सीएमआरएल-एक्सालॉजिक मामला: पिनाराई विजयन, वीणा और रियास के खिलाफ FIR की मांग पर केरल हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा
सारांश
मुख्य बातें
केरल हाईकोर्ट ने 29 सितंबर 2026 को सीएमआरएल-एक्सालॉजिक मामले में विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन, उनकी बेटी वीणा विजयन और दामाद मोहम्मद रियास के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की मांग वाली याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। न्यायमूर्ति ए. बदरुद्दीन ने सभी पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद यह आदेश दिया।
मामले की पृष्ठभूमि
यह प्रकरण कोचीन मिनरल्स एंड रुटाइल लिमिटेड (CMRL) और वीणा विजयन की कंपनी एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस के बीच कथित वित्तीय लेनदेन से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी जांच के दौरान इन कथित लेनदेन से संबंधित सामग्री एकत्र की थी।
अधिवक्ता के.एम. शाहजहां ने ईडी की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज करने की मांग करते हुए यह याचिका दायर की थी।
राज्य सरकार की दलीलें
केरल राज्य सरकार ने याचिका का विरोध करते हुए तर्क दिया कि आरोपों की प्रारंभिक जांच किए बिना FIR दर्ज करना उचित नहीं है। महाधिवक्ता ने अदालत में कहा कि ईडी द्वारा आधार बनाई गई मुख्य सामग्री एक डायरी है, और केवल डायरी के आधार पर प्राथमिकी दर्ज नहीं की जा सकती।
सरकार ने यह भी तर्क दिया कि याचिका विचारणीय नहीं है और मामला दर्ज करने से पहले प्रारंभिक जांच अनिवार्य है। यह ऐसे समय में आया है जब मुख्यमंत्री सतीशन के नेतृत्व वाली सरकार ईडी के पत्र के आधार पर पहले ही एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर चुकी है।
ईडी का पक्ष और अदालत की टिप्पणियाँ
ईडी ने अदालत को उस पत्र की जानकारी दी, जो राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) को भेजा गया था और जिसमें विजयन तथा रियास के खिलाफ मामला दर्ज करने की सिफारिश की गई थी। एजेंसी ने जांच के दौरान दर्ज किए गए बयान भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए।
अदालत ने पूछा कि क्या ये बयान राज्य सरकार को उपलब्ध कराए गए थे। इस पर ईडी ने स्वीकार किया कि बयानों की पूरी प्रतियाँ सरकार को नहीं दी गई हैं, हालांकि एजेंसी ने कहा कि यदि पुलिस को ज़रूरत हो तो वह प्रतियाँ देने को तैयार है।
गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्वयं टिप्पणी की कि ईडी एक जांच एजेंसी है — यह टिप्पणी राज्य सरकार के उस तर्क के जवाब में आई, जिसमें कहा गया था कि ईडी पुलिस की तरह जांच एजेंसी नहीं है।
अब हाईकोर्ट के सामने मुख्य प्रश्न
अब केरल हाईकोर्ट को यह तय करना है कि क्या राज्य पुलिस प्रारंभिक जांच के बिना, केवल ईडी द्वारा उपलब्ध कराई गई सामग्री के आधार पर FIR दर्ज कर सकती है। यह निर्णय केरल की राजनीति और कानूनी प्रक्रिया दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
यह मामला एक बड़े राजनीतिक संदर्भ में भी देखा जा रहा है — पिनाराई विजयन केरल में वामपंथी लोकतांत्रिक मोर्चे (LDF) के प्रमुख नेता हैं और इस मामले में उनका नाम आना राज्य की राजनीति में गहरे असर छोड़ रहा है।