सीएमआरएल-एक्सालॉजिक मामले में FIR क्यों नहीं? केरल BJP अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने CM सतीशन से माँगा जवाब
सारांश
मुख्य बातें
केरल भाजपा (BJP) अध्यक्ष एवं विधायक राजीव चंद्रशेखर ने गुरुवार, 24 सितंबर 2026 को मुख्यमंत्री वीडी सतीशन से यह जानना चाहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा राज्य सरकार को साक्ष्य और सूचनाएँ सौंपे जाने के बाद भी सीएमआरएल-एक्सालॉजिक वित्तीय लेनदेन मामले में अब तक प्राथमिकी (FIR) दर्ज क्यों नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि यह मामला पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की पुत्री टी. वीणा से जुड़ी कंपनी से संबंधित है और इसकी निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए।
मुख्य आरोप और पृष्ठभूमि
चंद्रशेखर ने स्पष्ट किया कि सीएमआरएल पर गंभीर आरोप हैं कि उसने एक्सालॉजिक को बिना किसी सेवा के बदले में धनराशि का भुगतान किया। उन्होंने कहा, 'यह राजनीतिक भ्रष्टाचार का गंभीर आरोप है और इसकी उचित जाँच होनी चाहिए।' गौरतलब है कि यह मामला केरल में राजनीतिक भ्रष्टाचार की उन कतिपय घटनाओं में से एक है, जिन्हें लेकर विपक्ष लंबे समय से मोर्चा खोले हुए है।
CM सतीशन से सीधे सवाल
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष ने यह भी पूछा कि राज्य सरकार न तो FIR दर्ज कर रही है और न ही विजिलेंस जाँच का आदेश दे रही है। उन्होंने तर्क दिया, 'अगर आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है तो जाँच से यह बात खुद-ब-खुद सामने आ जानी चाहिए।' साथ ही उन्होंने उन मीडिया रिपोर्टों का भी उल्लेख किया जिनमें कथित तौर पर सीएमआरएल की डायरी में मुख्यमंत्री वीडी सतीशन का नाम दर्ज होने की बात कही गई है। चंद्रशेखर ने माँग की कि सतीशन स्वयं स्पष्ट करें कि क्या उन्होंने डायरी में अंकित किसी राशि को प्राप्त किया था।
यूडीएफ सरकार के 150 दिनों पर निशाना
चंद्रशेखर ने राज्य में संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF) सरकार के सत्ता में 150 दिन पूरे होने के अवसर पर उसके कामकाज पर भी कड़े सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा UDF सरकार पूर्ववर्ती वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) सरकार के राजनीतिक और प्रशासनिक तौर-तरीकों को ही आगे बढ़ा रही है। उन्होंने रेंज रोवर और प्राइवेट जेट के इस्तेमाल से जुड़े विवाद का भी उल्लेख किया।
पिनराई विजयन के कार्यकाल पर भी सवाल
BJP नेता ने पूछा, 'पिनराई विजयन ने 10 वर्षों में सब कुछ ठीक करने का वादा किया था — इस दौरान केरल को क्या मिला?' उन्होंने भ्रष्टाचार के आरोपों, विकास की धीमी रफ़्तार, बेरोज़गारी और महँगाई का हवाला देते हुए कहा कि जनता को LDF शासन काल में इन्हीं समस्याओं का सामना करना पड़ा।
जाँच की माँग और आगे की राह
चंद्रशेखर ने यह स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार के आरोपों की जाँच कानून के अनुसार होनी चाहिए और ऐसे मामलों का निपटारा राजनीतिक समझौते के ज़रिये नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, 'इस सवाल का जवाब मुख्यमंत्री को खुद देना चाहिए। अगर आरोप बेबुनियाद हैं तो जाँच होने दीजिए और सच्चाई सामने आने दीजिए।' यह मामला आने वाले दिनों में केरल की राजनीति में नया मोड़ ला सकता है, खासकर तब जब ED की जाँच अभी भी जारी बताई जा रही है।