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क्या ममता बनर्जी ने सीईसी को पत्र लिखकर एसआईआर की खामियों का जिक्र किया?

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क्या ममता बनर्जी ने सीईसी को पत्र लिखकर एसआईआर की खामियों का जिक्र किया?

सारांश

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर एसआईआर की खामियों पर चिंता जताई। उन्होंने इस प्रक्रिया के दौरान नागरिकों के साथ हो रही परेशानियों का उल्लेख किया है। क्या यह चुनाव आयोग की कार्यशैली पर सवाल उठाता है?

मुख्य बातें

ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को पत्र लिखा है।
मतदाता सूची के एसआईआर में खामियों की बात की गई।
77 मौतें और कई आत्महत्या के प्रयास हुए हैं।
प्रक्रिया में मानवता और संवेदनशीलता की कमी है।
चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं।

कोलकाता, 10 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को एक पत्र लिखकर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की कथित समस्याओं पर ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) द्वारा संचालित एसआईआर प्रक्रिया के दौरान आम जनता को जिस तरह से लगातार परेशान किया जा रहा है, उससे वह बेहद स्तब्ध और चिंतित हैं। सुनवाई प्रक्रिया अब काफी हद तक मैकेनिकल हो गई है, जो पूरी तरह से तकनीकी आंकड़ों पर निर्भर है और इसमें बुद्धि, संवेदनशीलता और मानवीय स्पर्श की कमी है।

टीएमसी प्रमुख ने ईसीआई को बताया कि यह चौंकाने वाला है कि एक ऐसा अभियान जो रचनात्मक और फलदायी होना चाहिए था, उसमें पहले ही 77 लोगों की जान जा चुकी है, 4 ने आत्महत्या का प्रयास किया है और 17 लोग बीमार हो गए हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है। इसका कारण ईसीआई द्वारा बिना योजना के चलाए जा रहे इस अभियान का डर, धमकियां और अत्यधिक कार्यभार है।

उन्होंने कहा कि यह अत्यंत शर्मनाक है कि नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर अमर्त्य सेन, 90 वर्षीय और विश्व स्तर पर सम्मानित बुद्धिजीवी, को अपनी योग्यता साबित करने के लिए चुनाव आयोग के अधिकारियों के सामने पेश होने के लिए कहा गया है। इसी तरह, प्रतिष्ठित कवि और पुरस्कार विजेता जॉय गोस्वामी, लोकप्रिय फिल्म अभिनेता और सांसद दीपक अधिकारी, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर मोहम्मद शमी और भारत सेवाश्रम संघ के महाराज जैसी सम्मानित हस्तियों को भी इस अनियोजित, असंवेदनशील और अमानवीय प्रक्रिया का सामना करना पड़ा है। क्या यह चुनाव आयोग की ओर से घोर दुस्साहस नहीं है?

ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग से कहा कि यह भी सूचित किया गया है कि तथाकथित "तार्किक विसंगतियों," जो वास्तव में पूरी तरह से अतार्किक हैं, को राजनीतिक पूर्वाग्रह के साथ चुनिंदा रूप से कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में निशाना बनाया जा रहा है।

ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग से कहा कि हालांकि अब बहुत देर हो चुकी है, उम्मीद है कि समझदारी से काम लिया जाएगा और राज्य के आम नागरिकों की परेशानी, असुविधा और पीड़ा को कम करने के लिए उचित सुधारात्मक कार्रवाई की जाएगी।

वहीं, तृणमूल कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि जब चुनाव आयोग के अपने अधिकारी इस्तीफा देते हैं, तो एसआईआर घोटाला बेनकाब हो जाता है! और यह अब कोई राजनीतिक आरोप नहीं है। यह अब चुनाव आयोग के भीतर से ही एक अभियोग है।

एक एईआरओ ने स्पष्ट रूप से इस्तीफा दे दिया है और कहा है कि वह वर्तमान एसआईआर में भाग नहीं ले सकते क्योंकि यह प्रक्रिया तार्किक रूप से त्रुटिपूर्ण, प्रशासनिक रूप से बेईमान और नैतिक रूप से अस्वीकार्य है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और उसकी जिम्मेदारी पर प्रकाश डालता है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ममता बनर्जी ने पत्र में किसके खिलाफ शिकायत की है?
ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एसआईआर प्रक्रिया की खामियों पर शिकायत की है।
क्या एसआईआर प्रक्रिया में कोई मौतें हुई हैं?
जी हां, ममता बनर्जी ने बताया कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान 77 मौतें हुई हैं।
राष्ट्र प्रेस
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