गुजरात के औद्योगिक विकास के लिए निर्यात विविधीकरण और MSME विकास जरूरी: CII
सारांश
मुख्य बातें
कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) ने 14 अगस्त 2026 को अहमदाबाद में आयोजित एक मीडिया राउंडटेबल में कहा कि गुजरात के अगले चरण के औद्योगिक विकास को गति देने के लिए निर्यात में विविधता, प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता, MSME क्षेत्र का विस्तार, भविष्योन्मुखी कौशल विकास और मैन्युफैक्चरिंग में निवेश निर्णायक भूमिका निभाएंगे। CII पश्चिम क्षेत्र के चेयरमैन वीर एस. आडवाणी ने यह जानकारी देते हुए बताया कि इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए CII राज्य और केंद्र सरकार के साथ सक्रिय रूप से काम कर रहा है।
अमेरिकी टैरिफ की अनिश्चितता और उद्योग पर दबाव
आडवाणी ने कहा कि भारतीय उद्योग जगत को हाल के समय में महंगाई और आयात की बढ़ती लागत के चलते कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है। इसके साथ ही, अमेरिकी टैरिफ को लेकर बनी अनिश्चितता ने निर्यातकों पर अतिरिक्त दबाव डाला है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "यह 100 प्रतिशत टैरिफ सबसे बड़ी समस्या है। यही बात सभी को परेशान कर रही है।"
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि CII, भारत-अमेरिका व्यापार स्थिति को लेकर वर्ष की शुरुआत की तुलना में अब अधिक आशावादी है। उनके अनुसार, दोनों देशों के बीच अब 'बहुत अधिक द्विपक्षीय बातचीत और संपर्क' हो रहा है और उम्मीद है कि भारत अंततः अपने प्रतिस्पर्धियों की तुलना में बेहतर स्थिति हासिल कर लेगा।
बाज़ार विविधीकरण की अनिवार्यता
आडवाणी ने रेखांकित किया कि टैरिफ अनिश्चितता ने यह भी उजागर किया है कि भारतीय कंपनियों को अमेरिकी बाज़ार पर अपनी निर्भरता घटानी होगी। उन्होंने कहा, "हम बहुत कम उत्पादों का और बहुत कम देशों को ही निर्यात करते हैं। इसलिए विविधता लाना सबसे जरूरी है।" उन्होंने यूके, यूरोपीय संघ और ऑस्ट्रेलिया को संभावित वैकल्पिक बाज़ारों के रूप में चिह्नित किया।
गौरतलब है कि CII वाणिज्य मंत्रालय के साथ मिलकर फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्ताक्षर के बाद उत्पाद और देश के स्तर पर रणनीति तैयार कर रहा है, जिसमें छह-अंकों वाले HSN कोड तक के स्तर पर निर्यात अवसरों की पहचान की जा रही है।
गुजरात को डेटा सेंटर हब बनाने की महत्वाकांक्षा
CII गुजरात के चेयरमैन अचल बाकेरी ने कहा कि राज्य में भूमि और बिजली की सुलभ उपलब्धता, कम निर्माण लागत और तटीय क्षेत्र में सबमरीन डेटा केबल की मौजूदगी गुजरात को एक बड़े डेटा सेंटर हब के रूप में स्थापित करने की क्षमता देती है। उन्होंने धोलेरा को इस दिशा में एक रणनीतिक स्थान बताया।
बाकेरी ने कहा, "मकसद यह है कि गुजरात देश का, या शायद एशिया का डेटा सेंटर कैपिटल बने।" उन्होंने माना कि बड़े डेटा सेंटर परियोजनाओं के लिए पानी की उपलब्धता एक महत्वपूर्ण प्रश्न बनी रहेगी और पर्यावरणीय पहलुओं पर भी समुचित ध्यान देना होगा।
यह ऐसे समय में आया है जब गुजरात सरकार की डेटा सेंटर पॉलिसी 2026-29 लागू की गई है, जिसका लक्ष्य 7.5 गीगावाट क्षमता हासिल करना और हाइपरस्केल तथा डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करना है।
CII की आगे की भूमिका
बाकेरी ने बताया कि CII 2027 गुजरात समिट की तैयारियों में राज्य सरकार का सहयोग करेगा। संगठन पॉलिसी एडवोकेसी, मैन्युफैक्चरिंग, निर्यात, नवीकरणीय ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, कौशल विकास और MSME के क्षेत्रों में अपना काम जारी रखेगा। यह पहल ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए प्रयासरत है।