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केरल PSC नियुक्ति विवाद: भाजपा विधायक मुरलीधरन ने LDF कार्यकाल की सभी नियुक्तियों की समीक्षा की मांग की

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केरल PSC नियुक्ति विवाद: भाजपा विधायक मुरलीधरन ने LDF कार्यकाल की सभी नियुक्तियों की समीक्षा की मांग की

सारांश

केरल में PSC नियुक्ति विवाद गहराता जा रहा है — SIT दो सदस्यों से पूछताछ कर चुकी है, PSC अध्यक्ष को नोटिस मिल चुका है, और राज्यपाल ने राष्ट्रपति को कार्रवाई की सिफारिश भेजी है। भाजपा विधायक मुरलीधरन ने LDF कार्यकाल की सभी नियुक्तियों की समीक्षा की माँग उठाकर सियासी तापमान और बढ़ा दिया है।

मुख्य बातें

मुरलीधरन ने LDF कार्यकाल की सभी PSC नियुक्तियों की व्यापक समीक्षा की माँग की।
कथित अनियमितताओं पर दो PSC सदस्य SIT के सामने पेश हुए; PSC अध्यक्ष डॉ.
बैजू को बुधवार को नोटिस।
राज्य पुलिस प्रमुख को PSC से जुड़ी 180 शिकायतें प्राप्त; तीन शिकायतें क्राइम ब्रांच को भेजी गईं।
राज्यपाल ने राष्ट्रपति को PSC बोर्ड के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश भेजी; CPI(M) , कांग्रेस और UDF ने इसे असंवैधानिक बताया।
मुरलीधरन ने सतीशन सरकार पर आरोपियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया; अदालत भी सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की आलोचना कर चुकी है।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक और पूर्व केंद्रीय मंत्री वी. मुरलीधरन ने सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को मांग की कि पिछली वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) सरकार के कार्यकाल में केरल लोक सेवा आयोग (PSC) के माध्यम से की गई सभी नियुक्तियों की व्यापक जाँच और समीक्षा की जाए। यह बयान ऐसे समय आया है जब कथित अनियमितताओं के सिलसिले में दो PSC सदस्य विशेष जाँच दल (SIT) के सामने पेश हो चुके हैं और PSC अध्यक्ष डॉ. एम. आर. बैजू को बुधवार को SIT के समक्ष उपस्थित होने का नोटिस दिया गया है।

मुख्य घटनाक्रम

मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन ने उसी दिन विधानसभा को सूचित किया कि राज्य पुलिस प्रमुख को PSC में अनियमितताओं से जुड़ी 180 शिकायतें प्राप्त हुई हैं। इनमें से तीन शिकायतें कार्मिक और प्रशासनिक सुधार विभाग के माध्यम से मिली हैं, जिन्हें क्राइम ब्रांच जाँच के लिए गृह विभाग को सौंपा गया है।

इससे पहले, रविवार को यह सामने आया कि केरल के राज्यपाल ने भारत के राष्ट्रपति को पत्र लिखकर PSC बोर्ड के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की है। गौरतलब है कि राज्यपाल ने 21 अगस्त को ही PSC सचिव से स्पष्टीकरण माँगा था, जिसके बाद यह सिफारिश भेजी गई।

भाजपा के आरोप और माँगें

मुरलीधरन ने सतीशन सरकार पर आरोप लगाया कि वह कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की बजाय उन्हें संरक्षण दे रही है। उन्होंने तीन स्पष्ट माँगें रखीं — LDF शासनकाल के दौरान PSC में की गई सभी नियुक्तियों की समीक्षा, मुख्य आरोपियों से पूछताछ, और दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई।

मुरलीधरन ने यह भी सवाल उठाया कि राज्यपाल की कार्रवाई का भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [CPI(M)] के साथ-साथ कांग्रेस और संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF) क्यों विरोध कर रही है, जबकि वे सत्ता में नहीं हैं।

