24 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

सीएमआरएल डायरी में सतीशन, पिनाराई समेत दर्जनों नेताओं के नाम, भाजपा ने माँगी सीबीआई जाँच

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सीएमआरएल डायरी में सतीशन, पिनाराई समेत दर्जनों नेताओं के नाम, भाजपा ने माँगी सीबीआई जाँच

सारांश

सीएमआरएल के एमडी की डायरी का एक पन्ना केरल में राजनीतिक बवाल का नया केंद्र बन गया है। भाजपा के शोन जॉर्ज का दावा है कि इसमें UDF और LDF — दोनों खेमों के दर्जनों वरिष्ठ नेताओं के नाम कथित भुगतान की एंट्री के साथ दर्ज हैं। अब सवाल यह है कि क्राइम ब्रांच SIT इस पूरी सूची की जाँच करेगी या नहीं।

मुख्य बातें

सीएमआरएल के एमडी एस.
शशिधरन कार्था की डायरी का एक पन्ना जाँचकर्ताओं के पास है; भाजपा नेता शोन जॉर्ज ने इसे 24 सितंबर 2026 को सोशल मीडिया और प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए सार्वजनिक किया।
कथित सूची में मुख्यमंत्री वी.डी.
सतीशन (₹5 लाख की एंट्री), गृह मंत्री रमेश चेन्निथला , पिनाराई विजयन , एम.वी.
गोविंदन समेत UDF और LDF दोनों के नेताओं के नाम शामिल बताए जाते हैं।
केरल सरकार ने ED की सूचना के आधार पर क्राइम ब्रांच SIT से प्रारंभिक जाँच कराने का निर्णय लिया है।
भाजपा ने माँग की है कि पूरा मामला CBI को सौंपा जाए और विजिलेंस ब्यूरो से जाँच हो।
केरल हाईकोर्ट के जून 2026 के फैसले के अनुसार SFIO इस मामले की जाँच जनवरी 2024 से कर रहा है; आयकर निपटान आयोग ने ₹1.72 करोड़ के कथित भुगतान के निष्कर्षों को सही ठहराया था।

केरल की राजनीति में 24 सितंबर 2026 को उस वक्त नया भूचाल आ गया जब सीएमआरएल के मैनेजिंग डायरेक्टर एस. शशिधरन कार्था की डायरी का एक पन्ना सार्वजनिक हुआ, जो कथित तौर पर जाँचकर्ताओं के पास पहले से मौजूद है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के केरल राज्य उपाध्यक्ष शोन जॉर्ज ने आरोप लगाया है कि इस पन्ने में सत्ताधारी यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) और विपक्षी लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF), दोनों खेमों के दर्जनों वरिष्ठ नेताओं के नाम दर्ज हैं।

डायरी के पन्ने पर क्या है

शोन जॉर्ज, जो कथित तौर पर पिछले तीन वर्षों से सीएमआरएल-एक्जालॉजिक मामले की पड़ताल कर रहे हैं, ने सबसे पहले इस पन्ने की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर जारी की। उन्होंने सवाल उठाया: 'विजिलेंस जाँच क्यों नहीं हो रही है? इस पेज पर दिए गए आँकड़े कई सवालों के जवाब देते हैं।'

गुरुवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जॉर्ज ने दावा किया कि इस पन्ने पर मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन, गृह मंत्री रमेश चेन्निथला, मंत्री के. मुरलीधरन और शिबू बेबी जॉन के नाम शामिल हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सतीशन के नाम के सामने ₹5 लाख की एंट्री दर्ज है, जो कथित तौर पर उन्हें किए गए भुगतान की ओर संकेत करती है।

वामपंथी खेमे से पिनाराई विजयन, उनके पूर्व कैबिनेट सहयोगी पी. राजीव, के.बी. गणेश कुमार, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के वरिष्ठ नेता एलामराम करीम, राज्य CPI(M) सचिव एम.वी. गोविंदन और अन्य नेताओं के नाम भी कथित तौर पर इस सूची में शामिल बताए जाते हैं। हालाँकि यह स्पष्ट करना ज़रूरी है कि इन एंट्रीज की पुष्टि अकेले डायरी के पन्ने से नहीं की जा सकती — हर भुगतान का संदर्भ और प्रकृति विधिवत जाँच के जरिए ही तय होगी।

जाँच का दायरा और विवाद

यह खुलासा ऐसे समय में आया है जब केरल सरकार ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) से मिली जानकारी के आधार पर क्राइम ब्रांच स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) से प्रारंभिक जाँच कराने का फैसला किया है। यह निर्णय एडवोकेट जनरल की कानूनी राय के बाद लिया गया। ED ने राज्य पुलिस प्रमुख को पत्र लिखकर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई करने का आग्रह किया था।

जॉर्ज ने सवाल उठाया कि मामले को विजिलेंस और एंटी-करप्शन ब्यूरो (VACB) के बजाय क्राइम ब्रांच को क्यों सौंपा गया और माँग की कि इस पूरे प्रकरण की जाँच केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) को दी जाए। उन्होंने गृह मंत्री चेन्निथला पर यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने जानबूझकर विजिलेंस जाँच की जगह क्राइम ब्रांच का रास्ता चुना।

