केरल हाई कोर्ट का पिनाराई विजयन को झटका, CMRL-Exalogic केस में FIR का आदेश; विधानसभा सत्र से पहले LDF मुश्किल में
सारांश
मुख्य बातें
केरल हाई कोर्ट ने 9 अक्टूबर 2026 को विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन के खिलाफ CMRL-Exalogic वित्तीय लेनदेन मामले में एफआईआर दर्ज करने और जाँच करने का निर्देश विजिलेंस और एंटी-करप्शन ब्यूरो को दिया है। यह आदेश ऐसे समय आया है जब सोमवार, 12 अक्टूबर से 16वीं केरल विधानसभा का दूसरा सत्र शुरू होने वाला है, जिसमें 35 सदस्यों वाली लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) विधायक दल ने सरकार को कई मुद्दों पर घेरने की रणनीति बनाई थी।
हाई कोर्ट का आदेश: किन पर लगे आरोप
अदालत ने पिनाराई विजयन, उनकी बेटी टी. वीणा, उनके पति और सीपीआई (एम) विधायक पी.ए. मोहम्मद रियास तथा अन्य संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध आरोपों की जाँच का निर्देश दिया है। CMRL-Exalogic वित्तीय लेनदेन केस में यह आदेश सीपीआई (एम) के शीर्ष नेतृत्व के लिए एक बड़ी कानूनी और राजनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
गौरतलब है कि यह मामला विजयन के मुख्यमंत्री कार्यकाल से जुड़े वित्तीय लेनदेन से संबंधित बताया जाता है। अदालत के इस निर्देश के बाद, विजयन द्वारा पहले दिए गए बयानों की भी नए सिरे से राजनीतिक जाँच-परख हो सकती है।
विधानसभा सत्र: LDF की रणनीति पर संकट
16वीं केरल विधानसभा के 9 दिवसीय इस दूसरे सत्र में LDF ने मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन को कई मुद्दों पर घेरने की तैयारी की थी। इनमें मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर से सफर, पीएम श्री स्कीम और अन्य ऐसे मसले शामिल थे, जिन पर सतीशन ने विपक्ष के नेता रहते हुए पिछली एलडीएफ सरकार की आलोचना की थी।
हालाँकि, हाई कोर्ट के आदेश ने सत्र शुरू होने से पहले ही LDF को बैकफुट पर ला दिया है। आलोचकों का कहना है कि जिस पार्टी ने खुद को आक्रामक विपक्ष की भूमिका में उतारा था, वह अब अपने नेता के खिलाफ एफआईआर के राजनीतिक असर से पहले निपटने के लिए बाध्य होगी।
LDF में अंदरूनी दरारें
बाहरी कानूनी दबाव के साथ-साथ LDF आंतरिक मतभेदों से भी जूझ रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, LDF की दूसरी सबसे बड़ी घटक पार्टी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) को विपक्ष का उपनेता पद नहीं मिलने से नाराज़गी है। इस असहमति का असर सत्र से पूर्व होने वाली LDF संसदीय दल की बैठक पर भी पड़ा है।
इसके अलावा, पलक्कड़ में एक वरिष्ठ सीपीआई (एम) नेता पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोप ने पार्टी की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। उस नेता को बीते सप्ताह पार्टी के एक महत्वपूर्ण पद से हटाया जा चुका है। यह मामला एक अलग राजनीतिक विवाद के रूप में सुलग रहा है।
विधानसभा का एजेंडा
विधानसभा अध्यक्ष तिरुवंचूर राधाकृष्णन ने मीडिया को बताया कि यह सत्र मुख्यतः विधायी कार्यों के लिए बुलाया गया है। उन्होंने कहा कि 12 अक्टूबर को दो विधेयक सदन में पेश किए जाएंगे और उन्हें विषय समिति को भेजने के प्रस्ताव पर विचार होगा।
राधाकृष्णन ने यह भी बताया कि पंपा ब्लॉक के निर्माण पूर्ण होने के साथ — जिसमें 60 फ्लैट हैं — सभी विधायकों को उचित आवास आवंटन संभव हो सकेगा।
आगे क्या
LDF के सामने अब दोहरी चुनौती है — एक ओर कोर्ट के आदेश से उपजे राजनीतिक असर को संभालना, और दूसरी ओर CPI की नाराज़गी व यौन उत्पीड़न मामले के बीच सहयोगियों को एकजुट रखना। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नौ दिनों के इस सत्र में LDF अपने मूल आक्रामक एजेंडे को आगे बढ़ा पाती है या रक्षात्मक रुख अपनाने पर मजबूर होती है।