राष्ट्रपति मुर्मु ने किया जनजातीय विकास सम्मेलन का उद्घाटन, 75 स्पेस लैब्स और ट्रेनिंग फैब का भी शुभारंभ
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 3 जून को नई दिल्ली में एकीकृत जनजातीय विकास संस्थाओं (ITDA) और एकीकृत जनजातीय विकास परियोजनाओं (ITDP) को सुदृढ़ करने पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कहा कि जनजातीय समुदायों का समग्र विकास राष्ट्र की प्रगति को समावेशी विकास का स्वरूप प्रदान करेगा। इसी अवसर पर उन्होंने भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु के ‘सेंटर फॉर नैनो साइंस एंड इंजीनियरिंग’ में ‘ट्रेनिंग फैब’ और एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों (EMRS) में 75 ‘स्पेस लैब्स’ का वर्चुअल माध्यम से शुभारंभ किया।
सम्मेलन का उद्देश्य और संदेश
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में इसे ‘जनजातीय लोगों की स्थिति में बदलाव लाने वालों का सम्मेलन’ बताया। उन्होंने कहा कि अब यह सभी प्रतिभागियों का उत्तरदायित्व है कि वे कल्याणकारी एवं विकास कार्यक्रमों को सीधे जनजातीय समुदायों के गांवों और घरों तक पहुँचाएँ। उन्होंने भरोसा जताया कि राज्य स्तर और परियोजना स्तर पर कार्यरत लोग जब साझा उद्देश्य के साथ विचार-विमर्श करेंगे, तो अनेक उपयोगी समाधान सामने आएंगे।
‘हर फाइल का उद्देश्य किसी मनुष्य की सहायता करना है’
राष्ट्रपति मुर्मु ने सभी हितधारकों को सलाह दी कि वे ध्यान रखें कि प्रत्येक परियोजना की फाइल और दस्तावेज का अंतिम उद्देश्य ‘किसी मनुष्य की सहायता करना’ है। उन्होंने कहा कि एजेंसियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रत्येक गर्भवती माँ को पर्याप्त पोषण मिले, प्रत्येक जनजातीय बच्चा अच्छे स्कूल में पढ़े, प्रत्येक युवा को गरिमापूर्ण आजीविका मिले और प्रत्येक परिवार कल्याण योजनाओं से लाभान्वित हो।
शिक्षा, संस्कृति और एकलव्य मॉडल विद्यालय
राष्ट्रपति ने व्यक्ति और समाज की प्रगति में शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए जनजातीय बच्चों और युवाओं के कौशल विकास में पूरे तन-मन-धन से योगदान देने का आग्रह किया। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि देशभर में लगभग 500 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय स्थापित किए जा चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिक विकास के प्रयासों के साथ-साथ जनजातीय समुदायों की संस्कृति और ज्ञान-परंपराओं पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
‘विकसित भारत 2047’ से जुड़ाव
राष्ट्रपति ने कहा कि देश वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहा है, और जनजातीय समुदायों का समग्र विकास इस उद्देश्य का अभिन्न अंग है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सम्मेलन से निकलने वाले सुझाव, निष्कर्ष और रोडमैप जनजातीय विकास योजनाओं को जमीनी स्तर पर कार्यरूप देने में सहायक होंगे।
आगे क्या
सम्मेलन में आए सुझावों के आधार पर ITDA/ITDP ढाँचे को सुदृढ़ करने की दिशा में आगे की रणनीति तय किए जाने की संभावना है, जबकि नए 75 स्पेस लैब्स और IISc का ‘ट्रेनिंग फैब’ EMRS छात्रों के लिए विज्ञान और सेमीकंडक्टर शिक्षा के नए द्वार खोलेंगे।