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राष्ट्रपति मुर्मु ने किया जनजातीय विकास सम्मेलन का उद्घाटन, 75 स्पेस लैब्स और ट्रेनिंग फैब का भी शुभारंभ

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राष्ट्रपति मुर्मु ने किया जनजातीय विकास सम्मेलन का उद्घाटन, 75 स्पेस लैब्स और ट्रेनिंग फैब का भी शुभारंभ

सारांश

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जनजातीय विकास पर राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कहा कि जनजातीय समुदायों का समग्र विकास ‘विकसित भारत 2047’ का अभिन्न अंग है। उन्होंने EMRS में 75 स्पेस लैब्स और IISc, बेंगलुरु में ट्रेनिंग फैब का भी वर्चुअल शुभारंभ किया, और हितधारकों से योजनाओं को सीधे गांवों तक पहुँचाने का आह्वान किया।

मुख्य बातें

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 3 जून को नई दिल्ली में ITDA/ITDP पर राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया।
EMRS में 75 स्पेस लैब्स और IISc बेंगलुरु के CeNSE में ‘ट्रेनिंग फैब’ का वर्चुअल शुभारंभ।
देशभर में लगभग 500 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय स्थापित किए जा चुके हैं।
राष्ट्रपति ने जनजातीय विकास को ‘विकसित भारत 2047’ लक्ष्य का अभिन्न अंग बताया।
हितधारकों से ‘हर फाइल का उद्देश्य मनुष्य की सहायता’ की संवेदनशील सोच अपनाने का आग्रह।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 3 जून को नई दिल्ली में एकीकृत जनजातीय विकास संस्थाओं (ITDA) और एकीकृत जनजातीय विकास परियोजनाओं (ITDP) को सुदृढ़ करने पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कहा कि जनजातीय समुदायों का समग्र विकास राष्ट्र की प्रगति को समावेशी विकास का स्वरूप प्रदान करेगा। इसी अवसर पर उन्होंने भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु के ‘सेंटर फॉर नैनो साइंस एंड इंजीनियरिंग’ में ‘ट्रेनिंग फैब’ और एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों (EMRS) में 75 ‘स्पेस लैब्स’ का वर्चुअल माध्यम से शुभारंभ किया।

सम्मेलन का उद्देश्य और संदेश

राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में इसे ‘जनजातीय लोगों की स्थिति में बदलाव लाने वालों का सम्मेलन’ बताया। उन्होंने कहा कि अब यह सभी प्रतिभागियों का उत्तरदायित्व है कि वे कल्याणकारी एवं विकास कार्यक्रमों को सीधे जनजातीय समुदायों के गांवों और घरों तक पहुँचाएँ। उन्होंने भरोसा जताया कि राज्य स्तर और परियोजना स्तर पर कार्यरत लोग जब साझा उद्देश्य के साथ विचार-विमर्श करेंगे, तो अनेक उपयोगी समाधान सामने आएंगे।

‘हर फाइल का उद्देश्य किसी मनुष्य की सहायता करना है’

राष्ट्रपति मुर्मु ने सभी हितधारकों को सलाह दी कि वे ध्यान रखें कि प्रत्येक परियोजना की फाइल और दस्तावेज का अंतिम उद्देश्य ‘किसी मनुष्य की सहायता करना’ है। उन्होंने कहा कि एजेंसियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रत्येक गर्भवती माँ को पर्याप्त पोषण मिले, प्रत्येक जनजातीय बच्चा अच्छे स्कूल में पढ़े, प्रत्येक युवा को गरिमापूर्ण आजीविका मिले और प्रत्येक परिवार कल्याण योजनाओं से लाभान्वित हो।

शिक्षा, संस्कृति और एकलव्य मॉडल विद्यालय

राष्ट्रपति ने व्यक्ति और समाज की प्रगति में शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए जनजातीय बच्चों और युवाओं के कौशल विकास में पूरे तन-मन-धन से योगदान देने का आग्रह किया। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि देशभर में लगभग 500 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय स्थापित किए जा चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिक विकास के प्रयासों के साथ-साथ जनजातीय समुदायों की संस्कृति और ज्ञान-परंपराओं पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