राज्यपाल की कार्रवाई पर विवाद

सत्तारूढ़ और विपक्षी दोनों खेमों ने राज्यपाल की सिफारिश को असंवैधानिक करार दिया है। मुरलीधरन ने इस पर पलटवार करते हुए कहा कि जो दल यह आरोप लगा रहे हैं, उन्हें अपना आधार स्पष्ट करना चाहिए।

उन्होंने अदालत की हालिया उस टिप्पणी का भी उल्लेख किया जिसमें न्यायालय ने सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की आलोचना करते हुए कहा था कि जब अनियमितताओं में संलिप्त लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए थी, तब दोनों पक्ष एक-दूसरे को बचाने में लगे थे।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

PSC जैसी संवैधानिक संस्थाओं में भर्ती-प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठना सार्वजनिक विश्वास के लिए गंभीर संकेत माना जाता है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, SIT जाँच के दायरे और उसके निष्कर्ष तय करेंगे कि यह विवाद केरल की राजनीति में कितना गहरा असर छोड़ता है।

आगे क्या होगा

PSC अध्यक्ष डॉ. बैजू की SIT के समक्ष बुधवार को प्रस्तुति से जाँच की दिशा और भी स्पष्ट होने की संभावना है। मुरलीधरन ने स्पष्ट किया कि PSC में जनता का भरोसा बहाल करने के लिए पारदर्शी जाँच और जवाबदेही सुनिश्चित करना अनिवार्य है। आने वाले दिनों में विधानसभा में इस मुद्दे पर राजनीतिक तनाव बढ़ने के संकेत हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

वहीं 180 शिकायतें और SIT की सक्रियता यह संकेत देती हैं कि मामला केवल राजनीतिक है — ऐसा कहना सच्चाई से मुँह मोड़ना होगा। मुख्यधारा की कवरेज में यह सवाल गायब है कि PSC जैसी भर्ती संस्था में इतने बड़े पैमाने पर शिकायतें कैसे जमा होती रहीं और किसी भी सरकार ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की। असली जवाबदेही की माँग तब तक अधूरी रहेगी, जब तक SIT के निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं होते और नियुक्तियों की स्वतंत्र समीक्षा नहीं होती।
RashtraPress
26 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल PSC नियुक्ति विवाद क्या है?
केरल लोक सेवा आयोग (PSC) पर LDF सरकार के कार्यकाल में भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप हैं, जिनके आधार पर SIT जाँच शुरू हुई है। राज्य पुलिस प्रमुख को अब तक 180 शिकायतें मिल चुकी हैं और दो PSC सदस्य पूछताछ के लिए पेश हो चुके हैं।
SIT जाँच में अभी तक क्या हुआ है?
SIT ने दो PSC सदस्यों से पूछताछ की है और PSC अध्यक्ष डॉ. एम. आर. बैजू को बुधवार को पेश होने का नोटिस भेजा गया है। तीन शिकायतें क्राइम ब्रांच को जाँच के लिए सौंपी गई हैं।
भाजपा की मुख्य माँगें क्या हैं?
भाजपा विधायक वी. मुरलीधरन ने माँग की है कि LDF कार्यकाल के दौरान PSC में हुई सभी नियुक्तियों की समीक्षा हो, मुख्य आरोपियों से पूछताछ की जाए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो। उनका कहना है कि सतीशन सरकार आरोपियों को बचा रही है।
राज्यपाल ने राष्ट्रपति को क्यों पत्र लिखा?
राज्यपाल ने PSC बोर्ड के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश करते हुए भारत के राष्ट्रपति को पत्र लिखा, जो रविवार को सामने आया। इससे पहले राज्यपाल ने 21 अगस्त को PSC सचिव से स्पष्टीकरण माँगा था। CPI(M), कांग्रेस और UDF ने इस कदम को असंवैधानिक बताया है।
इस विवाद का आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
PSC के ज़रिए सरकारी नौकरी पाने वाले या पाने की उम्मीद रखने वाले अभ्यर्थियों के लिए यह विवाद सीधे तौर पर मायने रखता है। यदि नियुक्तियों की समीक्षा होती है, तो मौजूदा नियुक्तियाँ प्रभावित हो सकती हैं; साथ ही PSC की विश्वसनीयता और भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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