क्या सीएम ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर एसआईआर में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया?

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क्या सीएम ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर एसआईआर में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया?

सारांश

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को पत्र भेजकर एसआईआर में अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए हैं। क्या यह लोकतंत्र के लिए खतरा है?

Key Takeaways

  • मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को पत्र लिखा है।
  • एसआईआर में अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है।
  • प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी है।
  • मतदाता सूची से पात्र मतदाताओं के नाम हटने का खतरा है।
  • मुख्य चुनाव आयोग को खामियों को सुधारने की आवश्यकता है।

कोलकाता, 4 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त को एक पत्र भेजा है जिसमें उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान गंभीर अनियमितताओं, प्रक्रिया के उल्लंघन और प्रशासनिक लापरवाही के बारे में चिंता व्यक्त की है।

उन्होंने पत्र में उल्लेख किया कि पहले भी इस विषय पर पत्र लिखकर बताया था कि यह महत्वपूर्ण प्रक्रिया हमारे लोकतंत्र की नींव है। इसे बिना किसी ठोस योजना, तैयारी और स्पष्ट दिशा के जल्दबाजी में किया जा रहा है। दुख की बात है कि स्थिति में सुधार होने के बजाय और अधिक खराबी आई है।

बंगाल की मुख्यमंत्री ने कहा कि यह चिंताजनक है कि राष्ट्रीय स्तर पर भी चुनाव आयोग एसआईआर के उद्देश्यों को लेकर स्पष्ट नहीं है, इसे कैसे लागू किया जाना चाहिए, और इसका अंतिम लक्ष्य क्या है। विभिन्न राज्यों में अलग-अलग नियमों को अपनाया जा रहा है और समय-सीमाएं मनमाने तरीके से बदली जा रही हैं। यह तैयारी और समझ की कमी को दर्शाता है।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि महत्वपूर्ण निर्देश अक्सर व्हाट्सएप और टेक्स्ट मैसेज जैसे अनौपचारिक माध्यमों से दिए जा रहे हैं। इतनी महत्वपूर्ण प्रक्रिया के लिए जरूरी लिखित आदेश, अधिसूचना या परिपत्र जारी नहीं किए जा रहे हैं। इस तरह की मनमानी और अनौपचारिकता से न तो पारदर्शिता बनी रहती है और न ही जवाबदेही। अगर कोई गलती या अस्पष्टता होती है, तो यह वास्तविक मतदाताओं के नाम हटने का कारण बन सकती है, जो किसी भी संवैधानिक लोकतंत्र में अस्वीकार्य है।

उन्होंने यह भी लिखा है कि आईटी सिस्टम के दुरुपयोग के जरिए बैकएंड से मतदाताओं के नाम हटाए जाने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। यह सवाल उठता है कि ऐसे कदम किसके आदेश पर और किस कानूनी अधिकार के तहत उठाए गए हैं। यह जानकारी भी मिली है कि फैमिली रजिस्टर को पश्चिम बंगाल में व्हाट्सएप संदेश के जरिए अमान्य बताया जा रहा है। पहले मान्य दस्तावेज को बिना कारण के अचानक खारिज करना भेदभाव और मनमानी को दर्शाता है।

सीएम ममता का कहना है कि जिला निर्वाचन अधिकारियों को अनौपचारिक रूप से बताया गया है कि राज्य सरकार द्वारा जारी स्थायी निवास प्रमाण पत्र या डोमिसाइल सर्टिफिकेट को पहचान के प्रमाण के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा। दूसरे राज्यों में गए प्रवासी मजदूरों को भी उपस्थित होने के लिए मजबूर किया जा रहा है। यह कार्यप्रणाली न केवल गलत है, बल्कि लोकतंत्र और कानून के शासन की मूल भावना के खिलाफ भी है। यह प्रक्रिया बिहार और अन्य राज्यों में वर्तमान एसआईआर के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया से पूरी तरह भिन्न है।

उन्होंने कहा कि इस तरह की अंतर-जिला या अंतर-राज्य जांच समय-सीमा में पूरी नहीं हो पाएगी। इसका नतीजा यह होगा कि असली और पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए जाएंगे और वे मतदान के अधिकार से वंचित हो सकते हैं।

सीएम ने आरोप लगाया कि लोगों में बेवजह डर और तनाव बन रहा है। बुजुर्ग, अस्वस्थ और गंभीर रूप से बीमार नागरिकों को भी नहीं छोड़ा जा रहा है। इससे आम जनता को भारी परेशानी हो रही है। आयोग जमीनी हकीकत के प्रति पूरी तरह असंवेदनशील दिखाई दे रहा है। पर्यवेक्षकों की नियुक्ति भी राज्य सरकार द्वारा भेजे गए अधिकारियों की सूची की पूरी तरह अनदेखी करके की जा रही है।

सीएम ने मुख्य चुनाव आयुक्त को भेजे गए पत्र में कहा है कि ये मामले केवल उदाहरण हैं, पूरी सूची नहीं। इससे स्पष्ट होता है कि जिस तरह से एसआईआर प्रक्रिया चलाई जा रही है, वह गंभीर रूप से प्रभावित और त्रुटिपूर्ण है। यह हमारे लोकतंत्र की बुनियादी संरचना और संविधान की भावना पर सीधा प्रहार करती है।

उन्होंने आग्रह किया है कि खामियों को तुरंत दूर किया जाए, त्रुटियों को सुधारा जाए, और आवश्यक सुधार किए जाएं। अगर ऐसा नहीं किया जाता है, तो इस अव्यवस्थित, मनमानी, और बिना योजना वाली प्रक्रिया को तुरंत रोका जाना चाहिए। अगर यह प्रक्रिया वर्तमान स्वरूप में जारी रहती है, तो इससे अपूरणीय क्षति होगी, बड़ी संख्या में पात्र मतदाता अपने अधिकार से वंचित हो जाएंगे, और यह लोकतांत्रिक शासन की मूलभूत अवधारणाओं पर सीधा हमला होगा।

Point of View

बल्कि पूरे देश के लोकतंत्र को प्रभावित कर सकता है। चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठता है। ऐसे समय में जब लोकतांत्रिक मूल्यों को सुरक्षित रखना आवश्यक है, इस तरह की घटनाएँ चिंता का विषय हैं।
NationPress
07/01/2026

Frequently Asked Questions

ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को क्या पत्र लिखा है?
उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान गंभीर अनियमितताओं और प्रक्रिया के उल्लंघन का आरोप लगाया है।
एसआईआर प्रक्रिया में क्या समस्याएं आ रही हैं?
प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी, अनौपचारिक निर्देश और समय-सीमाओं का मनमाना बदलाव शामिल है।
क्या इससे मतदाता प्रभावित होंगे?
हाँ, असली और पात्र मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा सकते हैं, जिससे उन्हें मतदान का अधिकार नहीं मिलेगा।
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