय उत्पादों के लिए बाजार विस्तार की कोशिशें जारी हैं।
साइंस एंड टेक्नोलॉजी हब की स्थापना
राष्ट्रपति मुर्मु ने बताया कि विश्वविद्यालय ने उत्तर आंध्र प्रदेश के जनजातीय समुदायों को सशक्त बनाने के लिए 'साइंस एंड टेक्नोलॉजी हब' की स्थापना की है। विश्वविद्यालय जनजातीय कल्याण, सार्वजनिक स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन, खाद्य एवं पोषण सुरक्षा तथा ऊर्जा संरक्षण जैसे विषयों पर अकादमिक और जमीनी स्तर पर एक साथ काम कर रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि ये प्रयास विकसित और समतामूलक भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
विद्यार्थियों को संदेश
दीक्षांत समारोह को 'केवल उत्सव नहीं, बल्कि भविष्य के लिए संकल्प का अवसर' बताते हुए राष्ट्रपति ने छात्रों को तेजी से बदलते दौर में प्रासंगिक बने रहने के लिए कौशल विकास के नए क्षेत्रों पर ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि छात्रों को पाठ्यपुस्तकों से आगे बढ़कर अपने परिवेश से व्यावहारिक कौशल सीखना चाहिए और अपनी संस्कृति, परंपराओं तथा समुदाय से जुड़े रहते हुए राष्ट्र निर्माण में भागीदार बनना चाहिए।
समारोह में उपस्थित गणमान्य
इस अवसर पर आंध्र प्रदेश के राज्यपाल एस. अब्दुल नजीर, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और राज्य के मानव संसाधन विकास एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री नारा लोकेश भी उपस्थित रहे। इन वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति इस बात का संकेत है कि केंद्र और राज्य दोनों सरकारें जनजातीय उच्च शिक्षा को नीतिगत प्राथमिकता दे रही हैं। आने वाले वर्षों में यह विश्वविद्यालय किस हद तक इन अपेक्षाओं पर खरा उतरता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।