‘विकसित भारत 2047’ से जुड़ाव

राष्ट्रपति ने कहा कि देश वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहा है, और जनजातीय समुदायों का समग्र विकास इस उद्देश्य का अभिन्न अंग है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सम्मेलन से निकलने वाले सुझाव, निष्कर्ष और रोडमैप जनजातीय विकास योजनाओं को जमीनी स्तर पर कार्यरूप देने में सहायक होंगे।

आगे क्या

सम्मेलन में आए सुझावों के आधार पर ITDA/ITDP ढाँचे को सुदृढ़ करने की दिशा में आगे की रणनीति तय किए जाने की संभावना है, जबकि नए 75 स्पेस लैब्स और IISc का ‘ट्रेनिंग फैब’ EMRS छात्रों के लिए विज्ञान और सेमीकंडक्टर शिक्षा के नए द्वार खोलेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर असली परीक्षा क्रियान्वयन की है — एकलव्य मॉडल विद्यालयों की संख्या तो बढ़ी है, पर शिक्षक रिक्तियाँ, बुनियादी ढाँचा और सीखने के परिणाम अब भी असमान हैं। ITDA/ITDP ढाँचा दशकों पुराना है, और बार-बार ‘सुदृढ़ीकरण’ के बावजूद धन-प्रवाह व निगरानी के अंतर बने हुए हैं। स्पेस लैब्स और सेमीकंडक्टर ट्रेनिंग फैब जैसी पहल प्रतीकात्मक से अधिक तभी बन सकेंगी, जब वे जनजातीय युवाओं के लिए सत्यापन-योग्य रोज़गार और उच्च शिक्षा परिणामों में बदलें — न कि सिर्फ़ उद्घाटन की सुर्खियों में।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने किस राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया?
राष्ट्रपति मुर्मु ने 3 जून को नई दिल्ली में एकीकृत जनजातीय विकास संस्थाओं (ITDA) और एकीकृत जनजातीय विकास परियोजनाओं (ITDP) को सुदृढ़ करने पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। सम्मेलन का उद्देश्य जनजातीय समुदायों तक कल्याणकारी एवं विकास योजनाओं की पहुँच को मज़बूत करना है।
एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों में ‘स्पेस लैब्स’ क्या हैं?
स्पेस लैब्स EMRS छात्रों के लिए बनाई गई विशेष विज्ञान प्रयोगशालाएँ हैं, जिनका उद्देश्य जनजातीय बच्चों में अंतरिक्ष विज्ञान और STEM विषयों के प्रति रुचि व समझ बढ़ाना है। राष्ट्रपति ने ऐसी 75 स्पेस लैब्स का एक साथ वर्चुअल माध्यम से उद्घाटन किया।
IISc बेंगलुरु में ‘ट्रेनिंग फैब’ का क्या महत्व है?
भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु के ‘सेंटर फॉर नैनो साइंस एंड इंजीनियरिंग’ में स्थापित ट्रेनिंग फैब छात्रों और शोधकर्ताओं को नैनो-इलेक्ट्रॉनिक्स व सेमीकंडक्टर निर्माण का व्यावहारिक प्रशिक्षण देगा। यह भारत के सेमीकंडक्टर कौशल पारिस्थितिकी तंत्र को मज़बूत करने की दिशा में एक कदम है।
देश में अब तक कितने एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय स्थापित हुए हैं?
राष्ट्रपति के अनुसार, देशभर में लगभग 500 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय स्थापित किए जा चुके हैं। ये विद्यालय जनजातीय बच्चों को गुणवत्तापूर्ण आवासीय शिक्षा प्रदान करने पर केंद्रित हैं।
जनजातीय विकास का ‘विकसित भारत 2047’ से क्या संबंध है?
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि जनजातीय समुदायों का समग्र विकास वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के लक्ष्य का अभिन्न अंग है। उनके अनुसार, यही समावेशी दृष्टिकोण राष्ट्र की प्रगति को वास्तविक रूप से समावेशी विकास का स्वरूप प्रदान करेगा।
राष्ट्र प्रेस
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