धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का युवाओं को संदेश: रील्स से आगे देखें, राष्ट्र और संस्कृति को न भूलें
सारांश
मुख्य बातें
बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने 15 अगस्त 2026 को छतरपुर स्थित सनातन वैदिक गुरुकुलम में तिरंगा फहराकर युवा पीढ़ी को सोशल मीडिया की 'रील्स' से परे वास्तविक जीवन, संस्कार और राष्ट्र के प्रति दायित्वों पर ध्यान देने की अपील की। स्वतंत्रता दिवस के इस समारोह में गुरुकुलम के छात्रों, ब्राह्मणों और आचार्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
गुरुकुलम में ध्वजारोहण और राष्ट्रभक्ति का माहौल
बागेश्वर धाम के सनातन वैदिक गुरुकुलम में 15 अगस्त को राष्ट्रीय ध्वज फहराने के साथ स्वतंत्रता दिवस समारोह का आरंभ हुआ। शास्त्री ने कहा कि गुरुकुलम में भगवान राम के प्रति आस्था रखने वाले छात्र और आचार्य देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत हैं। ध्वजारोहण के बाद राष्ट्रगान हुआ, जिसमें समस्त उपस्थितजनों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया।
लाल किले पर 'वंदे मातरम' को बताया अभूतपूर्व क्षण
पंडित शास्त्री ने लाल किले पर आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में 'वंदे मातरम' गाए जाने को देश के लिए एक अभूतपूर्व क्षण बताया। उन्होंने कहा कि इस बार का समारोह विशेष रूप से भारत के भविष्य अर्थात् 'जेन ज़ेड' पर केंद्रित रहा। उन्होंने प्रधानमंत्री के संदेश की सराहना करते हुए कहा कि देश को ऐसे नेतृत्व पर गर्व है जो देशहित की बात करता है।
युवाओं को रील्स से परे देखने की अपील
शास्त्री ने युवाओं को स्पष्ट संदेश दिया कि सोशल मीडिया पर 'रील्स' देखना और बनाना आज की वास्तविकता है, परंतु इसके साथ-साथ वास्तविक जीवन, सांस्कृतिक संस्कार और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारियों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस दौर में तकनीकी प्रगति अनिवार्य है, लेकिन मनुष्य को अपनी संवेदनाओं और मानवीय मूल्यों को नहीं भूलना चाहिए।
विकास के साथ मानवीय मूल्यों को बनाए रखने पर जोर
पंडित शास्त्री ने कहा कि आधुनिक दौर की तेज़ रफ़्तार के साथ विकास ज़रूरी है, किंतु विकास की इस दौड़ में मानवीय मूल्यों, सांस्कृतिक विरासत और देशभक्ति की भावना को बनाए रखना उतना ही महत्वपूर्ण है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव और युवाओं के डिजिटल व्यवहार को लेकर व्यापक सामाजिक बहस जारी है। गौरतलब है कि इस तरह के धार्मिक-सांस्कृतिक मंचों से युवाओं को संबोधित करने की प्रवृत्ति हाल के वर्षों में तेज़ी से बढ़ी है।
समारोह का समापन
बागेश्वर धाम में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह देश की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक जागरूकता के संदेश के साथ संपन्न हुआ। शास्त्री ने यह भी रेखांकित किया कि युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति के प्रति जागरूक रहना चाहिए, ताकि आने वाले समय में भारत की पहचान और मज़बूत हो सके।