FTA भारत के निर्यात विस्तार के लिए अनिवार्य: ब्लू स्टार CMD वीर एस. आडवाणी
सारांश
मुख्य बातें
ब्लू स्टार लिमिटेड के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक तथा भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) पश्चिमी क्षेत्र के अध्यक्ष वीर एस. आडवाणी ने 21 अगस्त को मुंबई में स्पष्ट कहा कि मुक्त व्यापार समझौते (FTA) भारत के निर्यात और वैश्विक व्यापार विस्तार की रीढ़ हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भू-राजनीतिक उथल-पुथल का दौर जारी रहेगा और भारतीय उद्योगों को इन परिस्थितियों के बीच अपना रास्ता खुद बनाना होगा।
FTA की अहमियत
आडवाणी ने कहा, 'FTA बहुत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि हाल के वर्षों में भारत ने कई मित्र देशों के साथ ऐसे समझौते किए हैं। न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे देश भारतीय निर्यातकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बाज़ार हैं।' उन्होंने जोड़ा कि भू-राजनीतिक घटनाक्रम समय-समय पर बदलते रहेंगे, परंतु इससे FTA की रणनीतिक ज़रूरत कम नहीं होती।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की स्थिति
भारत और अमेरिका के बीच संभावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर आडवाणी ने सतर्क रुख अपनाया। उन्होंने कहा, 'भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते की चर्चा जरूर चल रही है, लेकिन अभी तक कोई समझौता हस्ताक्षरित नहीं हुआ है। इसलिए इसकी वास्तविक स्थिति क्या है, यह स्पष्ट नहीं है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि समझौते की शर्तों और संभावित प्रभावों पर अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी।
टैरिफ और पश्चिम एशिया संकट की चुनौती
आडवाणी ने ईरान और पश्चिम एशिया में उत्पन्न संकट को वैश्विक व्यापार के लिए एक नई बाधा बताया। उनके अनुसार 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाए जाने की आशंका बनी हुई है, जिसका सीधा असर भारतीय निर्यात पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा, 'हालांकि भारत सरकार अमेरिका के साथ लगातार बातचीत कर रही है ताकि भारतीय निर्यात पर इसका असर न्यूनतम रहे।' यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं पहले से ही दबाव में हैं।
CII ग्लोबल ट्रेड सम्मेलन का महत्व
मुंबई में आयोजित CII ग्लोबल ट्रेड सीनारियो के 7वें संस्करण के बारे में आडवाणी ने कहा कि यह मंच वैश्विक व्यापार की बदलती परिस्थितियों को समझने के लिए अपरिहार्य हो चुका है। उन्होंने बताया, 'यह सम्मेलन हर वर्ष मुंबई में आयोजित किया जाता है क्योंकि महाराष्ट्र भारत का सबसे बड़ा निर्यातक राज्य है। महाराष्ट्र और गुजरात दोनों पश्चिमी क्षेत्र में आते हैं और हम CII के पश्चिमी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं।' उनके अनुसार यह मंच सरकार, उद्योग और निर्यातकों के बीच संवाद को मज़बूत बनाता है।
बंदरगाह क्षमता और वधावन पोर्ट
देश की लॉजिस्टिक्स क्षमता पर आडवाणी ने कहा कि जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी (JNPA) एक उत्कृष्ट बंदरगाह है, लेकिन 10 मिलियन TEU की मौजूदा क्षमता भारतीय विनिर्माण क्षेत्र की बढ़ती ज़रूरतों के लिए अपर्याप्त है। उन्होंने वधावन पोर्ट परियोजना का स्वागत करते हुए कहा, 'यह परियोजना कई दशकों से विचाराधीन रही है और मेरा मानना है कि करीब 30 वर्ष पहले पहली बार इसकी घोषणा की गई थी।' उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार और उद्योग के संयुक्त प्रयासों से भारत वैश्विक व्यापार की चुनौतियों से पार पाएगा।