इस पर चेन्निथला का पक्ष यह है कि सरकार ने एडवोकेट जनरल की कानूनी राय के अनुसार कार्रवाई की है और ED की जानकारी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता था।

मामले की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि केरल हाईकोर्ट ने जून 2026 के अपने फैसले में दर्ज किया कि कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने जनवरी 2024 में सीएमआरएल की जाँच का आदेश दिया था और बाद में इसे गंभीर धोखाधड़ी जाँच कार्यालय (SFIO) को सौंपा गया था। अदालत ने यह भी दर्ज किया कि आयकर निपटान आयोग ने बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए खर्चों, कथित गैरकानूनी नकद भुगतान और बिना कोई सेवा दिए वीना विजयन तथा एक्सलॉजिक को कथित तौर पर ₹1.72 करोड़ के भुगतान से जुड़े निष्कर्षों को सही ठहराया था।

जॉर्ज के अनुसार, उनके द्वारा जारी किया गया पन्ना SFIO द्वारा न्यायालय में जमा किए गए दस्तावेजों में से एक है।

आगे क्या होगा

अब जब ED की पहल पर राज्य पुलिस की जाँच शुरू होने वाली है, तो डायरी के ताज़ा खुलासे ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है: क्या क्राइम ब्रांच SIT की प्रारंभिक जाँच कथित राजनीतिक भुगतान की पूरी सूची की जाँच करेगी, या केवल ED द्वारा इंगित विशेष मामलों तक ही सीमित रहेगी? यह सवाल केरल की राजनीति में आने वाले हफ्तों तक गूँजता रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि इसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के नाम हैं। यही वह बिंदु है जो मुख्यधारा की कवरेज अक्सर चूक जाती है: यह विवाद सिर्फ सरकार बनाम विपक्ष नहीं है, बल्कि यह UDF और LDF — दोनों की साख को एक साथ कठघरे में खड़ा करता है। असली सवाल यह है कि क्राइम ब्रांच SIT की जाँच का दायरा क्या होगा — और क्या वह ED-निर्देशित मामलों से आगे जाकर पूरी सूची की जाँच करेगी। अगर नहीं, तो जॉर्ज का CBI माँग वाला तर्क और मज़बूत होगा।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीएमआरएल डायरी विवाद क्या है?
सीएमआरएल के मैनेजिंग डायरेक्टर एस. शशिधरन कार्था की डायरी का एक पन्ना, जो कथित तौर पर SFIO द्वारा कोर्ट में जमा दस्तावेजों का हिस्सा है, 24 सितंबर 2026 को भाजपा नेता शोन जॉर्ज ने सार्वजनिक किया। इस पन्ने में UDF और LDF दोनों खेमों के वरिष्ठ नेताओं के नामों के साथ कथित भुगतान की एंट्रीज दर्ज बताई जाती हैं।
भाजपा ने किन नेताओं पर आरोप लगाए हैं?
भाजपा के राज्य उपाध्यक्ष शोन जॉर्ज के अनुसार डायरी में मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन (₹5 लाख की कथित एंट्री), गृह मंत्री रमेश चेन्निथला, मंत्री के. मुरलीधरन, शिबू बेबी जॉन, पिनाराई विजयन, पी. राजीव, के.बी. गणेश कुमार, एलामराम करीम और एम.वी. गोविंदन के नाम शामिल हैं। ये सभी आरोप अभी जाँच के अधीन हैं और डायरी एंट्री अकेले साक्ष्य नहीं है।
केरल सरकार इस मामले में क्या कदम उठा रही है?
राज्य सरकार ने ED से मिली जानकारी के आधार पर क्राइम ब्रांच SIT से प्रारंभिक जाँच कराने का फैसला किया है। यह निर्णय एडवोकेट जनरल की कानूनी राय के बाद आया। गृह मंत्री चेन्निथला ने कहा है कि सरकार ने ED की जानकारी को नजरअंदाज नहीं किया।
भाजपा CBI जाँच की माँग क्यों कर रही है?
शोन जॉर्ज का तर्क है कि मामले को विजिलेंस और एंटी-करप्शन ब्यूरो के बजाय क्राइम ब्रांच को सौंपना संदेहास्पद है क्योंकि गृह मंत्री चेन्निथला खुद कथित आरोपियों की सूची में हैं। इसलिए उन्होंने पूरे मामले को निष्पक्ष CBI जाँच के तहत रखने की माँग की है।
सीएमआरएल-एक्जालॉजिक मामले की पृष्ठभूमि क्या है?
केरल हाईकोर्ट के जून 2026 के फैसले के अनुसार कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने जनवरी 2024 में सीएमआरएल की जाँच SFIO को सौंपी थी। आयकर निपटान आयोग ने बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए खर्चों और बिना सेवा दिए वीना विजयन तथा एक्सलॉजिक को कथित तौर पर ₹1.72 करोड़ के भुगतान से जुड़े निष्कर्षों को सही ठहराया था।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 19 घंटे पहले
  2. कल
  3. कल
  4. 1 महीना पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 4 महीने पहले