केरल: सीएमआरएल मामले में पिनाराई विजयन की जांच के लिए एसआईटी गठित, 30 दिन में रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
केरल पुलिस ने बुधवार, 23 सितंबर 2026 को पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान विपक्ष नेता पिनाराई विजयन से जुड़े सीएमआरएल-एक्सालॉजिक मासिक भुगतान मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया। इस एसआईटी को प्रारंभिक जांच पूरी करने के लिए 30 दिन का समय दिया गया है, और यह मामला केरल की राजनीति में एक नया और संवेदनशील मोड़ ले चुका है।
एसआईटी की संरचना और कार्यक्षेत्र
एसआईटी क्राइम ब्रांच के एडीजीपी एच. वेंकटेश के पर्यवेक्षण में काम करेगी। एसपी विक्रम को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। दल में तीन पुलिस उपाधीक्षक, पाँच इंस्पेक्टर और साइबर डिवीजन के अधिकारी शामिल हैं।
उल्लेखनीय है कि इस दल के कई वरिष्ठ अधिकारी वही हैं जो 2016 से 2026 तक विजयन के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान उनके साथ काम कर चुके हैं। अब वही अधिकारी उनसे जुड़े आरोपों की जांच करेंगे — यह इस मामले का सबसे नाटकीय पहलू है।
मामले की पृष्ठभूमि
जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की रिपोर्ट में उठाए गए उन आरोपों की पड़ताल की जाएगी, जो कोचीन मिनरल्स एंड रुटाइल लिमिटेड (सीएमआरएल) और विजयन की बेटी टी. वीना की अब बंद हो चुकी आईटी कंपनी एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस के बीच कथित वित्तीय लेनदेन से जुड़े हैं। पूर्व मंत्री और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [सीपीआई(एम)] विधायक पीए मोहम्मद रियास भी इन आरोपों के दायरे में बताए जा रहे हैं।
गौरतलब है कि विजयन, रियास और सीपीआई(एम) ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। आरोपों की पुष्टि अभी पुलिस जांच या न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से होनी बाकी है।
सरकार की प्रतिक्रिया
राज्य पुलिस प्रमुख को ईडी का पत्र मिलने के बाद मुख्यमंत्री वीडी सतीशन और गृह मंत्री रमेश चेन्निथला के बीच हुई चर्चा के बाद यह कदम उठाया गया। केंद्रीय एजेंसी द्वारा भेजे गए दस्तावेजों पर कानूनी सलाह प्राप्त करने के बाद सरकार ने जांच आगे बढ़ाने का निर्णय लिया।
सतीशन ने कहा कि 'कानून अपना काम करेगा' और यह कोई राजनीतिक बदले की कार्रवाई नहीं है। चेन्निथला ने स्पष्ट किया कि सरकार ईडी द्वारा दी गई जानकारी को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकती और सर्वोच्च न्यायालय के ललिता कुमारी फैसले के आलोक में प्रारंभिक जांच की प्रक्रिया की समीक्षा की गई है।
विपक्षी दल की प्रतिक्रिया
सीपीआई(एम) ने सरकार के इस फैसले का कड़ा विरोध किया है और इस मामले को राजनीतिक एवं कानूनी रूप से लड़ने का संकल्प लिया है। मंगलवार को पार्टी कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन भी किया।
यह ऐसे समय में आया है जब 2026 के केरल विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी पहले से ही सत्ता से बाहर हो चुकी है और विजयन विपक्ष नेता की भूमिका में हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस मामले का असर राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस नीत गठबंधन और वामपंथी दलों के बीच संघर्ष को और तीखा कर सकता है।
आगे क्या होगा
एसआईटी को 30 दिनों के भीतर प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंपनी है। जांच के नतीजे तय करेंगे कि औपचारिक एफआईआर दर्ज की जाएगी या नहीं। यह मामला केरल की राजनीति में आने वाले महीनों में और अधिक गहरा असर छोड़ सकता है।