केरल PSC नियुक्ति विवाद: भाजपा विधायक मुरलीधरन ने LDF कार्यकाल की सभी नियुक्तियों की समीक्षा की मांग की
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक और पूर्व केंद्रीय मंत्री वी. मुरलीधरन ने सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को मांग की कि पिछली वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) सरकार के कार्यकाल में केरल लोक सेवा आयोग (PSC) के माध्यम से की गई सभी नियुक्तियों की व्यापक जाँच और समीक्षा की जाए। यह बयान ऐसे समय आया है जब कथित अनियमितताओं के सिलसिले में दो PSC सदस्य विशेष जाँच दल (SIT) के सामने पेश हो चुके हैं और PSC अध्यक्ष डॉ. एम. आर. बैजू को बुधवार को SIT के समक्ष उपस्थित होने का नोटिस दिया गया है।
मुख्य घटनाक्रम
मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन ने उसी दिन विधानसभा को सूचित किया कि राज्य पुलिस प्रमुख को PSC में अनियमितताओं से जुड़ी 180 शिकायतें प्राप्त हुई हैं। इनमें से तीन शिकायतें कार्मिक और प्रशासनिक सुधार विभाग के माध्यम से मिली हैं, जिन्हें क्राइम ब्रांच जाँच के लिए गृह विभाग को सौंपा गया है।
इससे पहले, रविवार को यह सामने आया कि केरल के राज्यपाल ने भारत के राष्ट्रपति को पत्र लिखकर PSC बोर्ड के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की है। गौरतलब है कि राज्यपाल ने 21 अगस्त को ही PSC सचिव से स्पष्टीकरण माँगा था, जिसके बाद यह सिफारिश भेजी गई।
भाजपा के आरोप और माँगें
मुरलीधरन ने सतीशन सरकार पर आरोप लगाया कि वह कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की बजाय उन्हें संरक्षण दे रही है। उन्होंने तीन स्पष्ट माँगें रखीं — LDF शासनकाल के दौरान PSC में की गई सभी नियुक्तियों की समीक्षा, मुख्य आरोपियों से पूछताछ, और दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई।
मुरलीधरन ने यह भी सवाल उठाया कि राज्यपाल की कार्रवाई का भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [CPI(M)] के साथ-साथ कांग्रेस और संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF) क्यों विरोध कर रही है, जबकि वे सत्ता में नहीं हैं।
राज्यपाल की कार्रवाई पर विवाद
सत्तारूढ़ और विपक्षी दोनों खेमों ने राज्यपाल की सिफारिश को असंवैधानिक करार दिया है। मुरलीधरन ने इस पर पलटवार करते हुए कहा कि जो दल यह आरोप लगा रहे हैं, उन्हें अपना आधार स्पष्ट करना चाहिए।
उन्होंने अदालत की हालिया उस टिप्पणी का भी उल्लेख किया जिसमें न्यायालय ने सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की आलोचना करते हुए कहा था कि जब अनियमितताओं में संलिप्त लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए थी, तब दोनों पक्ष एक-दूसरे को बचाने में लगे थे।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
PSC जैसी संवैधानिक संस्थाओं में भर्ती-प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठना सार्वजनिक विश्वास के लिए गंभीर संकेत माना जाता है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, SIT जाँच के दायरे और उसके निष्कर्ष तय करेंगे कि यह विवाद केरल की राजनीति में कितना गहरा असर छोड़ता है।
आगे क्या होगा
PSC अध्यक्ष डॉ. बैजू की SIT के समक्ष बुधवार को प्रस्तुति से जाँच की दिशा और भी स्पष्ट होने की संभावना है। मुरलीधरन ने स्पष्ट किया कि PSC में जनता का भरोसा बहाल करने के लिए पारदर्शी जाँच और जवाबदेही सुनिश्चित करना अनिवार्य है। आने वाले दिनों में विधानसभा में इस मुद्दे पर राजनीतिक तनाव बढ़ने के संकेत हैं।