स्वतंत्रता दिवस 2026: PM मोदी ने राजघाट पर बापू को नमन, 'विकसित भारत' के संकल्प को दोहराया
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2026 को राजघाट पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित कर स्वतंत्रता दिवस की शुरुआत की। उन्होंने इस अवसर पर स्पष्ट किया कि भारत सदैव गांधीजी के विचारों और कार्यों से प्रेरणा ग्रहण करता रहेगा और हर भारतीय की प्रगति के लिए अथक प्रयास जारी रहेगा।
राजघाट पर श्रद्धांजलि
राजघाट पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा, 'आज सुबह राजघाट पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। हम हमेशा उनके विचारों और कार्यों से प्रेरणा लेते रहेंगे। हम हर भारतीय की तरक्की के लिए और अपने देश को प्रगतिशील व समृद्ध बनाने के लिए काम करते रहेंगे।' यह पोस्ट लाल किले पर ध्वजारोहण से पूर्व की गई।
तिरंगे को समर्पित संदेश
एक अन्य एक्स पोस्ट में मोदी ने राष्ट्रध्वज को 140 करोड़ भारतीयों के गर्व का प्रतीक बताया। उन्होंने लिखा, 'तिरंगा 140 करोड़ भारतीयों के गर्व के साथ लहराता है! इसमें अनगिनत बलिदानों की भावना और भारत के असीम भविष्य का वादा समाहित है। तिरंगा हमें हमेशा 'विकसित भारत' के हमारे साझा विज़न को साकार करने के लिए प्रेरित करता रहे।' यह संदेश 'विकसित भारत' के उस व्यापक लक्ष्य की याद दिलाता है जिसे मोदी सरकार अपने तीसरे कार्यकाल का केंद्रीय एजेंडा मानती है।
स्वतंत्रता सेनानियों को कृतज्ञ स्मरण
स्वतंत्रता दिवस की सुबह प्रधानमंत्री ने देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए उन अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों को याद किया जिनके साहस और बलिदान ने औपनिवेशिक शासन का अंत सुनिश्चित किया। उन्होंने कहा, 'उनके सपने हमें प्रेरित करते रहेंगे क्योंकि हम एक विकसित भारत के निर्माण के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।' गौरतलब है कि इस वर्ष पहली बार लाल किले पर राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम का गायन किया गया — जो इस समारोह में एक ऐतिहासिक जोड़ रहा।
लाल किले से राष्ट्र को संबोधन
ध्वजारोहण के पश्चात प्रधानमंत्री ने लाल किले की प्राचीर से देशवासियों को संबोधित करते हुए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। मोदी ने अपने संबोधन में कहा, '140 करोड़ भारतीयों द्वारा संचालित, हमारा देश विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति की नई ऊंचाइयों को छू रहा है।' उन्होंने आह्वान किया कि देशवासी स्वतंत्रता सेनानियों के आदर्शों को अपनाकर विकसित भारत के संकल्प को साकार करें। यह संबोधन उनके तीसरे कार्यकाल की नीतिगत दिशा का प्रतिबिंब माना जा रहा है, जिसमें विकास और राष्ट्रीय गौरव दोनों को केंद्र में रखा गया है।