सीएमआरएल मामले में केरल HC का FIR निर्देश: विजयन के बचाव में माकपा, प्रकाश करात का 2009 वाला तर्क फिर जीवित
सारांश
मुख्य बातें
केरल उच्च न्यायालय ने शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 को कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (सीएमआरएल)-एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस वित्तीय लेनदेन मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत पिनाराई विजयन — केरल के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान नेता प्रतिपक्ष — के विरुद्ध प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने का निर्देश दिया। इस आदेश के तत्काल बाद भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने अपने नेता के बचाव में मोर्चा खोला और फरवरी 2009 में एसएनसी-लावालिन विवाद के दौरान पूर्व महासचिव प्रकाश करात द्वारा दिया गया बयान एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया।
करात का 2009 का तर्क और आज का संदर्भ
फरवरी 2009 में जब एसएनसी-लावालिन घोटाले में विजयन का नाम उभरा था, तब इस्तीफे की माँग को लेकर सवाल उठे थे। उस समय प्रकाश करात ने तर्क दिया था कि विजयन किसी सरकारी या संवैधानिक पद पर नहीं हैं — वे केवल पार्टी के केरल राज्य सचिव थे — इसलिए इस्तीफे का प्रश्न ही नहीं उठता। साथ ही करात ने घोषणा की थी कि पार्टी मामले को राजनीतिक और कानूनी, दोनों मोर्चों पर लड़ेगी।
आज स्थिति मौलिक रूप से भिन्न है। विजयन अब केवल एक पार्टी पदाधिकारी नहीं, बल्कि केरल विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष हैं — एक संवैधानिक रूप से मान्यता प्राप्त पद, जिसे कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त है। यही वह केंद्रीय विरोधाभास है जिस पर राजनीतिक हलकों में तीखी बहस छिड़ी है।
मामला क्या है: सीएमआरएल-एक्सालॉजिक कनेक्शन
कानूनी विवाद कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (सीएमआरएल) — एक सार्वजनिक क्षेत्र की इकाई — और एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस के बीच हुए कथित वित्तीय लेनदेन से उपजा है। एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस को विजयन की पुत्री टी. वीना से जुड़ी कंपनी बताया जाता है। यह उल्लेखनीय है कि इन आरोपों को अभी अदालत में साबित नहीं किया गया है। उच्च न्यायालय का FIR दर्ज करने का निर्देश केवल आपराधिक जाँच का प्रारंभिक बिंदु है — इसे दोष सिद्धि नहीं माना जा सकता।
माकपा की प्रतिक्रिया
पार्टी महासचिव एम.ए. बेबी ने कहा कि यह मामला 'राजनीतिक रूप से प्रेरित' है। उन्होंने केंद्रीय जाँच एजेंसियों पर विपक्षी नेताओं को लक्षित करने का आरोप लगाया और कांग्रेस नीत केंद्र सरकार द्वारा प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जाँच रिपोर्ट को संभालने के तरीके पर भी सवाल खड़े किए। पार्टी ने स्पष्ट किया कि वह कानूनी और राजनीतिक, दोनों स्तरों पर लड़ेगी — यही वही भाषा है जो करात ने 2009 में इस्तेमाल की थी।
राजनीतिक और वैधानिक दुविधा
यह ऐसे समय में आया है जब वामपंथी दलों पर जवाबदेही के मानकों को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं। 2009 में करात का तर्क 'सरकारी पद की अनुपस्थिति' पर टिका था, लेकिन अब विजयन एक ऐसे संवैधानिक पद पर विराजमान हैं जिसे कैबिनेट रैंक मिली हुई है। आलोचकों का कहना है कि पार्टी उसी तर्क को दोहरा रही है जो अब तथ्यात्मक रूप से लागू नहीं होता। गौरतलब है कि माकपा ने पुराने रुख पर दोबारा विचार करने का कोई संकेत अभी तक नहीं दिया है।
आगे क्या होगा
केरल पुलिस अथवा संबंधित जाँच एजेंसी को अब उच्च न्यायालय के निर्देश के आधार पर FIR दर्ज करनी होगी। माकपा कानूनी मंचों पर चुनौती देने की तैयारी में है। राजनीतिक दृष्टि से सीपीआई(एम) के सामने दोहरी चुनौती है — अदालत में अपने नेता का बचाव करना और साथ ही अपने राजनीतिक-वैचारिक सिद्धांतों में निरंतरता स्थापित करना। प्रकाश करात के 2009 के बयान की प्रासंगिकता आने वाले दिनों में और भी तीखे राजनीतिक सवाल खड़े करती रहेगी।