ईडी ने पिनराई विजयन को सीएमआरएल-एक्सालॉजिक मामले में भेजा समन, 23 अक्टूबर को पेश होने का निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को सीएमआरएल-एक्सालॉजिक मामले में पूछताछ के लिए औपचारिक समन जारी किया है। एजेंसी ने उन्हें 23 अक्टूबर 2026, शुक्रवार को उपस्थित होने का निर्देश दिया है। यह पहला अवसर है जब किसी माकपा पोलित ब्यूरो सदस्य को ईडी ने इस प्रकार तलब किया है।
मामले की पृष्ठभूमि
ईडी ने 14 अक्टूबर 2026 को इस प्रकरण में प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज की थी। यह मामला कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (सीएमआरएल) द्वारा विजयन की बेटी वीणा से जुड़ी कंपनी एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस को कथित तौर पर किए गए भुगतान से संबंधित है। इस ईसीआईआर दर्ज होने से मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी की भूमिका और अधिक औपचारिक हो गई है।
न्यायालयों में घटनाक्रम
केरल उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने विजयन और उनके दामाद, माकपा विधायक मोहम्मद रियास, की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें एकल न्यायाधीश के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज करने से पहले आरोपियों को सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य नहीं है।
इसके बाद विजयन और रियास ने इस आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी। उनकी याचिका को डायरी नंबर तो आवंटित हुआ, परंतु तत्काल सुनवाई की माँग ठुकरा दी गई, जिससे 16 अक्टूबर 2026 को इस पर कोई सुनवाई नहीं हो सकी।
दो समानांतर आपराधिक मामले
इस प्रकरण में सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो और ईडी ने अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं। पहले मामले में पिनराई विजयन प्रथम आरोपी और उनकी बेटी वीणा द्वितीय आरोपी हैं। दूसरे मामले में मोहम्मद रियास पहले और उनकी पत्नी वीणा दूसरी आरोपी के रूप में नामजद हैं। गौरतलब है कि दोनों जांच एजेंसियाँ अब समानांतर रूप से कार्रवाई कर रही हैं।
कानूनी तर्क और अदालत का रुख
विजयन, रियास और वीणा की ओर से यह दलील दी गई थी कि एकल न्यायाधीश का आदेश उनके कानूनी अधिकारों का उल्लंघन करता है, क्योंकि वे मूल कार्यवाही में पक्षकार नहीं थे और उन्हें सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इन तर्कों को अस्वीकार करते हुए कहा कि यदि मामला दर्ज करने के लिए पर्याप्त सामग्री उपलब्ध है, तो प्रारंभिक जांच अनिवार्य नहीं। इस फैसले को केरल सरकार के लिए भी एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है।
आगे क्या होगा
अब सभी की निगाहें 23 अक्टूबर पर टिकी हैं, जब विजयन को ईडी के समक्ष उपस्थित होना है। सर्वोच्च न्यायालय में अपील पर आगामी सुनवाई की तिथि भी निर्णायक साबित होगी, क्योंकि यदि रोक नहीं मिली तो सतर्कता विभाग भी एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकता है। यह मामला केरल की राजनीति और केंद्रीय जांच एजेंसियों के दायरे दोनों के लिहाज़ से एक निर्णायक मोड़ पर पहुँच चुका है।