रजरप्पा मंदिर विकास: झारखंड हाई कोर्ट का सख्त रुख, 5 अक्टूबर को पर्यटन सचिव और रामगढ़ DC को सशरीर तलब
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड हाई कोर्ट ने मंगलवार, 29 सितंबर 2026 को रामगढ़ जिले के रजरप्पा स्थित प्रसिद्ध मां छिन्नमस्तिका मंदिर के जीर्णोद्धार और बुनियादी सुविधाओं के विकास से जुड़े अवमानना मामले में झारखंड सरकार के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई। पिछली सुनवाई में दिए गए स्पष्ट निर्देश के बावजूद पर्यटन विभाग के सचिव की अनुपस्थिति पर अदालत ने अगली तारीख 5 अक्टूबर 2026 को पर्यटन सचिव और रामगढ़ के उपायुक्त को सशरीर उपस्थित होने का आदेश दिया है।
क्या है पूरा मामला
यह मामला संजीव कुमार सिंह की ओर से दायर अवमानना याचिका से संबंधित है। याचिका में रजरप्पा मंदिर परिसर के विकास, सौंदर्यीकरण, बुनियादी नागरिक सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े पूर्व के न्यायिक निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित कराने की माँग की गई है। अप्रैल 2026 की सुनवाई में अदालत ने मंदिर क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने और प्रभावित दुकानदारों के पुनर्वास की व्यवस्था करने का निर्देश दिया था। साथ ही श्रद्धालुओं की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया गया था और राज्य सरकार व सीसीएल (Central Coalfields Limited) से जवाब माँगा गया था।
सरकार के बदलते रुख पर अदालत के सवाल
इस मामले में राज्य सरकार के बदलते वित्तीय रुख पर अदालत पहले भी आपत्ति दर्ज करा चुकी है। पहले राज्य संसाधनों से राशि जुटाने और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) के लिए एक कंसल्टेंट नियुक्त करने की बात कही गई थी। बाद में केंद्र सरकार की 'प्रसाद' योजना से वित्तीय सहायता लेने का विकल्प सामने आया। अदालत ने इस परिवर्तन पर तीखा सवाल उठाया कि यदि केंद्रीय योजना से राशि लेने का इरादा था, तो यह जानकारी पहले क्यों नहीं दी गई।
29 सितंबर की सुनवाई में क्या हुआ
मंगलवार की सुनवाई में राज्य सरकार ने डीएमएफटी (जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट) फंड से मंदिर के पुनरुद्धार के लिए राशि लेने का प्रस्ताव रखा। इस पर अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार दोनों को 5 अक्टूबर की अगली सुनवाई में डीएमएफटी फंड से जुड़ी पूरी योजना का ब्यौरा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। पर्यटन सचिव की अनुपस्थिति को लेकर सरकार की ओर से स्पष्टीकरण दिया गया कि वे नीति आयोग के एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कोलकाता में थे और उनके लिए समय देने का अनुरोध किया गया। अदालत ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए अगली तारीख दी, लेकिन यह भी स्पष्ट कर दिया कि अगली सुनवाई में सशरीर उपस्थिति अनिवार्य होगी।
आम श्रद्धालुओं पर असर
रजरप्पा का मां छिन्नमस्तिका मंदिर झारखंड के सबसे प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों में से एक है, जहाँ प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। बुनियादी सुविधाओं के अभाव, अतिक्रमण और सुरक्षा की कमी की शिकायतें लंबे समय से उठती रही हैं। अदालत द्वारा निर्देशों के अनुपालन की निगरानी सुनिश्चित करना इस दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने का दावा कर रही है।
आगे क्या होगा
अगली सुनवाई 5 अक्टूबर 2026 को निर्धारित है, जिसमें पर्यटन सचिव और रामगढ़ उपायुक्त को व्यक्तिगत रूप से अदालत के सामने उपस्थित होना होगा। केंद्र और राज्य सरकार दोनों को डीएमएफटी फंड संबंधी विस्तृत योजना पेश करनी होगी। अदालत के इस कड़े रुख के बाद अब यह देखना होगा कि सरकार जीर्णोद्धार की ठोस रूपरेखा के साथ न्यायालय के समक्ष उपस्थित होती है या नहीं।